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हाईकोर्ट ने रेलवे डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर पर लगाई नसों की फड़की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को तथ्यों के विरुद्ध कानूनी व्याख्या से भरे निर्देश भेजने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उनसे न्यायिक दृष्टांतों से भरी लिखित रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है, जिसमें उन्हें ऐसा स्पष्ट करना होगा कि क्यों उन्होंने तथ्यों के बजाय कानूनी सलाह जैसे टिप्पणियां कीं

27 जून 2026 को 09:23 am बजे
हाईकोर्ट ने रेलवे डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर पर लगाई नसों की फड़की

सौजन्य से:- Amar Ujala

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High Court : पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को हाईकोर्ट ने किया तलब

Sat, 27 Jun 2026 02:27 PM IST

विनोद सिंह

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

Published by: विनोद सिंह

Updated Sat, 27 Jun 2026 02:27 PM IST

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (निर्माण) को तथ्यों के बजाय कानूनी व्याख्या और न्यायिक दृष्टांतों से भरे लिखित निर्देश भेजने पर कड़ी नाराजगी जताई है।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (निर्माण) को तथ्यों के बजाय कानूनी व्याख्या और न्यायिक दृष्टांतों से भरे लिखित निर्देश भेजने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने 29 जून 2026 को दोपहर बाद दो बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि उन्होंने तथ्यात्मक जानकारी देने के बजाय कानूनी सलाह जैसी टिप्पणियां क्यों भेजीं।

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यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने एसटीएस इंफ्राटेक लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर दिया है। रेलवे की ओर से पेश अधिवक्ता ने डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की ओर से भेजे गए लिखित निर्देश अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्य बताने के बजाय यह समझाने का प्रयास किया गया है कि विवाद को मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के लिए क्यों नहीं भेजा जा सकता। व्यावसायिक अनुबंधों से जुड़े मामलों में रिट याचिका क्यों सुनवाई योग्य नहीं है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णय क्या कहते हैं।

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कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को किसी वकील की आवश्यकता ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उनके निर्देश में तथ्यात्मक जानकारी कम और कानूनी सलाह अधिक हैं। जबकि उनसे केवल मामले से संबंधित तथ्य उपलब्ध कराने की अपेक्षा थी।

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