सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्य और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों को विद्युत आयोग के रिक्त पदों पर नोटिस भेजा
सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने एनजीओ एनर्जी वाचडॉग की याचिका पर 15 राज्य और 2 केंद्रशासित प्रदेशों से विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से रिक्त अध्यक्ष और सदस्य पदों के बारे में जवाब माँगा। याचिका में कहा गया कि कई राज्यों में न तो अध्यक्ष और न ही विधि विशेषज्ञ नियुक्त हुए हैं, जिससे आयोगों का कार्य प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने इन रिक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की और जवाब देने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Jagran
विद्युत नियामक आयोगों में खाली पदों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 15 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने तथा कानूनी विशेषज्ञों ...और पढ़ें
HighLights
- विद्युत नियामक आयोगों में रिक्त पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से मांगा जवाब
- 15 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों को शीर्ष न्यायालय का नोटिस
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने तथा कानूनी विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं होने के आरोपों पर शुक्रवार को 15 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एनजीओ एनर्जी वाचडॉग की जनहित याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।
याचिका में विद्युत अधिनियम, 2003 और सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2018 के फैसले के अनुरूप राज्य विद्युत नियामक आयोगों (एसईआरसी) के गठन की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, कई राज्यों में आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड सहित कई राज्यों में विधि विशेषज्ञों की नियुक्ति भी नहीं हुई है।
याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु में आयोग के तीनों पद खाली हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में अध्यक्ष और तकनीकी सदस्य का पद रिक्त है।
बंगाल में आयोग के अध्यक्ष के पास आवश्यक कानूनी अधिकार नहीं होने का भी दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के अनुसार, राज्य विद्युत नियामक आयोगों में योग्य विधि विशेषज्ञ का होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम और सिक्किम राज्यों, और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।
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