बिहार टेंडर घोटाला: ठेकेदार रिशु श्री को सुप्रीम कोर्ट से राहत, चार हफ्ते तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक
Rishu Shree: बिहार में टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी रिशु श्री की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्तों के लिए रोक लगा दी है। पटना: बिहार में सरकारी निविदाएं कुछ खास कंपनियों को दिलाने के लिए कमीशन ले…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Rishu Shree: बिहार में टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी रिशु श्री की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्तों के लिए रोक लगा दी है।
पटना: बिहार में सरकारी निविदाएं कुछ खास कंपनियों को दिलाने के लिए कमीशन लेने और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले ठेकेदार रिशु श्री को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल के लिए राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने रिशु श्री की गिरफ्तारी पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दी है। रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री पर निविदा दिलाने के लिए कमीशन लेने और बिचौलिये के तौर पर काम करने का आरोप है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ठेकेदार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों पर गौर किया और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वह अगले चार हफ्तों तक उसे गिरफ्तार न करे।
हम चार हफ्ते के लिए रिशु श्री को सुरक्षा देते हैं: सुप्रीम कोर्ट
प्रधान न्यायाधीश ने आदेश में कहा, 'हम चार हफ्ते के लिए सुरक्षा देते हैं और पटना उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने की छूट देते हैं। उच्च न्यायालय से अनुरोध है कि वह सुरक्षा की अवधि के दौरान ही जमानत याचिका पर फैसला करे।' हालांकि, पीठ ने हाई कोर्ट के 18 मई के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोपी रिशु श्री की उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई थी।
आरोपी ने हाई कोर्ट से जमानत नहीं मांगी: प्रधान न्यायाधीश
सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने हाई कोर्ट से जमानत नहीं मांगी, बल्कि ईडी की ओर से उसके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'समस्या यह है कि आपने जमानत याचिका दायर नहीं की। आप वहां मामला रद्द करवाने के लिए गए थे। मामला (प्राथमिकी) रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट की कुछ सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन जमानत देने के मामले में ऐसा नहीं है।'
वकील ने याचिका में पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों पर उठाए सवाल
वकील मनोहर प्रताप के जरिए शीर्ष अदालत में दायर याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज बयानों के आगे उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
पटना हाई कोर्ट ने 18 मई 2026 के अपने आदेश में रिशु श्री की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) एक 'आंतरिक दस्तावेज' है, न कि प्राथमिकी जैसा कोई कानूनी दस्तावेज।
लेखक के बारे मेंसुधेंद्र प्रताप सिंहसुधेंद्र प्रताप सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह 2020 में नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राज्य टीम में बिहार-झारखंड और राजस्थान के लिए काम करते हैं। पत्रकारिता की शुरुआत अखबार में रिपोर्टिंग से की। बीते 14 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह न्यूज18 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका में कार्यरत थे।
बिहार की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना सुधेंद्र प्रताप की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 14 साल से कार्यरत
सुधेंद्र प्रताप सिंह ने साल 2012 में लोकल न्यूज पेपर से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद कल्पतरु एक्सप्रेस अखबार में संपादकीय डेस्क पर काम किया। हिंदुस्तान समाचार पत्र में रिपोर्टिंग की। इसके बाद 2014 में आईबीएन खबर डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। फिर न्यूज18 हिंदी में सेंट्रल डेस्क पर काम किया। वर्तमान में नवभारत टाइम्स वेबसाइट के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सुधेंद्र प्रताप सिंह ने साल 2008 में प्रतिष्ठित डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन (MA) किया है।इसके बाद साल 2011 में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है।... और पढ़ें
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