कोर्ट के दो बड़े फैसले: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषियों को 20 साल की सजा, एयरबैग नहीं खुलने पर कार कंपनी को चुकाने होंगे 40 लाख
कोर्ट के दो बड़े फैसले: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषियों को 20 साल की सजा, एयरबैग नहीं खुलने पर कार कंपनी को चुकाने होंगे 40 लाख जयपुर की विशेष अदालत और जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-प्रथम ने सुनाया फैसला. Published : June 13,…

सौजन्य से:- ETV Bharat
कोर्ट के दो बड़े फैसले: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषियों को 20 साल की सजा, एयरबैग नहीं खुलने पर कार कंपनी को चुकाने होंगे 40 लाख
जयपुर की विशेष अदालत और जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-प्रथम ने सुनाया फैसला.
Published : June 13, 2026 at 8:47 PM IST
जयपुर: जिले की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के अभियुक्त मनीष कुमार और अमित कुमार को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडित किया. अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष पीड़िता की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्यों और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आरोप साबित करने में सफल रहा. उधर, जिला उपभोक्ता आयोग, जयपुर-प्रथम ने एक्सीडेंट में कार के एयरबैग नहीं खुलने से महिला की मौत मामले में विपक्षी कार कंपनी को मृतका के परिजनों को 40 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया.
पॉक्सो अदालत के पीठासीन अधिकारी कैलाश चंद्र अटवासिया ने दुष्कर्म मामले में आदेश में कहा कि पीड़िता ने घटना का क्रम स्पष्ट और सुसंगत तरीके से बताया. जिरह के दौरान भी बयानों में कोई विरोधाभास नहीं दिखा कि उसकी विश्वसनीयता पर संदेह किया जा सके. विशेष लोक अभियोजक कमलेश शर्मा ने अदालत को बताया, पीड़िता के पिता ने 6 नवंबर, 2022 को शाहपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. उसमें कहा कि रात को अभियुक्त अमित उसकी बेटी से दुष्कर्म कर रहा था. अमित को मौके पर परिजनों ने पकड़ा. रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस को पता चला कि दूसरे अभियुक्त ने भी दुष्कर्म किया था. इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया.
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वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल: सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि घटना के कुछ माह पहले कपड़ों की दुकान के ट्रायल रूम में अभियुक्त ने उसका वीडियो बना लिया था. उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर दुष्कर्म कर रहा था. बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़ित पक्ष ने वसूली के लिए मामला दर्ज कराया है. पहले भी पीड़ित पक्ष ने एक पॉक्सो का मामला दर्ज कराया था. उसमें राजीनामा कर लिया था. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्तों को सजा सुनाई.
एयरबैग नहीं खुलने से कार कंपनी का सेवा दोष माना: उधर, जिला उपभोक्ता आयोग, जयपुर-प्रथम ने एक्सीडेंट में कार के एयरबैग नहीं खुलने से महिला की मौत मामले में विपक्षी मारुति सुजुकी इंडिया लि. को सेवादोष व जिम्मेदार माना. आयोग ने मृतका के परिजनों को 40 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया. विपक्षी मारुति को इस राशि पर परिवाद दायर करने की तारीख से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा. आयोग ने कंपनी पर 1.25 लाख रुपए का हर्जाना भी लगाया. आयोग अध्यक्ष डॉ. सूबेसिंह और सदस्य आशुतोष चौधरी व हेमलता अग्रवाल ने यह आदेश मृतका की मां ललिता व भाई के परिवाद पर दिया.
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वाहन निर्माता कंपनी जिम्मेदार: आयोग ने माना कि एक्सीडेंट के समय वाहन की सुरक्षा प्रणाली ने सही काम नहीं किया. इसके चलते एयरबैग नहीं खुले. एयरबैग नहीं खुलने से चालक और यात्री को गंभीर शारीरिक नुकसान हुआ. यह वाहन की सुरक्षा और गुणवत्ता में कमी दर्शाता है. इसके लिए वाहन निर्माता कंपनी जिम्मेदार है.
यह था परिवाद: परिजनों ने परिवाद में कहा कि 4 मार्च 2025 को दिल्ली-जयपुर रोड पर प्रीति कार से जयपुर आ रही थी. उसके साथ मित्र गौरव भी था. रात 9:40 बजे, चंदवाजी के पास घाटवाड़ा पुलिया के पास वाहन असंतुलित होकर सामने बने डिवाइडर से टकराकर पलट गया. एक्सीडेंट इतना गंभीर था कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इस दौरान कार के एयरबैग नहीं खुले. प्रीति शर्मा को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर मृत्यु हो गई. इसे वाहन का निर्माण दोष बताकर परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में चुनौती देते हुए कहा कि वाहन में बैठे दोनों लोगों ने सीट बेल्ट लगाई हुई थी. ऐसी स्थिति में वाहन के एयरबैग खुलने चाहिए थे, लेकिन एयरबैग नहीं खुले. लिहाजा विपक्षी कंपनी सहित अन्य पक्षकारों से क्षतिपूर्ति दिलवाई जाए.
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