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सरकारी मुकदमों की बढ़ती लहर: 7 लाख से अधिक केस, 600 करोड़ से ज्यादा खर्च

आधिकारिक डेटा के अनुसार, केंद्र सरकार या उसकी एजेंसियों के पक्ष में 7,26,901 से अधिक मुकदमे अदालतों और ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं, जिनमें अधिकांश वित्तीय मुद्दों से जुड़े हैं। पिछले ग्यारह सालों में इन मामलों पर सरकार ने 600 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए हैं, और साल‑दर‑साल खर्च 52 करोड़ से 74 करोड़ रुपये तक बढ़ता दिख रहा है। लगभग 68% केस चार मुख्य मंत्रालयों—वित्त, रेलवे, रक्षा और श्रम एवं रोजगार—से संबंधित हैं, जो न्यायिक बोझ और प्रशासनिक प्रभाव को बढ़ा रहा है।

7 अक्टूबर 2026 को 01:04 pm बजे
सरकारी मुकदमों की बढ़ती लहर: 7 लाख से अधिक केस, 600 करोड़ से ज्यादा खर्च

सौजन्य से:- ETV Bharat

मुकदमेबाजी से आम आदमी ही नहीं, सरकार भी त्रस्त... अदालतों-ट्रिब्यूनल्स में चल रहे हैं 7 लाख से ज्यादा सरकारी मामले

कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में पिछले 11 सालों में 600 करोड़ से ज्यादा खर्च, आधे से अधिक केस सिर्फ चार मंत्रालयों से जुड़े

Published : October 7, 2026 at 6:16 PM IST

हैदराबाद.(EB Prime Team) आम लोग ही नहीं बल्कि सरकार भी मुकदमेबाजी से त्रस्त है. देश की अदालतों, ट्रिब्यूनल्स में बड़ी संख्या में लंबित मामलों के आंकड़े कुछ ऐसा ही कह रहे हैं. ऑफिशियल डाटा बताता है कि 7 लाख से ज्यादा ऐसे केसेस पेंडिंग हैं, जिसे कहीं न कहीं केंद्र सरकार लड़ रही है. इसमें ज्यादातर मुकदमे वित्तीय मामलों से जुड़े हैं. यही नहीं, इस कोर्ट-कचेहरी के चक्कर हर साल जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं.

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के लीगल अफेयर्स विभाग का विंग लीगल इनफाॅर्मेशन मैनेजमेंट एंड ब्रीफिंग सिस्टम(एलआईएमबीएस) समय-समय पर इस तरह के आंकड़े जुटाता है. इसी एलआईएमबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक 18 मार्च, 2025 तक देशभर में विभिन्न अदालतों में 7,26,901 मुकदमे चल रहे हैं, जिसमें केंद्र सरकार या उसकी कोई एजेंसी एक पार्टी है. अदालतों में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, ट्रिब्यूनल और लोवर कोर्ट शामिल हैं. आंकड़ों के अनुसार देश के अलग-अलग ट्रिब्यूनल्स में सबसे ज्यादा केसेस चल रहे हैं. नीचे की टेबल में देखिए- किस कोर्ट में कितने केस पेंडिंग हैं.

मुकदमेबाजी में हर साल कितना खर्च: पिछले 11 वर्षों के आंकड़े देखें तो साफ है कि अदालती कार्रवाइयों में हर साल औसतन 52 करोड़ रुपए के आसपास खर्च होते हैं. समय और मैनपावर की बर्बादी, वो अलग से. पिछले दस सालों में सरकार ने ऐसे मामलों की कानूनी लड़ाई में 600 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च कर चुकी है. मुकदमेबाजी का खर्च साल-दर-साल कैसे बढ़ता जा रहा है, टेबल से और स्पष्ट हो रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो इसका डाटा दिसंबर, 2025 तक ही उपलब्ध है और इस दौरान कोर्ट-कचेहरी का खर्च 74 करोड़ रुपए के करीब रहा.

वित्तीय वर्ष अदालती खर्च(करोड़ रुपए में)

2014-15 26.65

2015-16 37.43

2016-17 48.13

2017-18 65.84

2018-19 51.86

2019-20 61.09

2020-21 58.44

2021-22 48.57

2022-23 57.45

2023-24 66.58

2024-25 87.7

68% मामले केंद्र सरकार के सिर्फ चार मंत्रालयों से संबंधित: सरकारी मुकदमों में से करीब 68 फीसदी केसेस केंद्र सरकार के चार मंत्रालयों से जुड़े हुए हैं. कुल लंबित 7,26,901 मामलों में से 4,96,410 मुकदमे वित्त, रेलवे, डिफेंस और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से संबंधित हैं.

सरकारी मामलों को कैटेगरीवाइज देखें तो सबसे ज्यादा केसेस गवर्नमेंट सर्विस-पेंशन, रोजगार, इंफ्रा, जमीनी मुआवजा, टैक्स-रेवन्यू, प्राॅपर्टी विवाद, रेग्युलेटरी, संवैधानिक व जन कानून से जुड़े मामलों से संबंधित हैं. सरकारी मामलों के बढ़ते नंबर अदालतों के साथ-साथ ब्यूरोक्रेसी व प्रशासन पर भी दबाव बनाते हैं. इससे पब्लिक सर्विसेस, विकास योजानाओं की प्लानिंग-क्रियान्वयन, सरकारी नीतियां सब प्रभावित होते हैं. अलग-अलग विभागों में समन्वय की कमी, खराब लिटिगेशन मैनेजमेंट और फैसलों को ऊपरी फोरम में अपील की क्लियर गाइडलाइन न होना, बढ़ते सरकारी केसों के लिए बड़ी वजहें माने जा रहे हैं.

ओवरऑल अदालतों पर 5 करोड़ से ज्यादा मामलों का बोझ: देशभर में केसों की पेंडेंसी की बात करें तो हमारी अदालतों पर 5 करोड़ से ज्यादा केसों की सुनवाई लंबित है. डाटा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट्स, जिला व अन्य निचली अदालतों में 5.64 करोड़ मामले चल रहे हैं. इसी साल जुलाई में राज्य सभा में सरकार की ओर से यह आंकड़ा पेश किया गया था. यही नहीं, कई कई मामले 30-30 साल पुराने हैं. इसी तरह से नेशनल ज्युडिशियल डाटा ग्रिड(एनजेडीजी) एक साल से अधिक पुराने केसों की संख्या 30,926,590 है. एनजेडीजी के अनुसार नए मामले फाइल होने और केसों के डिस्पोजल के आंकड़े बताते हैं कि दोनों में कितना गैप है. पिछले महीने 41,25,211 केस फाइल किए गए जबकि कुल 33,99,310 मामले निपटाए जा सके.

कुल पेंडिंग मामलों में 8% महिलाओं के: एनजेडीजी का डाटा कहता है कि 39,53,523 मामले महिलाओं की ओर से फाइल किए गए हैं. यह कुल लंबित केसेस का करीब 8 प्रतिशत बनता है. इसी तरह से 33,17,294 केस देश के सीनियर सिटीजंस लड़ रहे हैं. यह संख्या कुल पेंडेंसी की तकरीबन 6 फीसदी बैठती है.

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