नोएडा लोटस‑300 खरीदारों को मिला पूर्ण स्वामित्व, सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी हटाई
13‑साल के कानूनी संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लोटस‑300 के खरीदारों को फ्लैट बेचने और उन पर ऋण लेने की अनुमति दे दी, जिससे उन्हें संपत्ति पर पूर्ण अधिकार मिल गया। खरीदारों ने मिलकर 35 करोड़ रुपये जुटाकर अधूरे फ्लैटों का निर्माण पूरा कराया और अब 261 में से 330 फ्लैटों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के लोटस-300 खरीदारों को बड़ी राहत दी है। अब कोर्ट ने लोटस-300 सोसायटी के खरीदारों को फ्लैट का पूर्ण स्वामित्व सौंप दिया।
हाइलाइट्स
सुप्रीम कोर्ट ने लोटस 300 खरीदारों को दिया बड़ा राहत फैसला
13 वर्षों के बाद खरीदारों को मिला संपत्ति पर पूर्ण अधिकार
बिल्डर के खिलाफ कानूनी लड़ाई में खरीदारों की एकता बनी प्रेरणा
मनीष सिंह, नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा के लोटस-300 प्रोजेक्ट के खरीदारों को 13 वर्षों तक चले कानूनी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। फैसले के बाद अब वे अपने फ्लैट बेचने के साथ-साथ उन पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे, जिससे उन्हें संपत्तियों का पूर्ण स्वामित्व अधिकार मिल गया है।
लोटस-300 परियोजना के खरीदारों को रजिस्ट्री के साथ फ्लैट पर पूर्ण स्वामित्व मिल गया है। बिल्डर द्वारा सोसायटी का निर्माण अधूरा छोड़ने के बाद वर्ष 2013 में 20 खरीदारों ने पहली बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की थी। सभी के सामने घर मिलने को लेकर चिंता थी, लेकिन एकजुट होने के बाद उन्हें समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का हौसला मिला।
खरीदारों ने मिलकर जोड़े 35 करोड़ रुपये
इसके बाद सभी खरीदारों को तलाशकर साथ जोड़ने का अभियान शुरू किया गया, जो दो साल में पूरा हुआ। वर्ष 2015 में खरीदारों की बैठक में सोसायटी का निर्माण सामूहिक फंड से पूरा कराने और कानूनी लड़ाई जारी रखने का फैसला लिया गया। इसके बाद निवेशकों ने खुद करीब 35 करोड़ रुपये जुटाकर अधूरे फ्लैटों का निर्माण पूरा कराया और न्याय पाने के लिए कानूनी संघर्ष भी जारी रखा।
13 सालों बाद खरीदारों को राहत
हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चले लंबे कानूनी विवाद में लोटस-300 के खरीदारों के पक्ष में फैसला आया है। बिल्डर की देनदारियां पूरी न होने के बावजूद खरीदारों के नाम रजिस्ट्री हो रही थी, लेकिन उन्हें फ्लैट बेचने और संपत्ति पर ऋण लेने की अनुमति नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में लगाई गई यह पाबंदी अब समाप्त कर दी है। 13 वर्षों के संघर्ष के बाद खरीदारों को अपने फ्लैट बेचने और उन पर लोन लेने का पूर्ण अधिकार मिल गया है।
261 फ्लैटों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है
सोसायटी के 330 फ्लैटों में से 261 की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जबकि शेष खरीदारों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। पहले रजिस्ट्री सशर्त थी, लेकिन रोक हटने के बाद मालिकों को संपत्ति पर पूरा अधिकार प्राप्त हो गया है। अब प्राधिकरण बिल्डर से बकाया राशि की वसूली करेगा और खरीदारों को संपत्ति के मामले में सुरक्षा मिल गई है।
बिल्डर ने फंड देना बंद किया
लोटस-300 के खरीदारों ने वर्ष 2013 में पहली बार आर्थिक अपराध शाखा में बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कंपनी के निदेशकों की गिरफ्तारी हुई और उन्हें सशर्त जमानत मिली। परियोजना को पूरा कराने के लिए एक अलग बैंक खाता खोला गया, जिसमें बिल्डर को निर्माण कार्य के लिए धनराशि जमा करनी थी। कुछ समय तक रकम जमा करने के बाद बिल्डर ने फंड देना बंद कर दिया।
2024 में हाई कोर्ट ने खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाया
इसके बाद बैंक ने बिल्डर के खिलाफ एनसीएलटी में शिकायत दायर की, जिस पर खरीदारों ने अदालत से स्थगन आदेश प्राप्त किया। आगे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, दोनों ने खरीदारों के हित में निर्णय सुनाया। रजिस्ट्री कराने के लिए खरीदारों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। फरवरी 2024 में अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए रजिस्ट्री करने के निर्देश दिए, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इस दौरान 151 फ्लैटों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी थी।
आठ करोड़ है फ्लैट की कीमत
हालांकि, दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री जारी रखने की अनुमति देते हुए फ्लैट बेचने और उन पर ऋण लेने पर रोक लगा दी थी। लोटस-300 नोएडा की प्रमुख महंगी आवासीय परियोजनाओं में शामिल है। यहां एक फ्लैट की कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई जाती है, जबकि छह टावरों की ऊपरी मंजिल पर बने पेंट हाउस की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये तक है।
कोर्ट ने कहा- बिल्डर से वसूली करे प्राधिकरण
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परियोजना के खरीदार जमीन और फ्लैट की पूरी कीमत बिल्डर को पहले ही चुका चुके हैं, इसलिए बिल्डर की बकाया राशि की वसूली प्राधिकरण को उससे करनी चाहिए। खरीदारों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि रजिस्ट्री के साथ खरीदारों को फ्लैट से जुड़े सभी अधिकार देने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
कोर्ट ने हमारी दलील को सही माना- भुवन चतुर्वेदी
पूर्व एओए अध्यक्ष एवं कानूनी सलाहकार भुवन चतुर्वेदी ने कहा एकजुट होकर लड़ी गई हर लड़ाई में सफलता हासिल की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी सभी दलीलों और तथ्यों को सही माना व स्पष्ट किया कि इस मामले में खरीदारों की कोई गलती नहीं है।
कानून के दायरे में हर कदम उठाया- मानव अरोड़ा
एओए उपाध्यक्ष मानव अरोड़ा ने कहा कि हमारे लिए यह संघर्ष बेहद अहम था। अदालत का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल कायम करेगा। कानूनी समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल का कहना है कि इस मामले को कानूनी रूप से समझना हमारे लिए सबसे जरूरी था। सभी लोगों के साथ आने से उपयोगी सलाह मिली और हमने हर कदम कानून के दायरे में उठाया। इसी संगठित प्रयास के चलते आखिरकार हमें सफलता मिली।
लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।
अनुभव
यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।
शिक्षा
राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें
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