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पेसा अधिनियम से सशक्त ग्राम सभा: अधिकारों और कर्तव्यों की समझ आवश्यक

रांची में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने पेसा कानून के प्रभावी कार्यान्वयन, इसके मूल उद्देश्य और ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कानून की जानकारी को गाँव‑गाँव तक पहुँचाने, अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को समझाने और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की वकालत की।

9 अक्टूबर 2026 को 03:06 pm बजे
पेसा अधिनियम से सशक्त ग्राम सभा: अधिकारों और कर्तव्यों की समझ आवश्यक

सौजन्य से:- ETV Bharat

पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से सशक्त होंगी ग्राम सभाएं, अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को समझना भी जरूरी : शिल्पी नेहा तिर्की

पेसा कानून पर रांची में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें सूबे की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की शामिल हुईं. रिपोर्ट-उपेंद्र कुमार

Published : October 9, 2026 at 7:35 PM IST

रांची: राजधानी रांची के बेड़ो के महादानी मैदान स्थित विवाह मंडप एवं अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, इटकी के सभागार में आज ग्राम प्रधानों के साथ पेसा कानून, ग्रामसभा के अधिकार, ग्राम स्वशासन एवं पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की शामिल हुए. इस दौरान पेसा कानून के प्रावधानों, ग्रामसभाओं की भूमिका और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई.

पेसा कानून के उद्देश्य पर मंत्री ने डाला प्रकाश

इस मौके पर सूबे की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भूरिया समिति की अनुशंसाओं के आधार पर वर्ष 1996 में पेसा कानून बनाया गया. इसका मूल उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों, सामुदायिक अधिकारों और स्वशासन की परंपराओं को संरक्षण व मजबूती प्रदान करना है. झारखंड में 02 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली का लागू होना राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके माध्यम से ग्रामसभाओं को उनके संवैधानिक व कानूनी अधिकारों के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.

उन्होंने कहा कि यह विचारणीय विषय है कि वर्ष 1996 में कानून बनने के बाद इसकी नियमावली तैयार होने में लगभग तीन दशक क्यों लग गए? इतने लंबे समय तक ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामसभाओं के सामने कानून के वास्तविक प्रावधानों और उनके प्रभावी इस्तेमाल को लेकर कई सवाल बने रहे. राज्य सरकार ने विभिन्न पक्षों से विमर्श, सुझावों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमावली लागू करने की दिशा में पहल की.

"पेसा के प्रावधानों की जानकारी पहुंचाना जरूरी"

कृषि मंत्री ने कहा कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने इसे एक सरल उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास अच्छी गाड़ी हो, लेकिन उसे चलाना न आता हो, तो उसकी उपयोगिता सीमित रह जाती है. उसी प्रकार जब तक ग्राम प्रधानों, ग्रामसभा के सदस्यों, पारंपरिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों को पेसा कानून के अधिकारों व प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी नहीं होगी, तब तक इसके उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन होगा.

गांव-गांव जागरुकता अभियान चलाने पर जोर

उन्होंने कहा कि इसके लिए गांव-गांव तक जागरुकता अभियान चलाने, ग्रामसभाओं को उनके अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों से परिचित कराने और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई या कमी सामने आती है, तो संवाद व जमीनी अनुभवों के आधार पर आवश्यक सुधार की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए.

राज्य की कृषि मंत्री ने कहा कि पेसा कानून केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा, सामुदायिक अधिकारों और ग्राम स्वशासन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. हमारा उद्देश्य है कि ग्रामसभा केवल औपचारिक संस्था बनकर न रह जाए, बल्कि वह जागरूक, सक्षम और स्थानीय स्वशासन की प्रभावी इकाई के रूप में कार्य करें.

अधिकारों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करें ग्राम प्रधान: बंधु तिर्की

राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि गठबंधन सरकार द्वारा पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को दिए गए अधिकारों का सही और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित करना आवश्यक है. ग्राम प्रधानों को गांव के हाट-बाजार, स्थानीय विवादों व खनन सहित कानून के दायरे में आने वाले विभिन्न विषयों पर ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्रामसभा की जिम्मेदारी किसी एक जाति, धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है. गांव में रहने वाले सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और सभी के साथ निष्पक्षता व न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना ग्रामसभा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. ग्राम प्रधानों को निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी को न्याय मिल सके.

बंधु तिर्की ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. ग्राम प्रधानों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल मनमाने ढंग से करने के बजाय संवैधानिक व कानूनी प्रावधानों के अनुरूप करना चाहिए. उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे पेसा कानून की पुस्तक को ध्यानपूर्वक पढ़ें. उसके प्रत्येक प्रावधान को समझें और अपने अधिकारों व कर्तव्यों की पूरी जानकारी प्राप्त करें.

ग्रामसभाओं के सशक्तीकरण में निहित है कानून की सफलता

उन्होंने कहा कि कानून की वास्तविक सफलता केवल उसके प्रावधानों में नहीं, बल्कि गांवों में उसके प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामसभाओं के सशक्तीकरण में निहित होती है और इस बात का सबको ख्याल रखना होगा. जब ग्राम प्रधान और ग्रामसभा के सदस्य अपने अधिकारों व जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होंगे, तभी स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था मजबूत होगी. कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर संजीव भगत, करमा उरांव, बेरोनिका उरांव, मोदशीर हक, रमेश महली, राजन किस्पोट्टा, अबूमाज, भोमा सिंह आदि उपस्थित थे.

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