पुलिस की जब्त संपत्ति की सुरक्षा पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में पुलिस ने अदालत को बताया कि जब्त किए गए सोने के आभूषण बारिश में नष्ट हो गए। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए पुलिस अधिकारियों से नुकसान की भरपाई का आदेश दिया। यह मामला पुलिस जवाबदेही, केस प्रॉपर्टी सुरक्षा और न्यायिक निगरानी से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि जब्त संपत्ति को सुरक्षित रखना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Gold Stolen by Monkeys: लखीमपुर जिले के एक मामले में पुलिस ने अदालत को बताया कि जब्त सोना बारिश में गल गया, बाकी कुछ बंदर ले गए। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए पुलिस अधिकारियों से नुकसान की भरपाई का आदेश दिया। मामला पुलिस जवाबदेही, केस प्रॉपर्टी सुरक्षा और न्यायिक निगरानी से जुड़ा है।
नई दिल्ली: भारत की अदालतों में कई बार ऐसी घटनाएं होती है कि आम आदमी सोचने को मजबूर हो जाता है कि ऐसे में न्याय कैसे मिल पाएगा। यूपी के लखीमपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साल 2007 के एक हत्या मामले में पुलिस ने अदालत को बताया कि जब्त किए गए लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषणों में से कुछ बारिश में नष्ट हो गए और बाकी बंदर उठा ले गए। अदालत ने फिर क्या किया, वो तो बात बाद में लेकिन यह मामला अब पुलिस की जवाबदेही और जब्त संपत्ति की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी बहस का विषय बन गया है।
क्या था मामला, और 1 करोड़ का सोना कहां से आया
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर का यह मामला साल 2007 में दर्ज एक हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। यहां के कपूरथला मोहल्ला के मुदित की पत्नी ने दीवाली के दिन आत्महत्या कर ली थी। शव के परीक्षण के वक्त मृतका के आभूषणों की लिस्ट बना कर पुलिस ने साक्ष्य के रुप में रख लिया था। जिस सदरकोतवाली के मालखाने में जमा भी कराया गया था। फिर ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।
मामले में मृतका के पति समेत कई ससुरालियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अदालती कार्रवाई लंबी चली। आखिर में साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपी बरी हो गए। जब परिवार वालों अदालत से पुलिस के जब्त गहनों को रिलीज करने की मांग की तो पुलिस का जवाब चौंकाने वाला था। लखीमपुर पुलिस ने कहा कि गहनों की पोटली एक बार भींग गई थी , जिसके चलते अधिकांश जेवर गल गए। और जब पोटली, सुखाने के लिए मालखाने की छत पर रखी गई तो बाकी बचे गहने बंदर ले भागे।
पुलिस के हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। अदालत ने भी इस दलील को अविश्वसनीय माना। तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने पुलिस को कड़ी फटकार लगायी। उन्होंने कहा कि सोना ऐसा पदार्थ नहीं है जो सामान्य बारिश से नष्ट हो जाए। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि बंदर आभूषण लेकर गए थे तो इस संबंध में कोई रिकॉर्ड, शिकायत या जांच क्यों नहीं की गई।
जब कोई वस्तु पुलिस की अभिरक्षा में होती है तो उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस विभाग की होती है। हर थाने में एक मालखाना होता है। इस मालखाने में केस से जुड़ी सारी चीजें सीलबंद कर रखी जाती हैं। तब तक जब तक की कोर्ट से केस का निपटारा ना हो जाए। यानी मालखाने में रखा माल केस प्रॉपर्टी होता है। जब्त संपत्ति के संरक्षण में गंभीर लापरवाही हुई है।
तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल
न्यायालय ने कहा कि यदि पुलिस किसी व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करती है तो उसे सुरक्षित रखने का कानूनी दायित्व भी निभाना होगा। अदालत ने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए नुकसान की भरपाई का आदेश दिया।
पुलिसिया जब्त संपत्ति की सुरक्षा पर क्या कहता है कानून
पुलिस द्वारा जब्त की गई संपत्ति को मुद्दा-ए-माल या केस प्रॉपर्टी कहा जाता है। भारतीय न्याय संहित और न्यायालयों के विभिन्न निर्देशों के अनुसार ऐसी संपत्ति का उचित रिकॉर्ड रखना और उसे सुरक्षित रखना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।
यदि पुलिस की लापरवाही से जब्त वस्तु नष्ट हो जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए या गायब हो जाए तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
कई मामलों में अदालतें विभागीय कार्रवाई, अनुशासनात्मक जांच और आर्थिक वसूली के आदेश भी दे चुकी हैं।
साक्ष्य और जब्त संपत्ति, निष्पक्ष सुनवाई के लिए अहम
देखा जाए तो यह मामला केवल गायब हुए सोने तक सीमित नहीं है। अदालत की टिप्पणी यह संदेश देती है कि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां जब्त संपत्ति की सुरक्षा को हल्के में नहीं ले सकतीं। पहले भी न्यायालयों ने कई बार कहा है कि साक्ष्य और जब्त संपत्ति किसी भी मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई के लिए सबसे जरूरी बातों में आती हैं। इसलिए किसी भी स्थिति में इनसे छेड़छाड़ ठीक नहीं।
लेखक के बारे मेंमनीष राजमनीष राज फिलहाल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसलटेंट लीगल एडिटर के पद पर सेवारत हैं। इनकी पत्रकारिता की शुरूआत 24 वर्ष पहले राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रमुख नेशनल न्यूज ब्रॉडकास्ट मीडिया चैनल से हुई। इन्होंने कानून (L.L.B.) और अर्थशास्त्र में स्नातक के साथ पत्रकारिता व जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया हुआ है। भारत के कानूनी ढांचे के विभिन्न आयामों और उनके व्यावहारिक पहलुओं को इन्होंने गहराई से अध्ययन किया है।वर्ष 2018 में मनीष राज, इंडिया लीगल ग्रुप से जुड़े, जिससे कानून के क्षेत्र में इनकी रुचि जगी। यहां इन्होंने कानून की बारीकियों के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की गतिविधियों और प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा। इस तरह से पिछले सात सालों से पेशेवर लीगल स्टोरी लेखन-संपादन के साथ साथ इनका कानूनी गतिविधियों और केस लॉ की बारीकियों को विश्लेषण करने का काम जारी है। इनके लिखे लेख अक्सर न्यायपालिका और आम जनता के बीच एक सेतु का काम करते हैं, और अदालती कार्यवाहियों पर व्यवस्थित रिपोर्टिंग उपलब्ध कराते हैं। ये सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्य भी रहे हैं, जहां इन्होंने देश के कई प्रसिद्ध वकीलों के साथ काम करने का अनुभव हासिल किया है।इन्हें सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, कॉर्पोरेट और संवैधानिक कानून जैसे विषयों पर लिखना पसंद है। इनके लिखने का उद्देश्य है कि आम जनता के साथ-साथ और युवा वकील भी न्यायिक फैसलों और कानून की जटिलताओं को समझ सकें और कानूनी जागरूकता बढ़े। इनकी लेखन शैली सटीक, तथ्य-आधारित और पाठकों के लिए समझने में सरल है।विशेषताएँ:• सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायिक फैसलों का सरल भाषा में लेखन और विश्लेषण • केस लॉ का सरल भाषा में विस्तार • आम जन, युवा वकीलों और छात्रों के लिए मार्गदर्शन • ब्लॉग और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय लेखन... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
एक करोड़ रुपये का सोना गायब! अदालत ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई

