शरिया कानून: ब्रिटिश अखबार की दोहरी मानसिकता से खुद को बचाएं, अपने देश में चाहिए: रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल
भारत में शरिया कानून चाहिए, भारत में अच्छा लगता है, लेकिन ब्रिटेन में नहीं: रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने ब्रिटिश अखबार को जमकर सुना दिया। पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाली संस्थाओं या सरकारों के नियम हमेशा दोहरे रहे हैं, यह मीडिया की ताकत से होता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
'पश्चिमी देशों की सरकारों के नियम हमेशा दोहरे रहे हैं', UCC-शरिया कानून से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने रिएक्ट किया है। उन्होंने क्या कहा जानिए।
नई दिल्ली: भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने एक पोस्ट पर अहम टिप्पणी की है। पूरा मामला एक ब्रिटिश अखबार से जुड़ा है, जिसका जिक्र हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुहाग ए. शुक्ला ने अपनी एक्स पोस्ट में किया। सुहाग शुक्ला ने शरिया कानून और यूसीसी को लेकर एक ब्रिटिश अखबार के दो आर्टिकल्स पर उनके अलग-अलग रुख का जिक्र किया। इसी पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने ब्रिटिश अखबार को जमकर सुना दिया। उन्होंने कहा कि 'भारत में शरिया कानून चाहिए और अपने देश में बुरा लग रहा।'
क्या है पूरा मामला
पूरा मामला ब्रिटिश अखबार The Economist से जुड़ा है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुहाग ए. शुक्ला ने अपने एक्स पोस्ट में इस अखबार के दो आर्टिकल शेयर किए। एक आर्टिकल साल 2016 का है, दूसरा आर्टिकल साल 2026 का है।
ब्रिटिश अखबार के दोहरे रवैये पर सवाल
सुहाग ए. शुक्ला ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत के लिए @TheEconomist का मानना है कि यहां किसी भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के साथ-साथ शरिया कानून भी लागू किया जाना चाहिए। वहीं यूके के लिए, @TheEconomist का कहना है कि ब्रिटिश यूनिफॉर्म सिविल कोड के साथ शरिया कानून लागू करने से दिक्कतें पैदा होती हैं।' सुहाग शुक्ला ने ब्रिटिश अखबार पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'नियम दूसरों के लिए है, लेकिन खुद के लिए नहीं?'
रिटा. ले. जनरल डीपी पांडेय ने किया रिएक्ट
सुहाग ए. शुक्ला की पोस्ट पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने रिएक्ट किया। उन्होंने एक्स पोस्ट में ब्रिटिश अखबार को करारा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश अखबार का ये दोहरा रवैया है। वो अपने लिए वही चीज अच्छा नहीं मानता और भारत के लिए वो ठीक है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने @TheEconomist के लिए एक्स पोस्ट में लिखा, 'यह खुद के लिए तो अच्छा नहीं है, लेकिन भारत के लिए अच्छा है। चाहे मानवाधिकार हो, अभिव्यक्ति की आजादी हो, पारंपरिक मीडिया का इस्तेमाल हो, या फिर व्यापार की रुकावटें या किसानों को प्रोत्साहन देना।'
पूर्व सैन्य अफसर ने आगे कहा, 'पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाली संस्थाओं या सरकारों के नियम हमेशा दोहरे रहे हैं। यह सब उस मीडिया की ताकत से होता है जो टेक्नोलॉजी, या फिर पेमेंट और लालच के जरिए नियंत्रित किया जाता है। लेकिन दुनिया कभी भी उपनिवेशों और गुलामों के प्रति निष्पक्ष नहीं रही।'
लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।
पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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