पक्षकारों के बीच समझौता कराना लोक अदालत का मूल कर्तव्य
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पक्षकारों के बीच समझौता कराना स्थायी लोक अदालत का पहला फर्ज है। इस टिप्पणी के साथ बुलंदशहर की स्थायी लोक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया है। साथ ही मामले पर सुलह समझौता प्रक्रिया का पालन करने के बाद नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया गया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
हाईकोर्ट ने कहा : पक्षकारों के बीच समझौता करना लोक अदालत का पहला फर्ज, बुलंदशहर लोक अदालत का फैसला रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के बीच समझौता कराना स्थायी लोक अदालत का पहला फर्ज है। सुलह के प्रयास विफल होने के बाद ही वह मामले के गुण-दोष पर फैसला कर सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के बीच समझौता कराना स्थायी लोक अदालत का पहला फर्ज है। सुलह के प्रयास विफल होने के बाद ही वह मामले के गुण-दोष पर फैसला कर सकती है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बुलंदशहर की स्थायी लोक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। साथ ही मामले पर सुलह समझौता प्रक्रिया का पालन करने के बाद नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है। बुलंदशहर निवासी स्मृति रविता व तीन अन्य की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत सुलह प्रक्रिया अपनाना स्थायी लोक अदालत के लिए अनिवार्य है। सुलह के वास्तविक प्रयास किए बिना सीधे विवाद के गुण-दोष पर निर्णय नहीं दिया जा सकता।
याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि स्थायी लोक अदालत ने पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौते के लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं किया। फैसले में केवल सुलह के लिए तारीख निर्धारित किए जाने का उल्लेख है। यह नहीं बताया गया कि उस दिन समझौते के लिए क्या प्रयास किए गए और वे क्यों विफल रहे। राज्य की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता भी इसका खंडन नहीं कर सके। कोर्ट ने कहा कि फैसलों में सुलह के प्रयासों का विवरण नहीं होना इस बात का संकेत है कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। लिहाजा, कोर्ट ने लोक अदालत का फैसला रद्द कर मामला बुलंदशहर के स्थायी लोक अदालत को वापस भेज दिया।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
न्यायमूर्ति पी.वी. कानून में संजय कुमार का करियर और महत्वपूर्ण फैसले

क्या BCI कानूनी छात्रों को वकालत की जिंदगी से वंचित कर सकती है?

राजस्थान हाई कोर्ट की इमारत में सुरक्षा का संकट, क्या न्यायपालिका अपने घर को सुरक्षित रख सकती है?

न्यायिक निश्चितता का संकट: भारत में न्यायपालिका के उलटफेर की आवृत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने BCI के आदेश की आलोचना की, कहा कोई लेना-देना नहीं

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वीर सावरकर मामले में केस रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR बैच के खिलाफ BCI की कार्यवाही को अनावश्यक बताया

राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर मानहानि केस रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी
ताज़ा ख़बरें
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानों के बंद होने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
- ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की रिमांड वापस लेने पर विचार किया
- सुप्रीम कोर्ट ने BCI पर नालसर विरोध के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की
- सुप्रीम कोर्ट ने मांगों की बाढ़ की फिक्र कर कार्यकर्ता रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी से रोका
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: करूर भगदड़ पीड़ित परिवारों को नौकरी देने पर रोक नहीं
- न्यायपालिका ने स्नातकों को नामांकन दिए बिना नाराज होकर बार की कार्रवाई की निंदा की: सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट में बीसीआई में सुधार की मांग की गई अधिशिक्षा के अनिश्चित कार्यकाल को चुनौती
- सुप्रीम कोर्ट ने कुकी मैतेई समूहों से कहा, शांति बहाल करने के लिए सोचें

