सुनिश्चित न हो पाया कि वन भूमि का हस्तांतरण निर्णय में उल्लिखित समयसीमा में होगा,
मप्र में वन विभाग के करीब 29,906 एकड़ वन भूमि अभी भी निजी स्वामी के कब्जे में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वन व्यवस्था के समन्वय के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे, हालांकि एक साल बाद भी यह प्रक्रिया सुस्ती के चेहरे पर है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रक्रिया सुस्त:एक साल का समय पूरा, 29 हजार एकड़ वन भूमि अब भी कब्जे में
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मप्र में सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया सुस्त चाल से चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को निजी व्यक्तियों, संस्थाओं और राजस्व विभाग के अवैध कब्जे वाली वन भूमि को वापस वन विभाग के नियंत्रण में सौंपने के दिए गए आदेश की एक साल की समय-सीमा पूरी हो चुकी है।
इसके बावजूद बाद भी करीब 29906 एकड़ (12,102.78 हेक्टेयर) का बड़ा भू-भाग अब भी वन विभाग के नियंत्रण से बाहर है। इसमें वन विभाग का ऐसा बहुत बड़ा हिस्सा है, जिस पर कमर्शियल गतिविधियां चल रही है।
मप्र में कुल 1,27,170 एकड़ वन भूमि ऐसी पाई गई थी जो निजी व्यक्तियों, संस्थाओं या अन्य विभागों के पास आवंटित थी। इसमें से अब तक केवल 39,361.06 हेक्टेयर भूमि को ही डी-नोटीफाई या ट्रांसफर की प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
शीर्ष अदालत ने 15 मई 2025 को पारित निर्णय में निर्देश दिया था कि संरक्षित वन के रूप में दर्ज, लेकिन राजस्व विभाग के नियंत्रण में या निजी संस्थाओं को दी गई सभी भूमियों को एक साल के भीतर खाली कराकर वन विभाग के सुपुर्द किया जाए।
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