सौतेली बेटी से दुर्व्यवहार मामले में जम्मू अदालत का बड़ा फैसला
जम्मू की एक अदालत ने सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी को तीन साल की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी को आईपीसी की धारा 354-ए के तहत दोषी ठहराया, लेकिन पॉक्सो एक्ट से बरी कर दिया क्योंकि पीड़िता की उम्र साबित नहीं हो सकी.

सौजन्य से:- Jagran
सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न मामले में जम्मू की अदालत का फैसला, दोषी को तीन साल की सुनाई सजा
जम्मू की फास्ट ट्रैक अदालत ने सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न के दोषी अशोक अहीरवार को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। ...और पढ़ें
HighLights
- दोषी को सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न पर तीन साल की सजा।
- पॉक्सो एक्ट से बरी, पीड़िता की उम्र साबित न होने के कारण।
- आईपीसी की धारा 354-ए के तहत दोषी ठहराया गया।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू की विशेष फास्ट ट्रैक अदालत (पाक्सो मामलों) ने सौतेली बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के दोषी एक व्यक्ति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
हालांकि, पीड़िता की उम्र कानूनी रूप से साबित नहीं होने के कारण अदालत ने आरोपित को पाक्सो अधिनियम की धाराओं से बरी कर दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मध्य प्रदेश के छत्तरपुर निवासी, वर्तमान में जम्मू की मट्टू कालोनी में रहने वाले अशोक अहीरवार को आईपीसी की धारा 354-ए के तहत दोषी ठहराया।
यह मामला छन्नी हिम्मत थाने में वर्ष 2021 में दर्ज हुआ था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसकी मां के काम पर जाने के दौरान उसका सौतेला पिता उसके साथ यौन उत्पीड़न करता था। उसने कोर्ट को बताया कि आरोपित ने कई बार अश्लील हरकतें कीं और अनुचित शारीरिक व्यवहार किया। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही को विश्वसनीय माना और कहा कि उसके बयान में कोई विरोधाभास नहीं पाया गया।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने केवल आधार कार्ड प्रस्तुत किया, जिसमें जन्मतिथि दर्ज थी। आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, लेकिन आयु निर्धारण का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। स्कूल प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र या आयु निर्धारण के लिए आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण जैसे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपित तीन वर्ष से अधिक समय जेल में रह चुका है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने अशोक अहीरवार को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
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