उदयपुर झीलों में नावों के दायरे को बढ़ाने का विरोध, विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर के उल्लंघन का आरोप लगाया
उदयपुर की झीलों में नावों के दायरे को बढ़ाने के नए ड्राफ्ट का विशेषज्ञों ने विरोध किया है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की नजीर के उल्लंघन का आरोप लगाया और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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सुप्रीम कोर्ट की नजीर के उल्लंघन का आरोप:झीलों में नावों का दायरा बढ़ाने का विरोध, नए ड्राफ्ट पर कानूनी आपत्ति
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नगर निगम से जारी उदयपुर लेक (बोटिंग, जेटी एंड लेक रिसोर्स मैनेजमेंट) रेगुलेशन-2026 के नए ड्राफ्ट ने प्रशासनिक, कानूनी और पर्यावरणीय गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। देश का पहला रामसर वेटलैंड सिटी बनने की दौड़ में शामिल उदयपुर की झीलों के संरक्षण के बज
विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुभाष पांडे बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में तय नजीर के तहत रामसर साइट्स और पेयजल स्रोतों में क्रूज या अनियंत्रित मोटर बोट संचालन पूरी तरह असंवैधानिक है। बिना किसी हाइड्रोलॉजिस्ट या लिम्नोलॉजिस्ट की वैज्ञानिक रिपोर्ट के, केवल काल्पनिक कैरीइंग कैपेसिटी के आधार पर नई जेटियां और नावें बढ़ाना राजस्थान लेक डवलपमेंट एक्ट-2015 की मूल भावना का उल्लंघन है।
विशेषज्ञ बोले- सड़क मार्ग वाले होटलों की जेटी पर लगे रोक
पुराने मसौदे को दबाकर थोपी जा रही व्यापारिक नीति: डॉ. मेहता पर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता ने निगम आयुक्त को भेजे प्रतिवेदन में पुराने मसौदों को दरकिनार कर झीलों में बोट संचालन बढ़ाने पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 2022 के सिटीजन-एक्सपर्ट ड्राफ्ट में पिछोला के लिए 8 बोट (+1 रेस्क्यू) और फतहसागर के लिए 5 बोट (+1 रेस्क्यू) की सिफारिश थी। उनका कहना है कि डीजल बोटों से कार्बन उत्सर्जन और कंपन बढ़ता है, जिससे ऐतिहासिक घाटों, जलीय जीवों और लोगों पर असर पड़ता है। उन्होंने स्वतंत्र इकोलॉजिकल अध्ययन होने तक बोट संचालन के विस्तार पर रोक लगाने और डीजल बोट हटाने की मांग की।
नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन है ये ड्राफ्ट: एडवोकेट भाग्यश्री एडवोकेट भाग्यश्री पंचोली ने ड्राफ्ट को शीर्ष अदालतों के आदेशों की अवहेलना बताते हुए कहा कि पेयजल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ाना नागरिकों के स्वच्छ जल के मौलिक अधिकार का हनन है। उन्होंने 4-सूत्रीय लेक सेव मॉडल सुझाया। इसके तहत झीलों में केवल चप्पू व शिकारा जैसी गैर-मोटर चालित नावें सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चलें और रात में पूरी तरह रोक रहे। सड़क से सीधे जुड़े होटलों के लिए बोटिंग व निजी जेटी प्रतिबंधित हों। पूरी झील में एक सार्वजनिक जेटी हो। लेक प्रबंधन समिति में 50% स्थानीय नागरिकों व स्वतंत्र विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व और हर निर्णय जन-सुनवाई से हो।
न वैज्ञानिक अध्ययन, न जन-भागीदारी: ड्राफ्ट पर ये गंभीर सवाल
- क्या यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के सुभाष पांडे केस और रामसर कन्वेंशन के वैश्विक नियमों का सीधा उल्लंघन नहीं है?
- प्रशासनिक अधिकारी 2021 से अब तक केवल कागजी ड्राफ्ट ही क्यों बना रहे हैं, धरातल पर नीति लागू करने में असफल क्यों रहे?
- बिना किसी लिम्नोलॉजिस्ट या हाइड्रोलॉजिस्ट की स्टडी के झीलों का वर्गीकरण किस आधार पर किया?
- बिना किसी ठोस शोध के बोट्स व नई जेटियां बढ़ाने का प्रस्ताव किस वैज्ञानिक वजूद पर टिका है?
- 19 सितंबर 2022 को जन-सुनवाई के बाद बने ‘सिटिजन एंड एक्सपर्ट ड्राफ्ट’ को बिना खारिज किए क्यों दबाया गया?
- 11 फरवरी 2023 के जिला कलेक्टर के प्रशासनिक ड्राफ्ट को किस सक्षम प्राधिकारी ने और किस आधार पर निरस्त किया?
- सड़क मार्ग से जुड़े होटलों के लिए बोटिंग वर्जित करने के बजाय निजी जेटी का लाइसेंस देकर किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है?
- पेयजल के मुख्य स्रोत में मोटर बोट्स बढ़ाकर शहरवासियों के स्वच्छ जल से खिलवाड़ क्यों?
- वन विभाग की उस रिपोर्ट को क्यों अनदेखा किया, जिसमें मानवीय दखल से वेटलैंड्स खत्म होने की चेतावनी दी गई है?
- नीति निर्माण प्रक्रिया में 50% नागरिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल क्यों नहीं किया गया?
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