बालश्रम की धज्जियां: मगहर में नाबालिग बच्चे ईंट साफी कर रहे हैं
मगहर में संत कबीर कताई मिल में बालश्रम के मामले सामने आए हैं। नाबालिग बच्चे ईंट साफी कर रहे हैं और उन्हें 600 रुपये के लिए 2000 ईंट साफ करने का काम दिया जा रहा है।

सौजन्य से:- Hindustan
कताई मिल में उड़ रही बालश्रम कानून की धज्जियां
मगहर में संत कबीर कताई मिल में बाल श्रम कानून का उल्लंघन हो रहा है। नाबालिग बच्चे ईंट की सफाई करते हुए पाए गए हैं, जिन्हें केवल 600 रुपये के लिए 2000 ईंटें साफ करने का काम दिया जा रहा है। सरकार बाल श्रम रोकने के लिए योजनाएं चला रही है, लेकिन यहां कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मगहर, हिन्दुस्तान संवाद। संत कबीर कताई मिल मगहर में बाल बाल श्रम कानून की धज्जियां उड़ रहीं है। यहां बेखौफ काम कर नाबालिग बच्चे ईंट की सफाई कर रहे हैं। जिसके बदले उन्हें नाम मात्र का मेंहनताना मिल रहा है। ये नाबालिग जिनको हाथों में कापी किताब होनी चाहिए थी, वे बाहर से आकर हथौड़े चलाने को मजबूर हैं।जनपद के मगहर में पांच दशक पूर्व हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए संतकबीर के कर्मयोग से जुड़ी कताई मिल की स्थापना की गई थी। जो स्थापना के बाद दो दशक तक शानदार तरीके से चली और इसमें हजारों कामगारों को रोजगार मिला।
यह मिल 1997 में मजदूर व मिल प्रबंधन के बीच विवाद हो गया और ताला लग गया। जिसके बाद से मिल चालू नहीं हो सकी। प्रदेश की बंद पड़ी मिलों की कीमती जमीनों पर सरकार ने टेक्सटाईल पार्क बनाने का निर्णय लिया। जिसके क्रम में मिल की सफाई का कार्य चल रहा है। इसके मद्देनजर मिल के गोदामों व भवनों को तोड़ने का कार्य चल रहा है। जिसमें बाल मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। मिल में ईंट सफाई कर रहे बाल मजदूरों ने बताया कि लखीमपुर खीरी से लगभग पचास की संख्या मजदूरी के लिए आए हैं। जिन्हें दो हजार ईंट साफ करने पर मजदूरी के रूप में छह सौ रुपये मिल रहे हैं। अब सवाल यह उठता है इस उम्र नाबालिग बच्चों के हाथों में कलम व कागज होने चाहिए थे वह अपने घर से कोसों दूर ईंट साफ करने को मजबूर हैं। जबकि इनके लिए सरकार तमाम प्रकार की योजनाएं चला कर उन्हें जागरूक कर रही है। बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चला रही है। इसके बाद भी बालश्रम पर रोक नहीं लग पा रही है और इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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