हाई कोर्ट से बड़ी राहत: सेना अधिकारी को 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन बरकरार, केंद्र सरकार की याचिका खारिज
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को हाई कोर्ट ने 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश दिया है। उनकी सेवा में उच्च रक्तचाप की बीमारी को सैन्य सेवा से जुड़ा माना गया है।

सौजन्य से:- Jagran
36 साल सेवा के बाद सेना अधिकारी को हाई कोर्ट से राहत, केंद्र सरकार की याचिका खारिज; 50 प्रतिशत पेंशन बरकरार
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को राहत देते हुए 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि सेवा के ...और पढ़ें
HighLights
लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को 50% दिव्यांगता पेंशन बरकरार।
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की।
सेवाकालीन बीमारी सैन्य-संबंधित मानी जाएगी, यदि भर्ती पर स्वस्थ।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) चंडीगढ़ के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें अधिकारी को दिव्यांगता पेंशन का लाभ देते हुए 30 प्रतिशत दिव्यांगता को बढ़ाकर 50 प्रतिशत मानकर पेंशन देने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ पाया गया हो और सेवा के दौरान किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाए, तो यह माना जाएगा कि बीमारी का संबंध सैन्य सेवा से है। केवल मेडिकल बोर्ड की बिना ठोस कारणों वाली रिपोर्ट के आधार पर सैनिक को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
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2020 में हुए थे सेवानिवृत
मामले के अनुसार लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह ने 10 दिसंबर 1984 को भारतीय सेना में भर्ती ली थी। सेना में शामिल होने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण किया गया था और उन्हें पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था। उन्होंने 36 वर्ष से अधिक समय तक सेना में सेवा दी और 29 फरवरी 2020 को सेवानिवृत्त हुए।
सेवा के दौरान उनमें "प्राइमरी हाइपरटेंशन" (उच्च रक्तचाप) की बीमारी पाई गई, जिसके लिए मेडिकल बोर्ड ने 30 प्रतिशत दिव्यांगता निर्धारित की थी। हालांकि मेडिकल बोर्ड ने यह राय दी थी कि यह बीमारी सैन्य सेवा से न तो संबंधित है और न ही उससे बढ़ी है। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने दिव्यांगता पेंशन का पूरा लाभ देने से इनकार किया था।
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एएफटी ने दिया था दिव्यांगता लाभ देने का फैसला
इसके खिलाफ अधिकारी ने सशस्त्र बल अधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। एएफटी ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अधिकारी को दिव्यांगता पेंशन और 30 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत तक राउंड ऑफ कर लाभ देने का आदेश दिया था। इस आदेश को केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान केंद्र ने दलील दी कि मेडिकल बोर्ड ने बीमारी को सैन्य सेवा से असंबंधित माना है, इसलिए एएफटी का आदेश गलत है। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
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हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले धर्मवीर सिंह बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि यदि भर्ती के समय किसी बीमारी का कोई उल्लेख नहीं है तो यह माना जाएगा कि सैनिक पूरी तरह स्वस्थ था और बाद में उत्पन्न हुई बीमारी सेवा के दौरान ही विकसित हुई। ऐसे मामलों में सैनिक को कानूनी लाभ मिलना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि दिव्यांगता पेंशन पाने वाले सैन्यकर्मी को दिव्यांगता प्रतिशत का राउंड आफ लाभ देना अनिवार्य है, चाहे वह सेवा से मेडिकल आधार पर बाहर हुआ हो या नियमित सेवानिवृत्ति पर। हाई कोर्ट ने कहा कि एएफटी के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या तथ्यात्मक कमी नहीं है। इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
इसी के साथ केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई और लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को 1 मार्च 2020 से 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन का लाभ देने का आदेश बरकरार रखा गया।
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इसका मतलब क्या है
हाई कोर्ट का फैसला सैन्य अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण विजेता है, जो अपनी दिव्यांगता पेंशन के अधिकारों की रक्षा करता है। यह फैसला यह भी दर्शाता है कि केवल मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह मामला उन अधिकारियों के लिए एक मार्गदर्शक है जो अपनी सैन्य सेवा के दौरान होने वाली बीमारियों के लिए दिव्यांगता पेंशन का लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं। इसके साथ ही, यह फैसला केंद्र सरकार के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगा, जिसको अपनी नीतियों को सैन्य अधिकारियों के साथ सहमति के साथ तैयार करने होंगे।
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