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गाजीपुर: अदालत ने मासूम भांजे के हत्यारे मामा को सुनाई फांसी की सजा, 50 हजार का लगाया जुर्माना

गाजीपुर: अदालत ने मासूम भांजे के हत्यारे मामा को सुनाई फांसी की सजा, 50 हजार का लगाया जुर्माना Ghazipur Murder Case: गाजीपुर की अदालत ने 4 साल के मासूम की हत्या के मामले में मामा को दोषी करार देते हुए मृत्यु दंड दिया है,…

ABP News के अनुसार13 जून 2026 को 12:16 pm बजे
गाजीपुर: अदालत ने मासूम भांजे के हत्यारे मामा को सुनाई फांसी की सजा, 50 हजार का लगाया जुर्माना

सौजन्य से:- ABP News

गाजीपुर: अदालत ने मासूम भांजे के हत्यारे मामा को सुनाई फांसी की सजा, 50 हजार का लगाया जुर्माना

Ghazipur Murder Case: गाजीपुर की अदालत ने 4 साल के मासूम की हत्या के मामले में मामा को दोषी करार देते हुए मृत्यु दंड दिया है, साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

गाजीपुर के अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की कोर्ट ने भांजे की हत्या के आरोपी को दोषी करार देते हुए कलयुग के कंश मामा को फांसी की सजा सुनाई है. साथ ही 50000 रुपये अर्थदंड भी लगाया है. अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने पर अपराधी अमजद खान के चेहरे पर अपने किए का कोई पछतावा नहीं था.

दरअसल, यह मामला गाजीपुर जनपद के गहमर थाना क्षेत्र के बारा गांव का है और यह घटना साल 2021 की है. अपराधी अमजद खान अपने 4 साल के मासूम भांजा दानियाल के साथ खेल रहा था, इसी दौरान अमजद ने किसी बात को लेकर अपने मासूम भांजे के गले को चाकू से रेत डाला.

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परिवार वालों की गवाही से अपराधी को मिली सजा

बताया गया कि इस पूरे मामले में आरोपी अमजद खान के भाई-बहन और परिवार के लोगों ने ही जमकर गवाही किया और उस गवाही के उपरांत आज अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने आरोपी अमजद खान को फांसी की सजा और 50000 रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है.

अदालत में भी अपराधी की नहीं गई अकड़

सहायक शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि सजा सुनाए जाने के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने आरोपी से पूछा था कि तुम्हें अपने किए पर कोई पछतावा है या नहीं. तब आरोपी ने बताया कि उसे किसी भी तरह का कोई पछतावा नहीं है, साथ ही उसने यह भी कहा कि जो भी मुझे उलझेगा उसे भी मैं मार दूंगा.

अपराधी के खराब व्यवहार से मिली मौत की सजा

अधिवक्ता ने बताया की सजा सुनाए जाने के दौरान जज ने अपनी कलम को तोड़ दिया था. उन्होंने कहा था कि हो सकता है कि अब भविष्य में सुधर जाए लेकिन इसकी बातों से ऐसा नहीं लगता है, इसलिए इसे दुर्लभतम से दुर्लभतम सजा मानते हुए मृत्यु दंड और ₹50000 के अर्थ दंड की सजा सुनाई है. उन्होंने बताया कि आरोपी ने अपने ही भांजे का इस तरह गला काटा था कि उनकी उसकी कोई भी नस नहीं बचा था मात्र 4 सेंटीमीटर बचा था.

फैसला सुनाते हुए जज ने की टिप्पणी

ऐसे में सजा सुनाए जाते वक्त जज ने यह भी कहा कि जिस मां ने अपने ही भाई के हाथों अपने चार साल के मासूम की हत्या होते हुए देखी है. उसका शब्दों से व्याख्या नहीं किया जा सकता. ऐसे में अभियुक्त के द्वारा किए गए कृत्य से सामाजिक संवेदना प्रभावित हो रहे हैं इसलिए मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई.

उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में कुल नौ गवाह पेश हुए जिसमें से 4 मृतक और अभियुक्त के परिवार वाले ही हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले में सगे भाई बहनों के गवाही के आधार पर किसी भी तरह के क्षम्य करने का मामला नहीं था, इसलिए कोर्ट ने इसे मृत्यु दंड की सजा सुनाई है.

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