हरेन पांड्या मर्डर केस: सरकार को 6 महीने में दोषी की दया याचिका पर फैसला लेना होगा

जैकलीन फर्नांडीस ने 200 करोड़ के महाठगी मामले में अपनी याचिका वापस ली

राम मंदिर चंदा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया

सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के फंड जांच मामले में तत्काल सुनवाई से किया इनकार

अयोध्या राम मंदिर में वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून की तारीख दी

सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर दान विवाद की जल्द सुनवाई की मांग को किया खारिज

जैकलीन फर्नांडीज ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शीर्ष अदालत से याचिका वापस ले ली
ताज़ा ख़बरें
- नीरव मोदी को यूके कोर्ट ने 100 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत गारंटी का भुगतान करने का आदेश दिया
- भारत में समय पर आघात देखभाल का रास्ता साफ़ किया जा रहा है
- राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मांग ठुकराई
- दलबदल कानून ने भारतीय लोकतंत्र को कैसे नष्ट किया
- सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: 80 से अधिक स्थानों पर तलाशी और दो गिरफ्तारी
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यहां तक नहीं जाएगी जल्द सुनवाई
- राज्य पर त्राहिमाम, कानून व्यवस्था की धज्जियां: भूपेश बघेल
- सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकारी डॉक्टरों के लिए कट-ऑफ कम करनी होगी, क्योंकि वे जनता की सेवा कर रहे हैं

