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जनसत्ता प्रश्नकाल: हनक से चलती है कानून व्यवस्था, मक्खन सी मुलायम बनकर नहीं - Jansatta

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का कहना है कि कानून व्यवस्था हनक से चलती है। कानून के डर से ही अपराधियों पर काबू पाया जा सकता है। सिंह का कहना है कि अपराधी जेल जाने से नहीं अपनी अ…

7 जून 2026 को 06:01 am बजे
जनसत्ता प्रश्नकाल: हनक से चलती है कानून व्यवस्था, मक्खन सी मुलायम बनकर नहीं - Jansatta

सौजन्य से:- Jansatta

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का कहना है कि कानून व्यवस्था हनक से चलती है। कानून के डर से ही अपराधियों पर काबू पाया जा सकता है। सिंह का कहना है कि अपराधी जेल जाने से नहीं अपनी अवैध संपत्तियों के ध्वस्त होने से डरता है, जिसमें बुलडोजर की अहम भूमिका है। बुलडोजर सिर्फ अवैध निर्माण पर चलते हैं। अरुण सिंह का दावा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया युद्ध जैसी आपदा में भी अवसर तलाश लेगी और जल्द ही महंगाई काबू में आ जाएगी। उनका दावा है कि अपनी संगठनात्मक मजबूती से भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। अरुण सिंह से कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज की बातचीत के अंश।

आप भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक स्तर में उच्च पद पर हैं। अब पूरे देश की नजरें पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनाव पर जाकर टिक गई हैं। आपके मुताबिक दोनों राज्यों में भाजपा की कैसी स्थिति है?

अरुण सिंह: मैं पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता हूं और पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी है, उसका पूरी तरह से निर्वहन करने की कोशिश करता हूं। उत्तर प्रदेश मेरा गृह राज्य है। यहां का राजनीतिक वातावरण बता रहा है कि आगामी चुनाव में भाजपा को पहले से ज्यादा सीटें आएंगी। तीसरी बार प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनेगी। किसी भी प्रदेश के लिए सबसे अहम वहां की कानून-व्यवस्था होती है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत है और वहां विकास के सभी काम हुए हैं। पंजाब में हम संगठनात्मक स्तर पर थोड़े कमजोर रहे हैं, लेकिन अब वहां बहुत से लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

आरोप तो ये लग रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। हत्याओं के कई मामले हैं तो मुठभेड़ को लेकर भी वहां का कानून प्रशासन सवालों के घेरे में रहता है।

अरुण सिंह: ’मैं पूछता हूं कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति क्या थी? दंगों का प्रदेश था। आगरा, पिलखुआ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर दंगे की चपेट में आए। उत्तर प्रदेश दंगों का प्रदेश हो गया था। अब क्या एक भी दंगा होता है? इसी तरह मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कैराना में लोग दंगों के कारण पलायन करते थे। आज उत्तर प्रदेश से क्या कोई हिंदू अपनी मां-बहन-बेटियों को लेकर पलायन कर रहा है? शून्य फीसद पलायन है। समाजवादी पार्टी की सरकार में डाक्टरों, व्यापारियों का अपहरण होता था। आज बता दीजिए कि किसका अपहरण हो रहा है? किससे रंगदारी मांगी जा रही है? आज कोई ऐसा करने की सोचता भी है तो उससे पहले योगी जी प्रहार कर देते हैं। अब अपराधी डरते हैं। बाकी आपस की पारस्परिक लड़ाई में अपराध होते हैं। सवाल है कि अपराध पर कैसी कार्रवाई होती है? अगर कड़ी कार्रवाई होगी तो दूसरी घटना नहीं घटेगी। उत्तर प्रदेश में कोई इक्का-दुक्का जघन्य अपराध होता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई होती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की अखिल भारतीय पहचान बन गई है। ऐसे में जब वे अस्सी बनाम बीस फीसद वाला हिंदू-मुसलमान का विमर्श छेड़ते हैं तो क्या आपको नहीं लगता है कि एक खास तबका खुद को असुरक्षित महसूस करता है?

