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अपर मुख्य सचिव गृह ने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का किया प्रयास: इलाहाबाद हाई कोर्ट - allahabad hc slams acs home sanjay prasad for undermining power

अपर मुख्य सचिव गृह ने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का किया प्रयास: इलाहाबाद हाई कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद पर अदालत की शक्ति को कमतर आंकने का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें समय कम है? जानिए…

Jagran के अनुसार4 जून 2026 को 07:12 am बजे
अपर मुख्य सचिव गृह ने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का किया प्रयास: इलाहाबाद हाई कोर्ट
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सौजन्य से:- Jagran

अपर मुख्य सचिव गृह ने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का किया प्रयास: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद पर अदालत की शक्ति को कमतर आंकने का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के खिलाफ गंभीर टिप्पणी की है। कहा कि उन्होंने अदालत की शक्ति को कमतर दिखाने का जानबूझकर सुनियोजित प्रयास किया।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने झांसी निवासी मेघा रैकवार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित करते हुए एसीएस (गृह) की फाइल केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को भेजने का आदेश दिया है।

पीठ ने कहा कि एसीएस गृह ने फरवरी 2026 में बताया था कि ‘सुभाष चंद्र बनाम राज्य’(2025) मामले में हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के माध्यम से चुनौती दी जाएगी, लेकिन अब तक वहां सुनवाई का कोई आदेश, स्टे या रिकार्ड पेश नहीं किया गया।

हाई कोर्ट तक को पता नहीं कि एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट हुई भी अथवा नहीं? एसीएस का यह तर्क कि एसएलपी की वजह से हाई कोर्ट को आदेश पर अनुपालन रोक देनी चाहिए, भरोसे लायक नहीं लगता। कोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि एसएलपी को अनुपालन की जांच टालने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया गया न कि सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला लेने की नीयत से।

साफ है कि एसीएस गृह ने खुद जिस उपाय यानी एसएलपी का हवाला देकर हाई कोर्ट के निर्देशों पर अमल रोकने की मांग की थी, उसको ही आगे बढ़ाने में कोई तत्परता नहीं दिखाई।कोर्ट ने यह भी कहा कि वह किसी अधिकारी की मंशा पर अनुमान नहीं लगाएगी, लेकिन घटनाक्रम से यह चिंता जायज है कि एसीएस गृह जांच के मानक सुधारने और कोर्ट का निर्देश लागू करने में हिचक दिखा रहे हैं।

ऐसा रवैया रहा तो पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाले सुधार बाधित होंगे। कोर्ट ने केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को सिफारिश की है कि वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अधीनस्थों के कार्यों के लिए जवाबदेह बनाने हेतु श्रेष्ठ उत्तरदायित्व के सिद्धांत का कानूनी ढांचा तैयार किया जाए।

खबरें और भी

चार्जशीट के कालम-16 में जांच का पूरा विवरण अनिवार्य हो। चार्जशीट दाखिल करने से पहले अभियोजन अधिकारी उसकी समीक्षा करें। एसएसपी/सीपी मासिक अनुपालन रिपोर्ट डीजीपी को दें। कोर्ट ने लालफीताशाही का भी जिक्र किया। कहा, मनमानी पर कोर्ट मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।

मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी की तलाशी के लिए याचिका दायर की थी। याची के अनुसार उसकी बेटी को 10 जून 2025 को आरोपित कल्लू बहला-फुसलाकर ले गया था।

झांसी के थाना सिपरी बाजार में प्राथमिकी दर्ज हुई। एक आरोपित गिरफ्तार हुआ, लेकिन बिना असली आरोपित पकड़े 13 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी गई। न्यायालय ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी और उनकी टीम की भी सराहना की जिसने लड़की को सकुशल बरामद कर परिवार से मिलवाया।

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