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हरेन पांड्या मर्डर केस: सरकार को 6 महीने में दोषी की दया याचिका पर फैसला लेना होगा

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दोषी और शार्प शूटर मोहम्मद असगर अली की दया याचिका पर संबंधित निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि उन्हें कानून के अनुसार इस याचिका पर विचार करना होगा और छह महीने के अंदर उचित निर्णय लेना होगा।

25 जून 2026 को 10:25 am बजे
हरेन पांड्या मर्डर केस: सरकार को 6 महीने में दोषी की दया याचिका पर फैसला लेना होगा

सौजन्य से:- ETV Bharat

हरेन पांड्या मर्डर केस: HC ने सरकार को दोषी की दया याचिका पर 6 महीने में फैसला लेने का आदेश दिया

अदालत ने राज्य सरकार को कानून के अनुसार इस याचिका पर विचार करने और छह महीने के भीतर उचित निर्णय लेने का आदेश दिया है.

Published : June 25, 2026 at 2:57 PM IST

अहमदाबाद: गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दोषी और शार्प शूटर मोहम्मद असगर अली की दया याचिका के बारे में अहम निर्देश दिए हैं. असगर अली राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है. कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह कानून के मुताबिक याचिका पर विचार करे और छह महीने के अंदर सही फैसला ले.

याचिकाकर्ता असगर अली की तरफ से पेश हुए वकील हेमंत रावल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जेल में 14 साल से अधिक समय बिताया है और जेल में उसका व्यवहार भी संतोषजनक रहा है. दया याचिका और समय से पहले रिहाई के लिए राज्य सरकार के पास एक अर्जी दाखिल की गई थी, लेकिन लंबे समय से उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया. इसी वजह से हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी पड़ी.

सरकार ने कोर्ट को बताया कि याचिका पर अभी विचार चल रहा है और सलाहकार समिति की राय भी मिल गई है. मामले को जल्द ही संबंधित अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा. गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जांच के दौरान, सीबीआई ने दावा किया कि यह हत्या 2002 की गोधरा घटना के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए की गई थी.

इस मामले में मोहम्मद असगर अली समेत 18 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और पोटा के तहत केस दर्ज किए गए थे. 2007 में, सीबीआई कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई. फिर 2011 में, गुजरात हाई कोर्ट ने मर्डर केस में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. हालांकि, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया, सभी 12 आरोपियों को फिर से दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा काटने के लिए सरेंडर करने का आदेश दिया.

मौजूदा मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से साफ तौर पर कहा है कि माफी से जुड़ी याचिका को अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जा सकता और कानून के मुताबिक छह महीने के अंदर फैसला लेना होगा.

वकील हेमंत रावल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कानून के मुताबिक माफी के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन लंबे समय तक कोई फैसला न होने के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के कानूनी अधिकारों को ध्यान में रखते हुए एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निर्णय ले.

ये भी पढ़ें- तमिलनाडु में खाली 152 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को सरेंडर करने के खिलाफ याचिका पर SC करेगा सुनवाई

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