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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की 152 मेडिकल सीटों के सरेंडर पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

तमिलनाडु की 152 मेडिकल सीटों के सरेंडर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि कितने लोग प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं? इस मामले की सुनवाई जुलाई में होगी।

Navbharat Times के अनुसार24 जून 2026 को 04:59 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की 152 मेडिकल सीटों के सरेंडर पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

सौजन्य से:- Navbharat Times

Supreme Court News: 'कितने लोग प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं?' देश की सर्वोच्च अदालत ने ये सवाल उठाए हैं। पूरा मामला तमिलनाडु की 152 मेडिकल सीटों के सरेंडर से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है।

नई दिल्ली: तमिलनाडु में 2025-26 एकेडमिक ईयर के लिए खाली पड़ी 152 इन-सर्विस सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को ऑल इंडिया कोटा में ट्रांसफर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की याचिका पर ये नोटिस जारी किया है।

'कितने लोग प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं?'

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ ही तमिलनाडु सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करके इस संबंध में जवाब मांगा है। वहीं इस मामले की सुनवाई जुलाई के लिए तय की है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि अगर कोई सरकारी डॉक्टर स्किल हासिल करता है, तो वह प्राइवेट डॉक्टर की तुलना में पब्लिक हेल्थ के लिए बेहतर सेवा दे पाएगा। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि इन-सर्विस कैंडिडेट्स एक अलग कैटेगरी बनाते हैं क्योंकि वे एक ही समय में काम और पढ़ाई दोनों कर रहे होते हैं।

क्या है पूरा मामला जान लीजिए

सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी 152 इन-सर्विस सुपर-स्पेशियलिटी सीटों से जुड़ी है।

ये 2025-26 एकेडमिक ईयर के लिए राज्य के लिए तय की गई थीं।

तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है, इसमें अधिकारियों को इन सीटों को ऑल इंडिया कोटा में सरेंडर करने से रोकने के लिए कहा गया है।

एसोसिएशन ने कहा कि जब तक कि काउंसलिंग प्रोसेस बाद के फेज तक न पहुंच जाए।

इसने तमिलनाडु में इन-सर्विस कैंडिडेट्स को काउंसलिंग के तीसरे राउंड या मॉप-अप राउंड के दौरान इन सीटों के लिए मुकाबला करने की अनुमति भी मांगी है।

अगर AIQ काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद क्वालिफाइंग परसेंटाइल 50 परसेंट से कम कर दिया जाता है।

उदयनिधि स्टालिन ने भी उठाया था ये मुद्दा

यह मुद्दा इस महीने की शुरुआत में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी उठाया था। 4 जून को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को लिखे एक पत्र में, उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे 152 सीटों को ऑल इंडिया कोटा में सरेंडर होने से रोकने के लिए कदम उठाएं। 2025 NEET सुपर-स्पेशियलिटी काउंसलिंग प्रोसेस का जिक्र करते हुए, स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में उपलब्ध 430 सीटों में से 215 सीटें इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों के लिए रिजर्व थीं। उन्होंने कहा कि इन रिजर्व सीटों में से काउंसलिंग प्रोसेस के दौरान केवल 63 सीटें भरी गईं और नतीजतन, काउंसलिंग के दूसरे राउंड के खत्म होने के बाद 152 सीटें खाली रह गईं।

लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।

विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।

पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें

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