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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को गंगा के फ्लड‑प्लेन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8 हफ्ते की अंतिम समय सीमा दी

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नौज़र घाट से नूरपुर घाट तक गंगा के फ्लड‑प्लेन में मौजूद सभी अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए आठ हफ्ते का आखिरी मौका दिया और बताया कि इस अवधि के बाद मुख्य सचिव सहित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जा सकती है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई में अतिक्रमण हटाने की पूरी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी और अब कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

2 अक्टूबर 2026 को 09:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को गंगा के फ्लड‑प्लेन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8 हफ्ते की अंतिम समय सीमा दी

सौजन्य से:- Navbharat Times

बिहार के मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को तलब कर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना में गंगा के फ्लड प्लेन पर बने सभी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने के अपने आदेश का पालन करने के लिए बिहार सरकार को आठ सप्ताह का अंतिम मौका दिया है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पटना में गंगा के फ्लड प्लेन पर बने सभी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने के अपने आदेश का पालन करने के लिए बिहार सरकार को आठ सप्ताह का अंतिम मौका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा और आदेश का पालन नहीं होने पर बिहार के मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को तलब कर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि आठ सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की पूरी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

बाढ़ के कारण कार्रवाई प्रभावित

शीर्ष अदालत ने याद दिलाया कि 21 जुलाई को उसने बिहार सरकार को नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के फ्लड प्लेन में मौजूद प्रत्येक अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय ने कोर्ट को बताया कि आदेश का आंशिक रूप से पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ गया और संबंधित पूरा इलाका पानी में डूब गया। इसके चलते अधिकारियों के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम अपने निर्देशों के पालन के लिए आखिरी बार आठ सप्ताह का समय दे रहे हैं। ऐसा नहीं होने पर हमें बिहार के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को अपने समक्ष बुलाना पड़ेगा और आगे की कार्रवाई भी कर सकते हैं।

‘इसके बाद और समय नहीं मिलेगा’

पीठ ने स्पष्ट किया कि आठ सप्ताह की अवधि समाप्त होने के बाद अगली सुनवाई पर अतिक्रमण हटाने की पूरी रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने कहा, “इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के जून 2020 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। NGT ने गंगा के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील फ्लड प्लेन में अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी।

दावा करने वालों को दस्तावेज देने होंगे

28 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलों का भी उल्लेख किया था। उनका कहना था कि उनके निर्माण उनकी अपनी जमीन पर हैं और संबंधित भूमि फ्लड प्लेन में नहीं आती।कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोग सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उचित प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्हें जमीन के मालिकाना हक से जुड़े सभी दस्तावेज, निर्माण की स्वीकृति और भवन निर्माण की अनुमति पेश करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों के अभाव में उनके प्रतिनिधित्व पर विचार नहीं किया जाएगा। जुलाई में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध निर्माण को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए बिहार सरकार को नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच सभी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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