अरुण सिंह: उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर, बरेली या मुसलिम बहुसंख्यक आबादी वाली जगहों पर जाकर सर्वेक्षण कर लीजिए। प्रधानमंत्री आवास योजना मुसलिमों को मिल रही है या नहीं? अनाज से लेकर रसोई गैस तक की सभी योजनाएं सबको मिल रही हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ सभी समुदायों को मिल रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि कहीं भी अस्सी बनाम बीस की बात नहीं है। मुसलिम समुदाय को पूरी सुविधा मिल रही है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास की भावना के आधार पर ही हम चल रहे हैं। योगी जी का कहना है कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है। आप भारत के नागरिक हैं, उत्तर प्रदेश में सबके साथ आनंद से रहिए। कोई भी किसी प्रकार का गुंडागर्दी करेगा तो उसे नहीं छोड़ा जाएगा। फिर चाहे कोई भी हो।

मुठभेड़ों पर तो सवाल हैं।

अरुण सिंह: गुंडागर्दी जो भी करते दिखता है, उसका इलाज करते हैं। दंगे आम मुसलमान नहीं करवाते हैं। दंगे नेता करवाते हैं। किसी भी जगह की कानून व्यवस्था हनक से चलती है। अगर कोई मक्खन की तरह मुलायम होकर काम करेगा तो कानून व्यवस्था कभी भी दुरुस्त नहीं होगी। कानून व्यवस्था शक्ति, दृढ़ता, कठोर मन के साथ संकल्प करके लाई जाती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने जरूरत पड़ने पर हिंसा को उचित बताया है।

अरुण सिंह: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठोरता जरूरी है। हिंसा करने वालों का इलाज भी तो उसी तरह किया जाएगा।

आज पूरे देश में उत्तर प्रदेश के बुलडोजर न्याय की चर्चा है। भाजपा शासित सभी जगहों पर बुलडोजर को इंसाफ का प्रतीक बना दिया गया है। क्या आप इसे न्यायोचित मानते हैं? अदालत के पहले ही प्रशासन के द्वारा कथित न्याय देने पर कई तरह के सवाल हैं।

अरुण सिंह: न्यायपालिका का हम सम्मान करते हैं। कोई भी अपराधी, अपराध करने के बाद जेल जाने से नहीं डरता है। उसे यही लगता है कि जेल जाऊंगा, छूट कर आऊंगा और फिर गुंडागर्दी करूंगा। वह डरता किससे है? डरता इससे है कि जो उसने अपराध से पैसे कमाए हैं, मकान व ऊंची इमारतें बनाई हैं, वे कहीं ध्वस्त न कर दिए जाएं। अपराधियों को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाएंगे तो वे गुंडागर्दी नहीं करेंगे। गुंडे जेल जाने की कहां परवाह करते हैं? इसलिए उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर से कठोर कार्रवाई की जाती है। बुलडोजर से वही चीज ढहाई जाती है जो गैरकानूनी है। समाजवादी सरकार में आजम खान के किए-धरे को याद कीजिए। आजम खान एसपी को कहते थे कि अगर एक भी मुसलिम पर कार्रवाई करोगे तो तुम्हारा ‘बैज’ निकाल दूंगा, वर्दी उतार दूंगा। समाजवादी पार्टी की सरकार के समय तो आप अपराधियों पर कोई कार्रवाई कर ही नहीं सकते थे। आजम खान, अतीक अहमद, अंसारी…ये सब राजा थे आतंक के।

बात है विमर्श गढ़ने की। जब सभी नागरिकों को जनकल्याणकारी योजनाओं की सुविधा देनी ही है तो बार-बार मुसलमानों को भी मिलता है बोल कर निशानदेही करने की क्या जरूरत है? पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्हें मुसलमानों का वोट नहीं मिला। एक खास समुदाय की सुविधाओं से लेकर वोट तक को बार-बार विमर्श में लाकर क्या राजनीतिक विभेद की खाई नहीं पैदा की जा रही है?

अरुण सिंह: हम सभी नागरिकों की समानता में विश्वास रखते हैं। हर राजनीतिक दल अपने कोर वोट बैंक को इकट्ठा रखता है। लेकिन कोर वोट बैंक से जुड़ी इतनी नैतिकता रखो कि तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करो। हम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करते हैं। जो हमारे साथ नहीं हैं, उन्हें सताते नहीं हैं। हम हिंदू-मुसलिम-सिख-ईसाई सबको साथ लेकर चलते हैं।

जब सत्ता को संविधान से ही चलना है तो राजनीति में धर्म का मिश्रण करना क्या उचित है?

अरुण सिंह: हमारी तरफ से राजनीति और धर्म को बिल्कुल नहीं मिलाया गया है। दोनों अलग-अलग हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृृत्व में जब पहली बार सरकार बनी तभी से राजनीति में नया बदलाव आया। वह बदलाव है विकास की राजनीति। विकासयुक्त राजनीति करनी है। मैं भी कई राज्यों में चुनाव प्रभारी रहा हूं। भाजपा विकास के एजंडे को ही आगे रख कर चलती है। कानून व प्रशासन की बात भी विकास की राजनीति में अंतर्निहित है। हम धर्म की राजनीति नहीं करते हैं।

पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात ने भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। विपक्ष के नेता से लेकर कई अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा संकट आने वाला है। इन चुनौतियों के बीच आपको चुनाव में उतरना है। आर्थिक संकट से कैसे निपटेगी सरकार?

