होमवकीलसुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया
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सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट में तृणमूल कांग्रेस के होर्डिंग हटाने को चुनौती देती याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई नहीं की और सभी दलीलों को कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष रखने को कहा। पार्टी का कहना है कि नगरपालिका ने बिना नोटिस के बोर्ड हटा दिया था, पर हाईकोर्ट ने पहले ही अंतरिम राहत नहीं दी क्योंकि बोर्ड पहले ही हट चुका था। कोर्ट ने हाईकोर्ट से शीघ्रता से इस मामले का निपटारा करने का आदेश दिया।

8 सितंबर 2026 को 08:32 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी होर्डिंग विवाद में हाईकोर्ट को फैसला देने का निर्देश, सुनवाई से मना किया

सौजन्य से:- Navbharat Times

Supreme Court News: पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार जाने के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी परेशान है। ताजा मामला कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी ऑफिस से होर्डिंग बोर्ड हटाने से जुड़ा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी ऑफिस से होर्डिंग बोर्ड हटाने को चुनौती दी गई थी। शीर्ष कोर्ट ने पार्टी से कहा कि वह अपनी सभी दलीलें कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने रखे, जो पहले से ही इस मामले को देख रहा है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने तृणमूल की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को सभी पक्षों की दलीलों पर शीघ्रता से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने क्या कहा

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट से कहा कि वह इस विवाद से जुड़े सभी मुद्दों पर जल्द फैसला करे। तृणमूल की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने बिना किसी नोटिस के पार्टी का नेम-बोर्ड हटा दिया था। उन्होंने नेम बोर्ड को वापस लगाने की मांग करते हुए कहा कि पार्टी उस जगह से कानूनी तौर पर काम कर रही थी। सिब्बल ने बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था क्योंकि बोर्ड पहले ही हटाया जा चुका था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोर्ड हटाने से ही विवाद खत्म नहीं हो जाता।

कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय की ओर से अंतरिम राहत देने से इनकार करने के खिलाफ दायर की गई थी। तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत से तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय वाले परिसर से पार्टी का होर्डिंग/साइनबोर्ड हटाए जाने से संबंधित मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। हालांकि, पीठ ने सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष रखने की स्वतंत्रता प्रदान की और तृणमूल की याचिका का निपटारा कर दिया।

टीएमसी से जुड़ा विवाद जान लीजिए

यह विवाद कोलकाता नगर निगम की ओर से पुलिस की मदद से दक्षिण कोलकाता के 9, कैमैक स्ट्रीट स्थित भवन से तृणमूल कांग्रेस का कथित रूप से अनधिकृत साइनबोर्ड/होर्डिंग हटाए जाने से संबंधित है। इससे पहले, 28 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित अनधिकृत साइनबोर्ड/होर्डिंग को हटाए जाने को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया था। हाईकोर्ट के जस्टिस राजा बसु चौधरी ने कहा था कि दक्षिण कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट परिसर से साइनबोर्ड/होर्डिंग पहले ही केएमसी द्वारा हटाया जा चुका है, ऐसे में फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतरिम संरक्षण देने की गुंजाइश नहीं है।

लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।

विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।

पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें

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