सुप्रीम कोर्ट में आग से सुरक्षा को लेकर सख्ती
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल करने के बाद केंद्र सरकार से देशभर में अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए अग्नि एवं जीवन सुरक्षा की नीति बनाने और उनकी सुरक्षा की जांच को लेकर आदेश जारी करने की मांग हो रही है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
सुप्रीम कोर्ट में आग से सुरक्षा को लेकर याचिका दाखिल
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें केंद्र सरकार से देशभर में अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए अग्नि एवं जीवन सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने की मांग की गई है। याचिका में विशेष अग्नि और जीवन सुरक्षा ऑडिट कराने और आग की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने का अनुरोध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को एक जनहित याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को देशभर में अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए राष्ट्रीय अग्नि एवं जीवन सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी की ओर से दाखिल याचिका में स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों, होटलों, अतिथि गृह, बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, मॉल, तथा अधिक भीड़भाड़ वाले अन्य व्यावसायिक परिसरों पर इस रूपरेखा को लागू करने का आग्रह किया है। याचिका में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह आदेश भी देने की मांग की गई है कि वे तीन से चार माह में अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों का विशेष अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ऑडिट कराएं।
अधिवक्ता गोस्वामी ने अपनी याचिका में दिल्ली और लखनऊ सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई भीषण अग्निकांड की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति की मुख्य वजह अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए एक समान और प्रभावी राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा रूपरेखा का अभाव है। याचिका में कहा गया कि न्यायिक और प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद बार-बार ऐसी घटनाएं होना इस बात को जाहिर करता है कि केवल प्राथमिकियां दर्ज करना और घटना के बाद जांच समितियां गठित करना संवैधानिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं है।
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