पति के नाम पर घर? पत्नी को भी है कानूनी रहने का अधिकार
भले ही घर का कानूनी मालिक पति का नाम हो, कानून इसे स्वाभाविक रूप से पत्नी को बाहर नहीं कर सकता। घरेलू हिंसा (सुरक्षा और संरक्षण) अधिनियम 2005 के तहत विवाहित महिला को ‘साझा घर’ में रहने का अधिकार मिलता है, जिससे घर से निकाले जाने की स्थिति में उसे सुरक्षा मिलती है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर घर उनके पति के नाम है तो क्या पति उन्हें उस घर से निकाल सकता है? खासकर घरेलू विवाद या हिंसा की स्थिति में यह सवाल और भी अहम हो जाता है। कानून में इसका जवाब सिर्फ घर के मालिकाना हक से तय नहीं होता। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 में महिला के साझा घर में रहने के अधिकार की बात कही गई है। तो आइए विस्तार से जानते हैं।
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पति के नाम है घर तो क्या पत्नी को रहने का अधिकार नहीं? जानें घरेलू हिंसा कानून में महिलाओं के अधिकार
Mon, 28 Sep 2026 09:58 AM IST
दीक्षा पाठक
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Mon, 28 Sep 2026 09:58 AM IST
सार
Husband Owns the House: शादी के बाद जिस घर में पत्नी पति के साथ घरेलू रिश्ते में रह रही है, वह कुछ परिस्थितियों में कानून की नजर में ‘साझा घर’ माना जा सकता है। ऐसे घर पर पत्नी का रहने का अधिकार सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि मकान पति के नाम है। घरेलू हिंसा कानून में महिला के निवास के अधिकार को खास सुरक्षा दी गई है।
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