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19 साल पुराने केस का रिकॉर्ड गुम होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम

Supreme Court Strict Stance Gujarat Police Given 6 Week Ultimatum Over Missing 19 Year Old Case Records Action Demanded 19 साल पुराने केस का रिकॉर्ड गुम होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम सुप्…

Navbharat Times के अनुसार6 जून 2026 को 05:41 am बजे
19 साल पुराने केस का रिकॉर्ड गुम होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम

सौजन्य से:- Navbharat Times

Supreme Court Strict Stance Gujarat Police Given 6 Week Ultimatum Over Missing 19 Year Old Case Records Action Demanded

19 साल पुराने केस का रिकॉर्ड गुम होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के 19 साल पुराने जालसाजी मामले में केस रिकॉर्ड गुम होने को गंभीर लापरवाही बताते हुए गुजरात पुलिस को 6 सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 19 साल पुराने आपराधिक मामले की जांच के दौरान केस रिकॉर्ड गुम होने को बेहद गंभीर मानते हुए गुजरात पुलिस को 6 सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली की जड़ पर प्रहार करती हैं और वास्तविक शिकायतों को कमजोर बना देती हैं।

पीठ ने गुजरात सरकार से पूछा कि रिकॉर्ड गुम होने के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? अदालत ने इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामला 2007 में गुजरात के भीलोड़ा गांव में संपत्ति विवाद से जुड़ी कथित जालसाजी का है।

19 साल पुराने केस में रिकॉर्ड गुम होने पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

गुजरात सरकार से जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा

क्या है मामला?

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी हज यात्रा के दौरान दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदल दिए गए। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाई गई थीं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि केस के मूल दस्तावेज और जांच रिपोर्ट न्यायिक मैजिस्ट्रेट को भेजते समय गुम हो गए थे। इसके कारण दोबारा जांच करनी पड़ी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि 2017 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जांच पूरी न होना गंभीर लापरवाही है। अदालत ने हाईकोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक अदालतें ऐसे मामलों में मूकदर्शक नहीं बन सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिकॉर्ड गुम होना न्याय व्यवस्था पर चोट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड गुम होना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियां समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करें और रिकॉर्ड सुरक्षित न रख सकें, तो पीड़ितों का न्याय प्रणाली से भरोसा कमजोर पड़ता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाह न मिलने या दस्तावेज गायब होने की स्थिति में भी जांच एजेंसी को मजिस्ट्रेट के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, न कि मामले को वर्षों तक लंबित छोड़ना चाहिए था।

बहाना बनाकर मामले लंबित नहीं रख सकते

यह फैसला संदेश देता है कि केस रिकॉर्ड गुम होना गंभीर लापरवाही है और जाच एजेंसिया इसे बहाना बनाकर मामलो को लंबित नहीं रख सकती। इससे भविष्य के मामलों में पुलिस पर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच करने, तय समय में मैजिस्ट्रेट के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने और रिकॉर्ड के उचित प्रबंधन का दबाव बढ़ेग। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद भी बढ़ेगी। हाई कोर्ट में देरी और लापरवाही पर अधिक सक्रिय होकर हस्तक्षेप करेंगे।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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