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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मनमाने दुरुपयोग को किया खुलासा, त्यागी परिवार के खिलाफ मुकदमे को रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट के मनमाने दुरुपयोग के लिए आड़े हाथों लेते हुए त्यागी परिवार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था।

6 जून 2026 को 06:21 pm बजे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मनमाने दुरुपयोग को किया खुलासा, त्यागी परिवार के खिलाफ मुकदमे को रद्द किया

सौजन्य से:- ETV Bharat

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: गाजियाबाद के त्यागी परिवार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा रद्द, IG अजय मिश्र पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने गाजियाबाद के राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे को रद्द कर दिया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : June 6, 2026 at 10:05 PM IST

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के मनमाने और अंधाधुंध दुरुपयोग पर गहरी नाराज़गी जताई है. अदालत ने बार-बार दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस कड़े एक्ट के कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं करने पर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों पर तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने गाजियाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सहित गृह विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी कड़ी आलोचना की है. गाजियाबाद के निवासी राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे की पूरी कार्रवाई को अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह रद्द कर दिया है.

राजेंद्र त्यागी के परिवार को मिली बड़ी राहत: न्यायमुूर्ति विनोद दिवाकर ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा कि आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई पर्याप्त कानूनी आधार उपलब्ध नहीं था. इस विवादित मामले में राजेंद्र त्यागी, उनके पुत्र दीपक त्यागी तथा पुत्रवधू ललिता त्यागी को पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट के तहत अभियुक्त बनाया गया था. स्थानीय पुलिस का आरोप था कि यह पूरा परिवार भूमि एवं प्लॉट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, जालसाजी तथा धमकी देने वाले एक संगठित गिरोह का संचालन कर रहा था. हालांकि, नियमित सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि तैयार किए गए गैंग चार्ट का मुख्य आधार केवल दो पुराने मुकदमे थे.

वित्तीय विवादों को गैंगस्टर एक्ट में घसीटना गलत: अदालत ने पाया कि वे दोनों मुकदमे पूरी तरह से भूमि की खरीद-फरोख्त और आपसी धन संबंधी विवादों से ही जुड़े थे. दोनों मामले मूलतः व्यक्तिगत, वित्तीय और व्यावसायिक लेन-देन से संबंधित थे तथा रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी समाज में किसी संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन कर रहे थे. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी या विश्वासघात जैसे व्यक्तिगत अपराध अपने आप में गैंगस्टर एक्ट लागू करने का विधिक आधार नहीं बनते हैं. इसे तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक यह साबित न हो कि अपराध संगठित

35 वर्षीय गृहिणी की गिरफ्तारी को बताया अवैध: कोर्ट ने अपने निर्णय में विशेष रूप से ललिता त्यागी के मामले का उल्लेख करते हुए पुलिसिया बर्बरता पर दुख जताया. अदालत ने कहा कि 35 वर्षीय साधारण गृहिणी ललिता त्यागी के विरुद्ध आरोपपत्र में कोई भी विशिष्ट या गंभीर आरोप दर्ज नहीं था. इसके बावजूद उन्हें एफआईआर दर्ज होने के ठीक अगले ही दिन गिरफ्तार कर लगभग 80 दिनों तक सलाखों के पीछे जेल में रहना पड़ा. कोर्ट ने टिप्पणी की कि उनकी यह गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया पूरी तरह अवैध, मनमानी और अनावश्यक प्रतीत होती है तथा जांच अधिकारी ने अपनी गिरफ्तारी की शक्ति का घोर अनुचित प्रयोग किया है.

आईजी अजय कुमार मिश्र की भूमिका पर टिप्पणी: अदालत ने तत्कालीन गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर एवं वर्तमान में प्रयागराज रेंज के आईजी (IG) अजय कुमार मिश्र की भूमिका पर भी बेहद गंभीर टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट की यह दोषपूर्ण कार्यवाही उनके ही कार्यकाल के दौरान आधिकारिक रूप से स्वीकृत की गई थी और उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर कोई प्रभावी पर्यवेक्षण नहीं रखा. हालांकि, अदालत ने उक्त वरिष्ठ अधिकारी के भविष्य और करियर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की. लेकिन कोर्ट ने उन्हें भविष्य में अधिक सतर्कता, संतुलित निर्णय और कानून के प्रति पूर्ण निष्ठा बरतने की सख्त चेतावनी दी है.

बड़े अपराधी बाहर और छोटे मामलों में लग रहा एक्ट: हाईकोर्ट ने इस बहाने उत्तर प्रदेश की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस तंत्र तथा गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक सुधारात्मक टिप्पणियां कीं. अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि आज कई मामलों में गैंगस्टर एक्ट का उपयोग वास्तविक संगठित अपराधियों के बजाय छोटे या आपसी विवादित मामलों में धड़ल्ले से किया जा रहा है. इसके विपरीत जो वास्तव में बड़े अपराधी और कुख्यात संगठित गिरोह हैं, वे अक्सर पुलिस और कानून की पकड़ से पूरी तरह बाहर रह जाते हैं. कोर्ट ने गृह विभाग को इस कानून के निष्पक्ष उपयोग के लिए कड़े नियम बनाने की बात कही है.

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