बिहार विश्वविद्यालयों में नए कानून के खिलाफ शिक्षक और कर्मचारी कर रहे हैं विरोध
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के खिलाफ राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के नए कानून में शिक्षकों की नियुक्ति और तबादले में सरकार की भूमिका बढ़ने और कॉलेजों में प्रशासनिक कामकाज में सरकारी तंत्र की भागीदारी बढ़ने की बात कही जा रही है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Bihar University Act: नए विश्वविद्यालय कानून के खिलाफ आज अवकाश पर शिक्षक-कर्मी, सम्राट सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
Bihar State Universities Act 2026: बिहार में 50 साल बाद विश्वविद्यालय कानून बदलने की बात पर आज राज्य के सभी विवि और कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी आज सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। यह लोग इस कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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विस्तार
बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव को लेकर सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार और विश्वविद्यालय-कॉलेजों के शिक्षक एवं कर्मचारियों के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। करीब 50 साल पुराने विश्वविद्यालय कानूनों की जगह राज्य सरकार नया ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ लाने की तैयारी कर रही है। इसी प्रस्ताव के विरोध में आज यानी सोमवार को बिहार के विश्वविद्यालयों और सरकारी डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सामूहिक अवकाश और प्रदर्शन का आह्वान किया है।
संगठन का दावा है कि प्रदेश के 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों से जुड़े 12 हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होंगे। अलग-अलग विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जाएंगी। संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से बताया गया कि नए विश्वविद्यालय कानून के खिलाफ शिक्षक-कर्मचारी संगठनों का आंदोलन पहले से जारी है। पांच से आठ अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से विरोध किया गया था। इस दौरान शिक्षकों ने काला बिल्ला लगाकर सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक भी चार दिनों तक सामूहिक अवकाश पर रहकर आंदोलन कर चुके हैं। शिक्षक संगठनों ने विश्वविद्यालय मुख्यालय से लोकभवन तक पैदल मार्च निकालने की भी घोषणा की थी। हालांकि पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पटना कॉलेज के पास ही रोक दिया था।
क्या है सरकार के प्रस्तावित नए कानून में?
सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार अगर ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ लागू करवाती है तो बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 समाप्त हो जाएंगे। इनकी जगह एक नए कानून के तहत राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को संचालित करने की तैयारी है। नई व्यवस्था में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रशासनिक कामकाज को नए सिरे से व्यवस्थित करने की बात कही गई है। कॉलेजों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की भूमिका बढ़ने की संभावना है।
शिक्षकों की नियुक्ति और तबादले में सरकार की भूमिका बढ़ेगी
नए व्यवस्था के तहत डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदस्थापन जैसे मामलों में सरकार निर्णय लेगी। कॉलेजों के प्रशासनिक संचालन के लिए सरकारी अधिकारियों की तैनाती का भी प्रस्ताव बताया जा रहा है। इससे कॉलेजों के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों में सरकारी तंत्र की भागीदारी बढ़ेगी। अब तक यह सब अधिकार राजभवन के पास है।
481 कॉलेजों के साथ 211 नए कॉलेज भी आएंगे दायरे में
प्रस्तावित कानून का दायरा राज्य के 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों तक रहने की बात है। इसके अलावा 211 प्रखंडों में तैयार किए जा रहे नए डिग्री कॉलेजों की प्रशासनिक व्यवस्था भी नए कानून के तहत तय की जा सकती है। सरकार का जोर कॉलेजों के संचालन और प्रशासन में एकरूपता लाने पर है।
यूजी-पीजी की व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी
नए कानून में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा से जुड़े अधिकारों को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित हैं। राज्यभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था को एक समान करने की दिशा में कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, विश्वविद्यालयों की भूमिका में स्नातकोत्तर शिक्षा और शोध को विशेष महत्व दिए जाने का प्रस्ताव है। कुलाधिपति के तौर पर राज्यपाल की भूमिका और उनके अधिकार नए विधेयक के अंतिम प्रारूप से स्पष्ट होंगे।
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सरकार का तर्क- उच्च शिक्षा में सुधार और छात्रों का पलायन रोकना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नए उच्च शिक्षा कानून की जरूरत बताई है। सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बिहार के छात्रों के दूसरे राज्यों की ओर पलायन को कम करने के लिए नई व्यवस्था जरूरी है। वहीं, शिक्षक-कर्मचारी संगठन प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए कानून के प्रावधानों पर शिक्षकों और कर्मचारियों की चिंताओं को दूर किए बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में नए विश्वविद्यालय कानून को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
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