पारिवारिक आर्थिक मदद के लिए अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है जिसका मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक मदद देना है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को आवेदन पर कार्रवाई में अपनी ही देरी का फायदा उठाकर किसी योग्य आश्रित के दावे को विफल नहीं करना चाहिए।

सौजन्य से:- हिंदुस्तान
दिल्ली की खबरें: अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति कल्याणकारी उपाय : सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली की खबरें: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक मदद देना है।
दिल्ली की खबरें: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक मदद देना है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि इस योजना का मतलब सही और उचित तरीके से निकाला जाना चाहिए ताकि इसका मकसद पूरा हो सके, न कि विफल हो जाए। पीठ ने कहा कि यह बात अच्छी तरह से तय है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का दावा अधिकार के तौर पर नहीं किया जा सकता, लेकिन साथ ही, यह एक कल्याणकारी उपाय है जिसका मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक मदद देना है।
ये टिप्पणियां एक व्यक्ति की याचिका को मंज़ूरी देते हुए की गईं। उसके पिता की मौत के बाद उसने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की मांग की थी, जिसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि जब उसके दावे पर विचार किया गया, तब तक वह नियमों के तहत तय 35 साल की उम्र सीमा पार कर चुका था।अदालत ने कहा कि अधिकारियों को आवेदन पर कार्रवाई में अपनी ही देरी का फायदा उठाकर किसी योग्य आश्रित के दावे को विफल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। प्रतिवादी-अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपीलकर्ता नंबर 2 (बेटे) की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के दावे पर फिर से विचार करें। यह प्रक्रिया इस फैसले की कॉपी मिलने की तारीख से आठ हफ्ते में पूरी की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि अगर अपीलकर्ता नंबर 2 अन्य सभी तरह से योग्य पाया जाता है, तो उसके बाद चार हफ्ते में नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए।
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