होमकानूनराज्यसभा नामांकन रद्द होने का आधार बना मामला अदालत ने लौटाया, मीनाक्षी नटराजन को राहत
कानून

राज्यसभा नामांकन रद्द होने का आधार बना मामला अदालत ने लौटाया, मीनाक्षी नटराजन को राहत

हैदराबाद: हैदराबाद की एक अदालत ने शुक्रवार (12 जून, 2026) को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक पूर्व महिला पार्षद द्वारा दायर विवादास्पद निजी शिकायत को लौटा दिया. हालांकि, तब तक इसका राजनीतिक असर सामने आ चुका था.…

The Wire - Hindi के अनुसार13 जून 2026 को 02:38 pm बजे
राज्यसभा नामांकन रद्द होने का आधार बना मामला अदालत ने लौटाया, मीनाक्षी नटराजन को राहत

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

हैदराबाद: हैदराबाद की एक अदालत ने शुक्रवार (12 जून, 2026) को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक पूर्व महिला पार्षद द्वारा दायर विवादास्पद निजी शिकायत को लौटा दिया. हालांकि, तब तक इसका राजनीतिक असर सामने आ चुका था. तीन दिन पहले ही नटराजन का राज्यसभा नामांकन इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में इस लंबित अदालती मामले का उल्लेख नहीं किया था.

अब तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने चेतावनी दी है कि इस मामले से जुड़ी जानकारी बाहर कैसे पहुंची, इसकी जांच राज्य की कांग्रेस सरकार कराएगी और जानकारी लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने शनिवार (13 जून, 2026) को पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका है।

महेश कुमार गौड़ ने कहा, ‘मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला दर्ज था और न ही कोई अपराध संख्या (क्राइम नंबर) आवंटित की गई थी, जिसके आधार पर उनका नामांकन खारिज किया जा सके.’

इससे पहले मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने नई दिल्ली में कहा था कि पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का दो व्यक्तियों के बीच चल रहे किसी विवाद को सुलझाने में कोई प्रत्यक्ष संबंध या भूमिका नहीं थी. एक निजी शिकायत दायर किए जाने के बाद अदालत की नियमित प्रक्रिया के तहत उन्हें समन जारी किया गया था.

रेड्डी ने कहा कि चुनावी हलफनामे में ऐसा कोई कॉलम नहीं होता, जिसमें अदालत द्वारा जारी समन की जानकारी देना अनिवार्य हो. उम्मीदवारों को केवल अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का विवरण देना होता है.

उधर, अदालत ने शिकायतकर्ता महिला की याचिका यह कहते हुए लौटा दी कि चतुर्थ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. स्वर्णलता की अदालत के पास ‘वर्तमान विधायकों के खिलाफ संज्ञान लेने संबंधी याचिका पर विचार करने का ज्यूरिस्डिक्शन नहीं है.’

भारतीय कानून के तहत शिकायतकर्ता महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में उचित ज्यूरिस्डिक्शन वाली अदालत ही शिकायत पर विचार कर सकती है. इसलिए अभिलेख शिकायतकर्ता को वापस करते हुए निर्देश दिया गया कि वह अपनी शिकायत उचित मंच के समक्ष प्रस्तुत करें, जहां उसकी सुनवाई की जा सके.

इस मामले में नामजद सात प्रतिवादियों में से चार वर्तमान विधायक हैं, जबकि मीनाक्षी नटराजन पूर्व सांसद हैं.

शिकायतकर्ता महिला ने कांग्रेस नेता द्वारा कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित अपनी शिकायतों को पुलिस द्वारा पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर बंद किए जाने के बाद इन लोगों के खिलाफ एक प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी.

महिला का आरोप था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने नेता के. शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. रेड्डी नारायणपेट जिले में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. महिला ने उन पर यौन उत्पीड़न करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था.

मीनाक्षी नटराजन और अन्य प्रतिवादियों की ओर से अदालत में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रवि शंकर जंध्याला ने बताया कि महिला ने अदालत का रुख तब किया, जब हैदराबाद के पंजागुट्टा और उस्मानिया विश्वविद्यालय पुलिस थानों के साथ-साथ कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित कब्बन पार्क पुलिस थाने ने भी रेड्डी के खिलाफ दर्ज उसकी शिकायतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी.

