होमकानूनव्यक्ति की अवैध हिरासत पर भड़का इलाहबाद हाई कोर्ट, पीड़ित को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश - Jansatta
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व्यक्ति की अवैध हिरासत पर भड़का इलाहबाद हाई कोर्ट, पीड़ित को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश - Jansatta

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को आठ दिनों तक गैर-कानूनी रूप से पुलिस कस्टडी में रखने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह उसे 6 हफ़्ते के अंदर दो लाख रुपये का मुआवज़ा दे। क…

Jansatta के अनुसार10 जून 2026 को 08:08 am बजे
व्यक्ति की अवैध हिरासत पर भड़का इलाहबाद हाई कोर्ट, पीड़ित को 2 लाख मुआवजा देने का आदेश - Jansatta

सौजन्य से:- Jansatta

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को आठ दिनों तक गैर-कानूनी रूप से पुलिस कस्टडी में रखने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह उसे 6 हफ़्ते के अंदर दो लाख रुपये का मुआवज़ा दे। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि राज्य सरकार यह रकम प्रयागराज के बारा इलाके के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) से वसूलेगी, लेकिन इसके लिए पहले उनके ख़िलाफ़ तीन महीने के अंदर अनुशासनात्मक जांच करनी होगी।

मंसूर अहमद की ओर से दायर हुई थी याचिका

प्रयागराज के रहने वाले मंसूर अहमद की ओर से दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिवीज़न बेंच ने प्रयागराज कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर (CP) को आदेश दिया कि वे 14 सितंबर या उससे पहले आदेश के पालन की रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने मामले को 14 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो CP को अगली तारीख पर कोर्ट में खुद पेश होना होगा।

प्रयागराज कमिश्नरेट में हालात चौंकाने वाले हैं- हाई कोर्ट

कोर्ट ने कहा, “प्रयागराज कमिश्नरेट में हालात चौंकाने वाले हैं। पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी गई हैं, जिनका बुरी तरह से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कोर्ट ने गाजियाबाद कमिश्नरेट से जुड़े एक मामले (चंद्र पाल सिंह और अन्य बनाम यूपी राज्य) में भी ऐसी ही स्थिति पर विचार किया था, जिसमें पुलिस कमिश्नर द्वारा शक्तियों के गलत इस्तेमाल का मामला कोर्ट के संज्ञान में लाया गया था।”

यूपी मुख्यमंत्री पोर्टल पर पीड़ित के बेटे ने दर्ज करवाई थी शिकायत

याचिका के अनुसार, स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के पद पर तैनात कृष्ण मोहन सिंह, सब-इंस्पेक्टर उमेश सिंह और कॉन्स्टेबल अंकित सिंह व त्रिभुवन पांडे कथित तौर पर जबरन मंसूर अहमद के घर में घुसे और उन्हें थाने ले गए। जब उनकी पत्नी ने गिरफ्तारी का कारण पूछा, तो याचिकाकर्ता को साथ ले जाने से पहले उन्होंने कथित तौर पर उन्हें एक तरफ धकेल दिया। उसी दिन, याचिकाकर्ता के बेटे शाहरुख खान ने अपने वकील के माध्यम से यूपी मुख्यमंत्री पोर्टल पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

याचिका के अनुसार, जब याचिकाकर्ता की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य पुलिस स्टेशन गए, तो उन्होंने पाया कि मंसूर अहमद की पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पिटाई की थी और उसकी हालत खराब थी। याचिका के मुताबिक परिवार के सदस्यों ने प्रयागराज के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस और कमिश्नर ऑफ़ पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 23 मार्च को ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) रिट याचिका दायर की गई।

पुलिस अधिकारियों ने अपने जवाब में कहा कि शांति भंग करने से जुड़ी कार्यवाही के दौरान जब हिरासत में लिया गया व्यक्ति शांति बनाए रखने के लिए पर्सनल बॉन्ड नहीं भरता है, तो उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाता है। हालांकि, इस मामले के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब याचिकाकर्ता ने शांति बनाए रखने के लिए पर्सनल बॉन्ड भरने से इनकार किया हो।

यह भी पढ़ें- इलाहाबाद हाई कोर्ट की यूपी पुलिस पर सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश (UP) में पुलिस अधिकारी संविधान के बजाय सत्ताधारी सरकार के प्रति ज़्यादा वफादार हैं। पढ़ें पूरी खबर

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