अरुण सिंह: हमने 2014 के पहले के भारत का भी हाल देखा है। तब भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत नाजुक दौर में थी। 2014 में जब मोदी जी की सरकार बनी तो हर आपदा के समय एक अवसर तलाशने की कोशिश होती रही जो सफल भी रही। मोदी जी के नेतृत्व में यह हमारी नीति है। उदाहरण के रूप में जब कोरोना का संकट आया तो ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा गई, क्योंकि उन्होंने खर्च रोकने वाला आर्थिक माडल चुना। इससे अर्थव्यवस्था संकुचित हो गई और विकास दर गिर गई। लेकिन भारत में हमारी नीति रही कि अर्थव्यवस्था में प्रवाह बना रहना चाहिए। यानी अधिक से अधिक खर्च करो। सरकार खर्च करे। उसके बाद लगातार चार साल से विश्व की सबसे तेज गति से चलनेवाली अर्थव्यवस्था भारत की है। हम विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गए। महंगाई दर पर नियंत्रण रहा। कोविड के समय जो हमने आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश की थी, वही अब हो रही है। पहले तो रूस और यूक्रेन युद्ध का संकट आया था। अब पश्चिम एशिया के युद्ध के संकट से हम जूझ रहे हैं। हमारी सरकार की नीति और जनता के सहयोग से हम ऐसी स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं कि यह आपदा भारत को नए अवसर दिलाएगी। हम अर्थव्यवस्था के विभिन्न संदर्भों में तेज गति से आगे बढ़ेंगे। हमारा देश इस आपदा में भी अपने लिए अवसर निकाल कर सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ जाएगा।

विदेश नीति की बात करें तो भाजपा की अगुआई वाली राजग की सरकार पर चौतरफा दबाव रहा है। खास कर अमेरिका के साथ रणनीतिक चुनौती बढ़ी हुई दिखती है। आरोप लगाया जा रहा है कि अमेरिका भारत से अपने हित साध रहा है। भारत सरकार पर अमेरिकी सत्ता के दबाव में आकर फैसले लेने के आरोप लगते रहे हैं। क्या आपको लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरिका के दबाव में है?

अरुण सिंह: भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी तरह से अमेरिका के दबाव में नहीं है। भारत किसी भी देश के दबाव में नहीं है। भारत अपने आर्थिक हित देखते हुए दूसरे देशों के साथ कारोबारी करार कर रहा है। पिछले दिनों यूके के साथ करार हुआ था। बहुत सारे यूरोपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी हुई है।

अभी देश में महंगाई चरम पर है। बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। रुपए की स्थिति पर सवाल हैं। क्या आपको लगता है कि आने वाले चुनावों में ये मुद्दे भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं?

अरुण सिंह: हमारे यहां के युवा समझदार हैं। जनता वस्तुस्थिति जानती है। पिछले तीन-चार सालों से महंगाई पूरी तरह काबू में थी। अभी पश्चिम एशिया में हुए युद्ध के कारण महंगाई दर थोड़ी सी बढ़ी है जो बहुत जल्द फिर से कम हो जाएगी। आप पिछले तीन साल का रिकार्ड देखिए। सरकार का अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण है। सरकार जल्दी ही अभी की बढ़ी हुई महंगाई पर काबू पा लेगी। जहां तक रोजगार का मुद्दा है तो हमारे देश में बेरोजगारी कम हो रही है। 2014 के पहले यूपीए सरकार आधारभूत संरचनाओं के लिएढाई लाख करोड़ रुपए खर्च करती थी। आज आधारभूत संरचनाओं पर साढ़े बारह लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। सड़कें बन रही हैं, रेलवे की परियोजनाओं पर काम हो रहा है। साढ़े बारह लाख करोड़ की परियोजनाओं में काम करने वाले तो भारत के युवा ही हैं। इतने बड़े हवाईअड्डे, एक्सप्रेसवे, बंदरगाह कौन बना रहा है? नई रेल की पटरियों का निर्माण कौन कर रहा है? रोजगार की दर में इजाफा हुआ है। अगर ईपीएफओ का डाटा देखेंगे तो उसमें भी हमारा आंकड़ा कई गुणा बढ़ चुका है। टुकड़े-टुकड़े गैंग बेरोजगारी का कृत्रिम विमर्श गढ़ कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। नकली विमर्श गढ़ने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ राहुल गांधी जुड़े हुए हैं।

राहुल गांधी से क्या समस्या है?

