चीन दुनिया पर दबाव बढ़ाता है एक कानून के सहारे
चीन ताइवान पर दबाव बनाने के लिए अब सिर्फ सैन्य ताकत नहीं बल्कि कानूनों का सहारा ले रहा है. यह नया तरीका पूरे इंडो-पैसिफिक में तनाव बढ़ा सकता है. ताइवान ने आरोप लगाया है कि चीन अपने नए जातीय एकता कानून और अन्य कानूनी हथकंडों का इस्तेमाल करके अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.

सौजन्य से:- orfonline.org
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चीन ताइवान पर दबाव बनाने के लिए अब सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, बल्कि कानूनों का भी सहारा ले रहा है. पढ़ें, कैसे बीजिंग की यह नई रणनीति पूरे इंडो-पैसिफिक में तनाव बढ़ा सकती है.
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ताइवान के पूर्वी समुद्री इलाके में चीन की बार-बार कानून लागू करने के नाम पर की जा रही गश्त ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. ताइवान ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह अपने नए जातीय एकता कानून समेत दूसरे कानूनी हथकंडों का इस्तेमाल करके अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
समुद्र में चीन की ये दबाव बनाने वाली गतिविधियां तब शुरू हुई हैं, जब जापान और फिलीपींस ने अपने-अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और महाद्वीपीय शेल्फ की समुद्री सीमा तय करने का फैसला किया है. 4 जुलाई को चीन के जहाज ताइवान के हुआलिएन इलाके के काफी करीब तक पहुंच गए. चीन का कहना है कि उसे इस इलाके में गश्त करने का पूरा अधिकार है ताकि वह चीनी मछुआरों के 'वैध अधिकारों' और देश की संप्रभुता की रक्षा कर सके.
चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के तहत काम करने वाले चाइना इंस्टीट्यूट फॉर मरीन अफेयर्स ने 2 जुलाई को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि जिस समुद्री इलाके की सीमा जापान और फिलीपींस तय करना चाहते हैं, उसका बड़ा हिस्सा चीन के दावे से ओवरलैप करता है.
ताइवान का आरोप है कि चीन के तटरक्षक बल के जहाज कारोबारी जहाजों को रोककर उनसे पूछताछ करके उन्हें परेशान कर रहे हैं. पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है, जब चीन ने ताइवान के पूर्वी तट के पास समुद्र में अपने तटरक्षक बल के जहाज भेजे हैं. चीनी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि वे भविष्य में भी कानूनी क्षेत्र में ऐसी गश्त नियमित रूप से जारी रखेंगे.
ताइवान का कहना है कि चीन कानूनी हथकंडों के जरिए नए तथ्य गढ़ने और जमीन व समुद्र पर नए दावे खड़े करने की कोशिश कर रहा है. ताइवान की मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने कहा कि 'किसी गैरकानूनी काम को बार-बार दोहराने से वह कानूनी नहीं हो जाता.
ताइवान ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह अपने नए जातीय एकता कानून समेत दूसरे कानूनी हथकंडों का इस्तेमाल करके अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. समुद्र में चीन की ये दबाव बनाने वाली गतिविधियां तब शुरू हुई हैं, जब जापान और फिलीपींस ने अपने-अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ की समुद्री सीमा तय करने का फैसला किया है.
जुलाई से लागू चीन के नए जातीय एकता कानून में कहा गया है कि चीन के भीतर या बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति या संगठन अगर जातीय एकता को नुकसान पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इस कानून का मसौदा इस तरह तैयार किया गया है कि 'जातीय एकता को नुकसान पहुंचाना' या 'जातीय एकता की प्रगति में बाधा डालना' जैसी बातों से ताइवानी समाज के खिलाफ कार्रवाई करने की ज्यादा छूट मिल जाती है. ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इस कानून को 'बुरा कानून' बताया है. लाई ने यह भी चेतावनी दी कि बीजिंग अपने इन कानूनी हथकंडों के जरिए विदेशी सरकारों, सांसदों और कंपनियों को भी दबाव और प्रतिबंधों के जरिए निशाना बनाना चाहता है.
चित्र 1 : दक्षिण चीन सागर में चीन की नाइन-डैश लाइन
स्रोत: ग्रेगरी बी. पोलिंग. ऑन डेंजरस ग्राउंड: अमेरिका की सदी दक्षिण चीन सागर में (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस [किंडल संस्करण], 2022. पृ.2.
