इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानों के बंद होने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सावन माह में कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानों की बंदी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिका जनहित के बजाय प्रचार पाने के लक्ष्य से दायर की गई प्रतीत होती है। इसके बाद कांवड़ यात्रा के मार्ग पर चिकन-मटन की दुकानें भी बंद हो गई हैं।

सौजन्य से:- Jagran
Allahabad High Court : कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानें बंद करने संबंधी नोटिस के खिलाफ याचिका खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन दुकानें बंद करने के नोटिस के खिलाफ याचिका खारिज की है। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका जनहित के बजाय प ...और पढ़ें
HighLights
- इलाहाबाद हाई कोर्ट में जारी इस नोटिस को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी
- कोर्ट ने कहा- याची अधिवक्ता ने याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं, पब्लिसिटी इंटरेस्ट में दायर की है
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सावन माह में कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन-मटन की दुकानें बंद करने के संबंध में जारी नोटिस को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने टिप्पणी किया कि याची अधिवक्ता है और उसने यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं बल्कि पब्लिसिटी इंटरेस्ट में दायर की है।
अमरोहा के वकील नासिर फारूक ने याचिका दायर की थी
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। अमरोहा निवासी अधिवक्ता नासिर फारूक ने याचिका दायर की थी। इसमें बिना तारीख वाले उस नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सावन माह में चिकन-मटन की दुकानें बंद करने के निर्देश दिए गए थे। राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया।
याची के वकील का तर्क- लोगों की आजीविका प्रभावित
याची के अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने कहा कि अमरोहा में कांवड़ मार्ग से हटकर स्थित चिकन की दुकानों को भी पुलिस ने अनडेटेड नोटिस देकर बंद करा दिया है। इससे सैकड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। याचिका में नोटिस को रद करने की मांग थी।
याचिका प्रचार पाने के लिए दायर की गई प्रतीत होती है
याची का कहना था कि नोटिस में केवल चार सोमवार का जिक्र है, लेकिन पूरे सावन माह में दुकानें नहीं खुलने दी जा रही हैं। आरोप लगाया गया कि कांवड़ मार्ग के अलावा गलियों और कांवड़ मार्ग से दूर स्थित दुकानों को भी बंद कराया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि याचिका जनहित के बजाय प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई प्रतीत होती है।
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