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विपक्ष की आपत्ति से 'एक देश, एक चुनाव' समिति ने सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावित ब्रीफिंग को रद्द किया

संसदीय स्थायी समिति ने विपक्षी दलों की लिखित आपत्ति के बाद 6 अक्टूबर को न्यायालय के साथ नियोजित अनौपचारिक चर्चा को स्थगित कर दिया। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कार्यक्रम संबंधी कठिनाइयों का हवाला देते हुए इसे टाल दिया, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इसे संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध कहा। इस कदम को उन्होंने संसद‑न्यायालय के बंटवारे को खतरे में डालने वाला कहा।

2 अक्टूबर 2026 को 10:04 am बजे
विपक्ष की आपत्ति से 'एक देश, एक चुनाव' समिति ने सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावित ब्रीफिंग को रद्द किया

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

नई दिल्ली: विपक्षी दलों के सदस्यों की कड़ी आपत्ति के बाद मोदी सरकार के ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय स्थायी समिति ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तावित दौरे को रद्द कर दिया है. इस दौरे के दौरान न्यायाधीशों के साथ ‘अनौपचारिक चर्चा’ होनी थी.

समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि कार्यक्रम संबंधी दिक्कतों के कारण दौरा स्थगित किया गया है. द हिंदू ने चौधरी के हवाले से कहा, ‘मेरी कुछ अन्य जिम्मेदारियां भी हैं जिन्हें मुझे पूरा करना है.’

अखबार ने यह भी बताया कि विपक्ष के एक सदस्य ने प्रस्तावित बैठक पर अपनी आपत्ति लिखित रूप में चौधरी को दी थी.

हालांकि, चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित कानून पर चर्चा करना नहीं था. उन्होंने कहा, ‘अध्ययन दौरे का उद्देश्य समिति के सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट से परिचित कराना था, जिसमें उसकी लाइब्रेरी भी शामिल थी, क्योंकि कुछ सदस्य पहले कभी सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे.’

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को बताया था कि समिति की 6 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के साथ डेढ़ घंटे की चर्चा प्रस्तावित थी. इसमें विधेयक पर चर्चा होनी थी.

उन्होंने कहा, ‘यह असंवैधानिक है. यह शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है… क्या अब किसी कानून पर चर्चा करने वाली कोई भी समिति सुप्रीम कोर्ट जाएगी?’

सिब्बल ने कहा कि उन्हें इस प्रस्तावित बैठक के बारे में समिति के एक सदस्य से जानकारी मिली थी, जिसने शीर्ष अदालत का दौरा करने के फैसले का विरोध किया था.

सिब्बल ने बताया कि एक देश, एक चुनाव समिति की ओर से एक कार्यक्रम जारी किया गया था, जिसका शीर्षक था– ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की संयुक्त समिति का भारत के सुप्रीम कोर्ट का स्थानीय अध्ययन दौरा कार्यक्रम.’ इसके कार्यक्रम में मंगलवार, 6 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे से 6 बजे तक एक देश, एक चुनाव पर ‘अनौपचारिक चर्चा’ शामिल थी.

सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में मैंने कभी नहीं सुना कि कोई संसदीय समूह किसी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए और न्यायाधीशों को समझाए कि नया कानून किस बारे में है.’

प्रस्तावित चर्चा की कड़ी आलोचना करते हुए सिब्बल ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ में कानून से जुड़े कई जटिल सवाल हैं, जिनकी संवैधानिक वैधता का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करता है. उनके अनुसार, ऐसी चर्चा शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत को खत्म कर देगी.

सिब्बल ने कहा कि एक देश, एक चुनाव को लेकर कई सवाल हैं, जिनमें राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल भी शामिल है. उन्होंने कहा कि हर पांच साल में पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए राज्यों में अनिश्चित अवधि तक निर्वाचित सरकारें नहीं रह सकतीं.

उन्होंने कहा कि अंततः सरकार की ओर से देश की शीर्ष संवैधानिक अदालत के सामने की जाने वाली ‘एकतरफा ब्रीफिंग’ एक देश, एक चुनाव को लेकर होने वाली चर्चाओं और बहस तथा अदालत में दायर होने वाली याचिकाओं को भी निष्प्रभावी कर देगी.

सिब्बल ने कहा, ‘अब भारत सरकार की समिति सुप्रीम कोर्ट में जाकर उसे समझाएगी कि उसका कानून अच्छा क्यों है? उसी कानून के खिलाफ इस अदालत में याचिकाएं दायर होंगी और इसी अदालत को तय करना होगा कि वह कानून कायम रहना चाहिए या उसे रद्द कर दिया जाना चाहिए?’

अब संसदीय समिति की सोमवार, 5 अक्टूबर को संसद की लाइब्रेरी में पत्रकारों और अर्थशास्त्रियों से मुलाकात प्रस्तावित है. पत्रकारों की सूची में कथित तौर पर कारोबारी और टेलीविजन कमेंटेटर सुहेल सेठ का नाम भी शामिल है, हालांकि उनके नाम की स्पेलिंग गलत लिखी गई है.

सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दी थी. समिति ने देश में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों – जिनमें पंचायतें और नगरपालिकाएं शामिल हैं – के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी.

18,626 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में समिति ने एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को दो चरणों में लागू करने की सिफारिश की थी. पहले चरण में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने और उसके बाद 100 दिनों के भीतर नगरपालिकाओं तथा पंचायतों के चुनाव कराने का प्रस्ताव था.

केंद्र सरकार द्वारा संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 संसद में पेश किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने इस कदम का विरोध किया और विधेयकों की आलोचना की थी. इसके बाद दोनों विधेयकों को चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया.

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