जून की शुरुआत में प्राटास द्वीपों के पास चीनी गश्त, जापान और फिलीपींस के बीच समुद्री सीमा तय करने की बातचीत पर चीन की आपत्ति और ताइवान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीनी शोध जहाजों की घुसपैठ-ये सभी उसकी नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा हैं.
चीनी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि वे भविष्य में भी कानूनी क्षेत्र में ऐसी गश्त नियमित रूप से जारी रखेंगे. ताइवान का कहना है कि चीन कानूनी हथकंडों के जरिए नए तथ्य गढ़ने और जमीन व समुद्र पर नए दावे खड़े करने की कोशिश कर रहा है.
7 जुलाई को सेनकाकू द्वीप समूह के पास चीन और जापान के तटरक्षक बल के जवान आमने-सामने आकर पीछे हट गए. चीन के तटरक्षक बल ने कहा कि ये द्वीप शुरू से ही चीन के क्षेत्र का हिस्सा हैं. इसी तरह स्कारबोरो शोल में भी आमना-सामना फिलीपींस और चीन के बीच है. फिलीपींस की आपत्ति है कि स्कारबोरो शोल के आसपास चीन के जहाजों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है. सितंबर 2025 में चीन पहले ही स्कारबोरो शोल को प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया था.
सिंगापुर में शांग्री-ला डायलॉग के दौरान फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो टियोडोरो ने चीन की समुद्री दबाव वाली नीति की आलोचना की थी तो चीन ने उन पर प्रतिबंध लगा दिए. इन सभी कदमों को एक साथ देखें तो साफ है कि चीन विवादित इलाकों में अपने नियंत्रण का स्थायी आधार तैयार कर रहा है.
चीन की यात्रा के दौरान ट्रंप से मुलाकात में शी चिनफिंग ने ताइवान को अमेरिका-चीन संबंधों का 'सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा' बताया. शी ने कहा कि अगर ताइवान के मुद्दे को सही तरीके से संभाला गया, तो दोनों देशों के रिश्ते स्थिर रहेंगे. उसके बाद से ट्रंप ताइवान को लेकर बीजिंग को मिले-जुले संकेत देते दिखाई दिए हैं. शी चिनफिंग से मुलाकात के बाद फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ताइवान के साथ अमेरिका के रिश्ते को तटस्थ बताया था.
चीन का नया कानून अपनी सीमा से बाहर भी गंभीर असर डाल सकता है. यह कानून बीजिंग को ऐसा बहाना देता है, जिसके आधार पर वह विदेशों में रहने वाले लोगों तथा संस्थाओं को भी निशाना बना सकता है.
चीन में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले ही बीजिंग ने साफ कर दिया था कि वह किन मुद्दों पर अमेरिका से कोई समझौता नहीं चाहता. इनमें सबसे पहले ताइवान का मुद्दा, फिर लोकतंत्र और मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था और चीन के विकास के अधिकार शामिल थे.
निष्कर्ष के तौर पर तीन बातें सबसे अहम हैं. पहली, बीजिंग की मौजूदा कार्रवाई सिर्फ ताइवान तक सीमित नहीं है. यह एक बड़ी और कई मोर्चों पर चल रही रणनीति का हिस्सा है. दूसरी, चीन के कानूनी हथकंडे यह संकेत देते हैं कि दक्षिण चीन सागर एक बार फिर उसकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर आ गया है. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, चीन का नया कानून अपनी सीमा से बाहर भी गंभीर असर डाल सकता है. यह कानून बीजिंग को ऐसा बहाना देता है, जिसके आधार पर वह विदेशों में रहने वाले लोगों तथा संस्थाओं को भी निशाना बना सकता है.
यानी यह कानून सिर्फ चीन के भीतर लागू होने वाला नियम नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीजिंग अपने कानूनी अधिकारों का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
कल्पित ए. मनकीकर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में फेलो हैं.
कीरा पोटिनेनी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रेटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में इंटर्न हैं.
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Kalpit A Mankikar is a Fellow with Strategic Studies programme and is based out of ORFs Delhi centre. His research focusses on China specifically looking ...
Read More +Kiera Potineni is an Intern with the Strategic Studies Programme at the Observer Research Foundation. ...
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