अरुण सिंह: राहुल गांधी को प्रधानमंत्री से समस्या है, भाजपा से समस्या है और देश के नागरिकों से समस्या है। कई तरह से देखें तो राहुल गांधी खुद एक समस्या हैं।

देश के नागरिकों से राहुल गांधी को क्या समस्या है?

अरुण सिंह: यही समस्या है कि भारत के नागरिक उन्हें वोट नहीं देते हैं। वे विदेश जाकर भारत को गाली देते हैं। लोग इसलिए वोट नहीं दे रहे हैं क्योंकि आप विध्वंस की नकारात्मक राजनीति करते हैं। आप मेहनत नहीं कर रहे हैं और जनता को गाली दे रहे हैं। भारत को गाली देना जनता को गाली देना जैसा ही है। संवैधानिक संस्थानों को गाली देने का मतलब भारत को गाली देना है। यही राहुल गांधी कर रहे हैं। राहुल गांधी के व्यक्तित्व में कोई गंभीरता नहीं है, और कोई उन्हें ये बात समझा भी नहीं सकता है।

आपने कहा कि साढ़े बारह लाख करोड़ की संरचनाओं में देश के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। फिर ये युवा कौन हैं जिन्होंने काकरोच जनता पार्टी बना ली।

अरुण सिंह: एक अरब चालीस करोड़ की जनसंख्या में हमें चालीस से पचास फीसद ही वोट तो मिल रहे हैं। बाकी करोड़ों की संख्या में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस व अन्य विपक्ष के लोग भी तो हैं जो हमें पसंद नहीं करते हैं। ये पांच करोड़, दस करोड़ भी हो सकते हैं। इनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग भी हैं। इनमें विध्वंसात्मक राजनीति करने वाले लोग भी हैं।

काकरोच जनता पार्टी से किसी तरह का डर है भाजपा को?

अरुण सिंह: किसी तरह का कोई डर नहीं है। ऐसा पहले भी होता रहा है। इनका कोई जमीनी आधार नहीं है। इन्हें गंभीरता से तो कतई नहीं लीजिए।

उत्तर प्रदेश के चुनाव की अगुआई कौन करेंगे? नरेंद्र मोदी या आदित्यनाथ योगी?

अरुण सिंह: माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में योगी जी विधानसभा चुनाव का नेतृत्व करेंगे।

उप्र के चुनाव में जाति की क्या भूमिका होगी?

अरुण सिंह: सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखना चाहिए। आज की नई पीढ़ी विकास की राजनीति और अच्छी कानून व्यवस्था पर ध्यान देती है। हर वर्ग को साथ लेना जरूरी है, लेकिन सिर्फ जाति के मुद्दे पर चुनाव नहीं होगा।

एक सवाल पूरे देश के मन में है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं तो वहां भाजपा की वाशिंग मशीन कब से चलनी शुरू होगी?

अरुण सिंह: वाशिंग मशीन कहीं नहीं चलती है।

वहां भी तो दूसरे दल से नेता आएंगे?

अरुण सिंह: उत्तर प्रदेश में हमें नेताओं की कोई कमी नहीं है। यहां हमारा संगठन मजबूत है।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचा था। क्या इस बार भी ऐसा कोई खतरा है?

अरुण सिंह: कोई खतरा नहीं है। पिछली बार हमारे खिलाफ झूठे विमर्श स्थापित करने की साजिश हुई।

आगामी चुनाव में कांग्रेस को कहां रखते हैं?

अरुण सिंह: उत्तर प्रदेश में कहीं है ही नहीं कांग्रेस।

एसआइआर को कैसे देखते हैं?

अरुण सिंह: किसी मरे हुए को या जो देश का नागरिक नहीं है, उसे मताधिकार क्यों मिलना चाहिए?

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इसका मतलब क्या है

भारतीय राजनीति में कानून व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। अरुण सिंह के विचार को देखते हुए यह लगता है कि भाजपा कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 'हनक' का उपयोग करने के लिए तैयार है। इसका मतलब यह है कि वह अपराधियों को डराने और उनके कार्यों को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि भाजपा कानून व्यवस्था को गंभीरता से लेती है और इसके लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भाजपा के दावे को देखते हुए यह लगता है कि वह राज्य में अपनी सरकार को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। यह एक अच्छा सignal है कि भाजपा कानून व्यवस्था में सुधार के लिए काम करने के लिए तैयार है और यह राज्य के लोगों के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

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