जंध्याला ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं है.

द वायर से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता रवि शंकर जंध्याला ने कहा कि पुलिस ने यह मामला करीब 22 महीने पहले बंद कर दिया था, लेकिन महिला द्वारा प्रोटेस्ट पिटीशन दायर किए जाने तक कांग्रेस की कानूनी टीम ने इस पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं की.

उन्होंने कहा, ‘मुझे इस मामले में तब जोड़ा गया, जब मंगलवार को मजिस्ट्रेट अदालत में इसकी सुनवाई होनी थी. सुनवाई से महज़ एक दिन पहले मुझे पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.’

महिला ने अगस्त 2025 में यह याचिका दायर की थी. इसके बाद 12 जून तक अदालत में कार्यवाही मुख्यतः इसी प्रश्न पर चलती रही कि उसकी याचिका पर संज्ञान लिया जाए या नहीं.

अदालत द्वारा जारी समन के जवाब में मीनाक्षी नटराजन ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, क्योंकि के. शिवा कुमार रेड्डी के कथित कृत्यों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने अदालत से मामले को खारिज करने का अनुरोध किया था.

इस बीच रवि शंकर जंध्याला ने आरोप लगाया कि महिला ने जिस अदालत में अपनी विरोध याचिका दायर की, वह इस मामले की सुनवाई के लिए उपयुक्त मंच नहीं था. उनके मुताबिक, इससे यह संकेत मिलता है कि याचिका दायर करने के पीछे महिला की कुछ अन्य मंशा भी हो सकती थी.

उन्होंने कहा कि यदि इस कार्यवाही का निपटारा पहले हो गया होता, तो मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा नामांकन रद्द होने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. उनका यह भी कहना था कि मामले में जवाब देने और आवश्यक कदम उठाने में प्रतिवादी पक्ष की ओर से भी देरी हुई.

दूसरी ओर, याचिका दायर करने वाली महिला ने द वायर से बातचीत में आरोप लगाया कि शुक्रवार को अदालत में सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों (कांग्रेस नेताओं) के समर्थन में बड़ी संख्या में वकील अदालत कक्ष में मौजूद थे.

उन्होंने दावा किया, ‘करीब पचास वकील अदालत में पहुंचे थे. उन्हें मामले को प्रभावित करने और इसकी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए लगाया गया था.’

महिला का कहना था कि शुरुआत से ही उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती रही है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘मुझे अदालत तक पहुंचने से रोकने की भी कोशिश की गई.’

उधर, शुक्रवार को बड़ी संख्या में वकीलों और समर्थकों की मौजूदगी की एक वजह यह भी थी कि उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस पार्टी की एक अलग याचिका पर सुनवाई होनी थी, जिसमें मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी.

हालांकि, शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि उनके द्वारा दर्ज कराए गए पुलिस मामलों को ‘राजनीतिक दबाव’ के चलते पर्याप्त साक्ष्य न होने का हवाला देकर बंद कर दिया गया.

उन्होंने द वायर से कहा कि उन्होंने कई बार कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क कर के. शिवा कुमार रेड्डी को निलंबित करने की मांग की, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

महिला ने दावा किया, ‘मीनाक्षी नटराजन ने मुझसे कहा था कि उन्हें निलंबित कर दिया गया है. लेकिन अगर ऐसा था, तो फिर वह अपनी भतीजी और नारायणपेट की विधायक पर्णिका रेड्डी के साथ आधिकारिक मंचों पर कैसे दिखाई दे रहे थे?’

इसके साथ ही महिला ने मीनाक्षी नटराजन के प्रति सहानुभूति व्यक्त की और आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अनैतिक तरीकों का सहारा लिया.

उन्होंने कहा कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा है.

महिला ने यह भी कहा कि वह सोमवार को के. शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ एक नई याचिका दायर करेंगी.

सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई. मजिस्ट्रेट ने कांग्रेस नेताओं से संबंधित मामले की फाइल मंगवाई और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं.

