भजनपुरा दंगे में पुलिस ने दीवार तोड़ कर भागा, पांचों को दंगे और तोड़फोड़ में दोषी माना गया
24 फरवरी 2020 को भजनपुरा पेट्रोल पंप के बाहर हुई भीड़भाड़ में, पुलिस के खिलाफ पत्थरबाजी, गाड़ियों पर आग लगाना और तोड़फोड़ का आरोप है। अदालत ने पांच आरोपियों को गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा मानते हुए IPC की धारा 149 के तहत दंगे, आगजनी और तोड़फोड़ के लिए दंडित किया, जबकि पेट्रोल पंप में आग लगाए जाने का आरोप खारिज किया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
अदालत ने कहा कि हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि पुलिस अधिकारी पेट्रोल पंप की दीवार फांदकर भाग गए। अदालत ने आगे कहा कि जब भीड़ दंगा करने और आगजनी के अपने मकसद को पूरा करने में लगी थी, तब अधिकारियों का सामना बल-प्रयोग से हुआ, उन पर हमला किया गया और उन्हें भागना पड़ा। अभियोजन पक्ष के अनुसार CAA और NRC के विरोध-प्रदर्शन के दौरान 24 फरवरी 2020 को भजनपुरा पेट्रोल पंप के बाहर 100-150 लोगों की भीड़ जमा हुई थी।
पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की
आरोप है कि भीड़ ने सड़क का डिवाइडर पार किया, तोड़-फोड़ की, पुलिसकर्मियों पर हमला किया, गाड़ियों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया और गाड़ियों में आग लगा दी। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं बताईं। आरोप है कि आरिफ को पेट्रोल जैसा लिक्विड भरी बोतल लिए और उसे गाड़ियों पर डालते हुए देखा गया, जबकि दूसरों ने उनमें आग लगा दी। आरोप है कि खालिद ने गाड़ियों में आग लगाने के लिए टॉर्च का इस्तेमाल किया, तनवीर ने उन पर जलता हुआ कपड़ा फेंका, अब्दुल सत्तार ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके और हुनैन पर पेट्रोल पंप में आग लगाने का आरोप है।गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे आरोपी
कोर्ट ने माना कि पांचों आरोपी एक गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जिसका मकसद दंगा करना, आगजनी, तोड़-फोड़ और आपराधिक नुकसान पहुंचाना था। इसलिए, उस मकसद को पूरा करने के लिए किए गए अपराधों के लिए वे IPC की धारा 149 के तहत दोषी ठहराए गए। कोर्ट ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि पेट्रोल पंप में आग लगाई गई थी, क्योंकि IPC की धारा 436 के तहत लगे आरोप पर 'बहुत गंभीर संदेह' था। कोर्ट ने गौर किया कि गवाहों ने पंप पर किसी धमाके या आग की बात नहीं बताई थी, और माना कि अभियोजन पक्ष इस आरोप को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा।महिला की छाती पर 'रेपिस्ट' का टैटू; हाई कोर्ट ने कम कर दी आरोपी की सजा
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