ग्रेटर नोएडा की राष्ट्रीय लोक अदालत ने तीन दंपतियों को पुनर्विवाह की राह दिखाते हुए तलाक की अर्जी वापस ली
ग्रेटर नोएडा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने 92 मामलों की सुनवाई के दौरान तीन विवाहित जोड़ों को समझौता करवाया, जिससे उन्होंने तलाक और भरण‑पोषण की याचिकाएँ वापस ले ली और साथ घर लौट आए। न्यायाधीशों ने संवाद और पारस्परिक जिम्मेदारी के महत्व पर ज़ोर दिया, जिससे कोर्ट‑कचहरी के बजाय बातचीत से समस्याओं का समाधान हुआ।

सौजन्य से:- jagran.com
ग्रेटर नोएडा में लोक अदालत ने बचाए टूटते रिश्ते, तीन दंपती तलाक की अर्जी वापस लेकर घर लौटे साथ
ग्रेटर नोएडा में राष्ट्रीय लोक अदालत ने टूटते रिश्तों को नया जीवन दिया। इस दौरान 92 मामलों की सुनवाई हुई ...और पढ़ें
HighLights
- ग्रेटर नोएडा लोक अदालत ने तीन टूटते रिश्तों को बचाया।
- दंपतियों ने जजों की समझाइश पर आपसी मतभेद भुलाए।
- तलाक और भरण-पोषण के मामले वापस लिए गए।
गजेंद्र पांडेय, ग्रेटर नोएडा। छोटी-छोटी गलतफहमियों और विवादों के कारण टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्तों को गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने नया जीवन दिया। वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रहे दंपतियों ने जजों की समझाइश के बाद आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को माला पहनाई और हंसते-हंसते साथ घर लौटे।
बातचीत और आपसी समझ ही गृहस्थी का आधार
लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश चंद्र प्रकाश तिवारी और अपर प्रधान न्यायाधीश सीमा सिंह ने दंपतियों को परामर्श दिया कि शादी के वादों को निभाने और गृहस्थी संभालने में दोनों की बराबर जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि जरा सी गलतफहमी पर कोर्ट-कचहरी जाने के बजाय बातचीत से मसले सुलझाने चाहिए, ताकि अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें। पीठ ने कुल 92 मामलों की सुनवाई करते हुए तीन पारिवारिक विवादों का मौके पर ही निस्तारण कराया।
7 साल पुराना तलाक का मुकदमा वापस
नोएडा के सेक्टर-51 की रहने वाली महिला का विवाह वर्ष 2012 में हुआ था। दहेज और घरेलू हिंसा से परेशान होकर महिला ने वर्ष 2019 में तलाक का वाद दायर किया था। पिछले 7 सालों से जारी इस कानूनी लड़ाई का लोक अदालत में अंत हो गया। न्यायाधीशों के समझाने पर दोनों पक्ष पुरानी बातें भूलकर फिर से साथ रहने को तैयार हो गए और तलाक की याचिका वापस ले ली।
2 साल से भरण-पोषण की जंग लड़ रहे दंपती में सुलह
वर्ष 2022 में नोएडा की महिला का विवाह हरियाणा के युवक से हुआ था। जेब खर्च और जरूरतों को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे थे। वर्ष 2024 में महिला ने कोर्ट में भरण-पोषण (मासिक भत्ता) का मामला दर्ज कराया था। लोक अदालत में जज की मध्यस्थता से दोनों के बीच समझौता हो गया और वे एक साथ रहने पर सहमत हुए।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ लोक अदालत का शुभारंभ
इससे पूर्व, जिला जज एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अतुल श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया और कई मामलों की सुनवाई कर उनका त्वरित निस्तारण कराया।
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