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रवि शंकर जंध्याला ने दलील दी कि इस मामले में समन जारी करने का ज्यूरिस्डिक्शन अदालत के पास नहीं है. अदालत ने उनसे इस दावे के समर्थन में आधार प्रस्तुत करने को कहा.

इसके बाद जंध्याला ने एक मेमो दाखिल किया. अदालत ने उस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता महिला की याचिका लौटा दी.

इस बीच, शुक्रवार (12 जून, 2026) को ही सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपना राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी.

हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि नटराजन इस मामले में चुनाव याचिका दायर कर उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं.

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

जेल कर्मी पर हमले की कहानी निकली झूठी: अदालत ने कैदी को किया बरी; सरकारी पक्ष को जज ने लगाई फटकार
कानून

जेल कर्मी पर हमले की कहानी निकली झूठी: अदालत ने कैदी को किया बरी; सरकारी पक्ष को जज ने लगाई फटकार

सेबी ने एसआईसीसीएल-ओएफसीडी मामले में सैट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया - इंडिया लीगल
कानून

सेबी ने एसआईसीसीएल-ओएफसीडी मामले में सैट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया - इंडिया लीगल

2.7K views · 12 reactions | #CoverStory |

'होममेकर' नहीं, 'नेशन बिल्डर' कहिए

गृहिणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

देश निर्माण में गृहिणी का बड़ा योगदान 

एक गृहिणी की मासिक आय ₹30,000 तय की 

शिक्षक ही नहीं, गृहिणी भी 'नेशन बिल्डर'

गृहिणी के योगदान का विश्लेषण 

देखिए सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Rekha Aggarwal और सोशल एक्टिविस्ट Dr Rakhi Agarwal से ज़ी बिज़नेस एंकर Deepak Dobhal की खास बातचीत    

#SupremeCourt #Homemaker #NationBuilder #Housewife #WomenEmpowerment #WomenRights | Zee Business
कानून

2.7K views · 12 reactions | #CoverStory | 'होममेकर' नहीं, 'नेशन बिल्डर' कहिए गृहिणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला देश निर्माण में गृहिणी का बड़ा योगदान एक गृहिणी की मासिक आय ₹30,000 तय की शिक्षक ही नहीं, गृहिणी भी 'नेशन बिल्डर' गृहिणी के योगदान का विश्लेषण देखिए सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Rekha Aggarwal और सोशल एक्टिविस्ट Dr Rakhi Agarwal से ज़ी बिज़नेस एंकर Deepak Dobhal की खास बातचीत #SupremeCourt #Homemaker #NationBuilder #Housewife #WomenEmpowerment #WomenRights | Zee Business

क्या उधारकर्ता SARFAESI अपील में पूर्व जमा राशि छोड़ सकते हैं? कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा नहीं
कानून

क्या उधारकर्ता SARFAESI अपील में पूर्व जमा राशि छोड़ सकते हैं? कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा नहीं

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आवेदन में त्रुटि पर टीईटी उम्मीदवारों की याचिका खारिज कर दी
कानून

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आवेदन में त्रुटि पर टीईटी उम्मीदवारों की याचिका खारिज कर दी

व्यापार कानून और नीति अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ: ज्ञान को जोड़ना, व्यापार समुदाय का साथ देना।
कानून

व्यापार कानून और नीति अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ: ज्ञान को जोड़ना, व्यापार समुदाय का साथ देना।

सुप्रीम कोर्ट पर नेताओं की टिप्पणी आपत्तिजनक, मंत्री राकेश सिंह बोले-ऐसे लोगों के खिलाफ कोर्ट ले संज्ञान
कानून

सुप्रीम कोर्ट पर नेताओं की टिप्पणी आपत्तिजनक, मंत्री राकेश सिंह बोले-ऐसे लोगों के खिलाफ कोर्ट ले संज्ञान

2024 के भूमि कानून के अनुसार, ऐसे 5 मामले हैं जिनमें भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र हस्तांतरित नहीं किए जा सकते हैं।
कानून

2024 के भूमि कानून के अनुसार, ऐसे 5 मामले हैं जिनमें भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र हस्तांतरित नहीं किए जा सकते हैं।

ताज़ा ख़बरें