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Himachal: पटवारियों का राज्य काडर बनने के बाद दूसरे जिले में तबादला वैध, जानें हाईकोर्ट के अहम फैसले

Himachal: पटवारियों का राज्य काडर बनने के बाद दूसरे जिले में तबादला वैध, जानें हाईकोर्ट के अहम फैसले अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य काडर घोषित किए जाने के बाद उनका एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करना कानूनी तौर पर गलत न…

Amar Ujala के अनुसार5 जून 2026 को 01:25 am बजे
Himachal: पटवारियों का राज्य काडर बनने के बाद दूसरे जिले में तबादला वैध, जानें हाईकोर्ट के अहम फैसले

सौजन्य से:- Amar Ujala

Himachal: पटवारियों का राज्य काडर बनने के बाद दूसरे जिले में तबादला वैध, जानें हाईकोर्ट के अहम फैसले

अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य काडर घोषित किए जाने के बाद उनका एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करना कानूनी तौर पर गलत नहीं है।

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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पटवारियों के तबादलों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य काडर घोषित किए जाने के बाद उनका एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करना कानूनी तौर पर गलत नहीं है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने मंडी जिले से कुल्लू जिले में किए गए एक पटवारी के तबादला आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पटवारी आखिर पटवारी ही रहता है, चाहे वह मंडी में सेवाएं दे रहा हो या कुल्लू में। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बिना किसी देरी के कुल्लू जिले में तैनाती स्थल पर कार्यभार संभालने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों में पटवारियों की सेवा शर्तें और नियम एक समान रहे हैं। यदि भविष्य में सरकार कोई ऐसा फैसला लेती है जिससे याचिकाकर्ता के हितों को नुकसान पहुंचता है, तो उनके पास अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने या दोबारा कानून का दरवाजा खटखटाने का विकल्प हमेशा खुला रहेगा।

याचिकाकर्ता ने कहा- काडर तो बना दिया, सेवा नियम तय नहीं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 7 फरवरी 2025 को जारी अधिसूचना के जरिये पटवारियों के काडर को जिला से बदलकर राज्य स्तर का तो बना दिया गया है, लेकिन उनके सेवा नियमों और वरिष्ठता से जुड़े सिद्धांतों को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अगर वह कुल्लू में ज्वाइन करते हैं, तो मंडी जिले में दी गई उनकी पिछली सेवाओं और उनके हितों की सुरक्षा होगी या नहीं, इस पर स्थिति साफ नहीं है। इसके अलावा वेतन जारी होने को लेकर भी उन्होंने संशय जताया है।

सरकार ने कहा- सेवा हितों पर असर नहीं पड़ेगा

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने मौजूदा स्थान पर सामान्य कार्यकाल पूरा कर लिया है। चूंकि अब पटवारी का पद राज्य काडर के अधीन आ चुका है, इसलिए यह याचिका विचारणीय ही नहीं है। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाएगा जिससे कर्मचारी के सेवा हितों पर बुरा असर पड़ेगा।

यह है मामला

यह मामला पटवारी हंस राज से जुड़ा है, जो मंडी जिले की सरकाघाट तहसील के पटवार वृत्त हवानी में तैनात थे। 25 मार्च को सरकार ने उनका तबादला कुल्लू जिले की निरमंड तहसील के पटवार वृत्त पोशना में कर दिया था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे रद्द करने की मांग की।

भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

वहीं प्रदेश सरकार ने राज्य के भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को रद्द करने के प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार की ओर से शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर दी गई है। मामले के जल्द सूचीबद्ध होने और सुनवाई शुरू होने की संभावना है। यह मामला प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न विभागों में नियुक्त कर्मियों की सेवा शर्तों से जुड़ा है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को संविधान के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए असांविधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अधिनियम के कुछ प्रावधान कर्मचारियों के अधिकारों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट ने अधिनियम को निरस्त करने के साथ-साथ राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह तीन माह के भीतर पात्र कर्मचारियों को विभिन्न न्यायिक फैसलों और लागू नियमों के अनुरूप अनुबंध सेवा से जुड़े सभी लाभ प्रदान करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता।

सुकेत खड्ड में अधिकारियों की नाक के नीचे पर्यावरणीय लूट : हाईकोर्ट

प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिला की सुकेती खड्ड में हो रहे अवैध खनन और पर्यावरण को पहुंचाए जा रहे नुकसान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों की नाक के नीचे से पर्यावरण की प्लंडरिंग (पर्यावरणीय लूट) की जा रही है। तस्वीरों से पता चलता है कि पुल के ठीक नीचे बिना किसी रोकटोक के अंधाधुंध खुदाई का काम चल रहा था, जिससे बुनियादी ढांचे को भी खतरा हो सकता है।अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के संबंधित अधिकारी को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने नया हलफनामा दायर करने को कहा

हाईकोर्ट के प्रशासन और संबंधित विभागों को अगली सुनवाई पर एक नया हलफनामा दायर करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि क्या यह खुदाई पुल के बेहद नजदीक की जा रही थी और नियमों के तहत ऐसे पुलों के पास कितनी दूरी तक खुदाई या उत्खनन की अनुमति होती है। बीबीएमबी द्वारा सुंदरनगर में काम के आदेश के तहत जो गाद/मलबा निकाला गया है, उसे सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नीलाम किया जाएगा। खनन अधिकारी तिलक राज शर्मा को अगली सुनवाई पर भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव के निरीक्षण से यह साफ है कि जब निरीक्षण हुआ, तब बीबीएमबी का कोई जिम्मेदार वहां मौजूद नहीं था।

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