होमअपराधसुप्रीम कोर्ट ने जंतर‑मंत्र FIR रद्द की, फिर भी स्वातंत्र्य भारद्वाज की गिरफ्तारी पर वकील ने किया सवाल
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर‑मंत्र FIR रद्द की, फिर भी स्वातंत्र्य भारद्वाज की गिरफ्तारी पर वकील ने किया सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वातंत्र्य भारद्वाज की न्यायिक हिरासत को 21 सितंबर तक बढ़ाया, जबकि उनके वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जंतर‑मंत्र से जुड़े सभी FIR रद्द कर दी थीं और फिर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में उन्हें पकड़ने का साहस किया। पुलिस ने कहा कि वह FIR अभी भी मौजूद है और अदालत से स्पष्ट जवाब माँगा गया।

7 सितंबर 2026 को 03:32 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर‑मंत्र FIR रद्द की, फिर भी स्वातंत्र्य भारद्वाज की गिरफ्तारी पर वकील ने किया सवाल

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- National

- Delhi High Court: Swatantra Bhardwaj Arrest Controversy | Jantar Mantar FIR

स्वतंत्र भारद्वाज के वकील बोले- गिरफ्तारी की हिम्मत कैसे की:कहा- सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर से जुड़े मामले रद्द कर दिए, फिर FIR कैसे हुई

- कॉपी लिंक

दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर सुनवाई हुई। भारद्वाज के वकील ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर मामले से जुड़ी सारी FIR रद्द कर दी थीं, तो दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जाकर उसे गिरफ्तार करने की हिम्मत कैसे की।

पुलिस ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि मौजूदा मामले की FIR रद्द नहीं हुई है।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से साफ जवाब मांगा कि संबंधित FIR अभी है या नहीं। कोर्ट ने पुलिस को तुरंत बयान देने या हलफनामा दाखिल करने का विकल्प दिया। इस बीच, कोर्ट ने भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाकर 21 सितंबर तक कर दी।

भारद्वाज को 23 जून को संजय आजाद पर हमले के मामले में तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज सौरभ प्रताप सिंह लालेड़ के सामने पेश किया गया था।

पुलिस ने 4 सितंबर को हिरासत में लिया था

भारद्वाज को 4 सितंबर को बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली लाया गया। 5 सितंबर को कोर्ट ने पुलिस को एक दिन की कस्टोडियल पूछताछ की अनुमति दी। इसके बाद रविवार को उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

यह गिरफ्तारी एक वीडियो पॉडकास्ट के बाद हुए विवाद के बीच हुई। इसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने संजय आजाद की सर फोड़ दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि हमले के चलते IPC की धारा 307 लगाई गई। बाद में भारद्वाज ने दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में ऐसा किया था।

स्वतंत्र भारद्वाज-नीशू आजाद केस: घटनाक्रम

4 सितंबर: नीशू आजाद और उनके पिता के समर्थन में CJP नेताओं और समर्थकों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। नीशू की ओर से वकील ऋषव रंजन ने पुलिस से हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और SC/ST Act की संबंधित धाराएं जोड़ने की मांग की। पुलिस ने ये धाराएं जोड़ीं। स्वतंत्र हिरासत में लिया गया।

5 सितंबर: स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में दिल्ली में हिंदू संगठन ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन दक्ष चौधरी ने बुलाया था। दक्ष हाई प्रोफाइल लोगों से मारपीट करने और थप्पड़ लगाने के लिए जाना जाता है। उसने कन्हैया कुमार को भी थप्पड़ मारा था।

मारपीट मामले में पीड़ित, आरोपी और दिल्ली पुलिस का पक्ष....

1. पीड़ित पक्ष- संजय कुमार/नीशू आजाद

CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार 23 जून को जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। संजय की शिकायत पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में केस दर्ज हुआ। नीशू का आरोप है कि उनके पिता का सिर फोड़ा गया और डेढ़ महीने बाद भी पुलिस ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

2. आरोपी- स्वतंत्र भारद्वाज

स्वतंत्र भारद्वाज ने एक वायरल पॉडकास्ट में दावा किया कि उन्होंने संजय के सिर पर हमला किया था और उन्हें 60 टांके लगे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। बाद में भारद्वाज ने अपने बयान से पलटते हुए कहा कि यह हमला नहीं बल्कि सेल्फ-डिफेंस था। उनका दावा है कि 10-15 लोगों ने उन्हें घेर लिया था और अगर वह बचाव में कार्रवाई नहीं करते तो उन्हें भीड़ मार सकती थी।

3. दिल्ली पुलिस का पक्ष

पुलिस के मुताबिक 23 जून को संजय कुमार के सिर पर कड़ा (ब्रेसलेट) लगने से चोट आई। संजय को RML अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। मेडिको लीगल केस में चोट साधारण बताई गई।

पुलिस ने खोपड़ी फटने/फ्रैक्चर के दावे को गलत बताया। पहले पुलिस ने स्वतंत्र को पूछताछ के लिए बुलाया था फिर छोड़ दिया था। अब CJP के दबाव के बाद दोबारा हिरासत में लिया और केस में नई धाराएं जोड़ीं।

----------------------------------

ये खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द कीं:नई FIR भी दर्ज नहीं होंगी; कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया है। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। पूरी खबर पढ़ें…

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना
अपराध

इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया
अपराध

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया
अपराध

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
अपराध

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है

ताज़ा ख़बरें