2.06 अंक की कमी पर जयमिन पटेल की UPSC लड़ाई, हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक
जयमिन पटेल ने 2.06 अंकों से बची हुई उत्तर कुंजी को चुनौती दी, जिससे उनका मामला गुजरात हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने उन्हें अगले साल की मुख्य परीक्षा में बैठने की अंतरिम राहत दी, जबकि UPSC ने इस राहत का विरोध किया। यह केस यह सवाल उठाता है कि परीक्षा के बाद उत्तर कुंजी में त्रुटि से प्रभावित अभ्यर्थी के पास कौन‑से कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

सौजन्य से:- ThePrint Hindi
अहमदाबाद: जयमिन पटेल का UPSC सफर 2024 में खत्म हो जाना चाहिए था, जब वह भारतीय वन सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में 2.06 अंकों से रह गए थे. लेकिन इसके बजाय यह मामला गुजरात हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.
उनकी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी. तैयारी पूरी हो चुकी थी. यहां तक कि परीक्षा भी हो चुकी थी. लेकिन पटेल यह मानने को तैयार नहीं थे कि UPSC का उनका सपना एक ऐसे सवाल के साथ खत्म हो गया, जिसके जवाब को लेकर उनका मानना था कि आयोग से गलती हुई थी. करीब एक साल तक पटेल के मन में एक ही सवाल था: वह कौन सा सवाल था, जिसकी वजह से उनका परीक्षा परिणाम बदल गया?
जयमिन पटेल ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा, “मुझे पता था कि मामला सिर्फ एक सवाल का है. मैंने पूरा एक साल इस बात का पता लगाने के लिए इंतजार किया कि गलती UPSC की थी, मेरी नहीं. मेरे साथ बहुत अन्याय हुआ क्योंकि UPSC की गलती की वजह से मैं 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में असफल हुआ. मुझे 2025 में मौका मिला, लेकिन तब तक उस परीक्षा का चक्र भी खत्म हो चुका था.”
दशकों से UPSC की परीक्षा प्रक्रिया इस भरोसे पर टिकी रही है कि आयोग देश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में से एक को संस्थागत विश्वसनीयता के साथ कराता है. हाल के वर्षों में इस प्रक्रिया पर सवाल भी उठे हैं, खासकर पूजा खेडकर मामले के बाद.
लेकिन पटेल के मामले ने अदालत के सामने एक अलग सवाल रखा: जब परीक्षा के बाद UPSC की उत्तर कुंजी को चुनौती दी जाए और तब तक परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी हो, तो क्या होता है?
पटेल को आखिरकार अदालत से अगले साल की मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली. गुजरात हाई कोर्ट ने इसे अंतरिम राहत के तौर पर माना था. उनके मामले ने एक बड़ा सवाल भी उठाया: अगर किसी गलत या विवादित जवाब की वजह से किसी अभ्यर्थी का अगली परीक्षा में पहुंचने का मौका छिन जाए, तो उसके पास क्या कानूनी उपाय है?
पटेल का UPSC सफर 2016 में शुरू हुआ, जब उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. वर्षों के दौरान उन्होंने तीन बार मुख्य परीक्षा दी और दो बार इंटरव्यू में शामिल हुए. 2021 तक वह CSE के अपने सभी छह प्रयास पूरे कर चुके थे. हालांकि, 2018 में गुजरात लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिए चयन होने के बाद भी उन्होंने नौकरी करते हुए UPSC की तैयारी जारी रखी.
जयमिन पटेल ने कहा, “CSE के प्रयास पूरे होने के बाद मैंने वन सेवा की तैयारी शुरू की और 2023 में इंटरव्यू दिया. 2024 उम्र के हिसाब से मेरा आखिरी प्रयास था. मैंने अच्छी तैयारी की और परीक्षा दी, और मेरे आखिरी प्रयास में मेरी लड़ाई शुरू हुई.”
दिप्रिंट ने UPSC से इस मामले पर जवाब मांगा है. जवाब मिलने के बाद कॉपी अपडेट की जाएगी.
सही जवाब के लिए पटेल की लंबी लड़ाई
जुलाई 2025 में पटेल ने गांधीनगर में डिप्टी कलेक्टर के पद से छुट्टी ली और दिल्ली में रहने लगे. वह एक साथ दो काम कर रहे थे: अगली परीक्षा की तैयारी और अपने मामले पर वकीलों के साथ काम.
IAS और IPS अधिकारियों से लेकर वकीलों और शिक्षकों तक, हर किसी ने उन्हें सलाह दी कि वह इस मामले को छोड़ दें. लेकिन पटेल अपने नतीजे को किस्मत मानकर स्वीकार करने को तैयार नहीं थे. उन्होंने RTI दाखिल की, अपनी OMR शीट हासिल की और उस सवाल पर वापस गए, जिसने उन्हें महीनों तक परेशान रखा था. इसके बाद उन्होंने वह कदम उठाया, जिसके बारे में UPSC की प्रारंभिक परीक्षा में असफल होने के बाद शायद ही कोई अभ्यर्थी सोचता हो: उन्होंने आयोग को अदालत में चुनौती दी.
पटेल के लिए परीक्षा सुधार का सवाल तब आया, जब उनकी अपनी लड़ाई पहले ही शुरू हो चुकी थी. मामले की सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी उम्मीदवारी, मुख्य परीक्षा में शामिल होने और बाद में परीक्षा के दूसरे चरणों को लेकर कई बार अदालत का रुख करना पड़ा, जबकि UPSC ने कई चरणों में उन्हें राहत दिए जाने का विरोध किया.
UPSC की ओर से गुजरात हाई कोर्ट में आयोग का पक्ष रखने वाले वकील भाग्योदय मिश्रा ने कहा, “यह हमारे नियम और शर्तों के खिलाफ था. वह योग्यता के आधार पर परीक्षा पास नहीं कर पाए और UPSC को अदालत में घसीट लाए और एक प्रतिष्ठित आयोग की साख को नुकसान पहुंचाया. बहुत से लोग स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़कर UPSC पास करते हैं; लाखों लोग परीक्षा पास नहीं कर पाते और इसे स्वीकार कर आगे बढ़ जाते हैं. गलती उनकी थी और UPSC अब भी मानता है कि उसका जवाब गलत नहीं था.”
विवादित सवाल
जिस सवाल ने पटेल की UPSC यात्रा को बदल दिया, वह केंद्रीय बजट से जुड़ा था. इसमें अभ्यर्थियों के सामने दो कथन रखे गए थे:
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केंद्रीय वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री की ओर से, संसद के दोनों सदनों के सामने वार्षिक वित्तीय विवरण पेश करते हैं.
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केंद्र के स्तर पर, भारत के राष्ट्रपति की सिफारिश के अलावा अनुदान की कोई मांग नहीं की जा सकती.
अभ्यर्थियों को सही विकल्प चुनना था: (a) केवल 1, (b) केवल 2, (c) 1 और 2 दोनों, या (d) न तो 1, न ही 2.
पटेल ने विकल्प B यानी केवल 2 चुना था.
पटेल ने कहा, “मैंने जवाब B चुना था और अदालत ने भी कहा है कि UPSC का जवाब सही नहीं था.”
गुजरात हाई कोर्ट का फैसला संविधान में लिखे शब्दों पर आधारित था. संविधान के अनुच्छेद 112 और 113 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि वार्षिक वित्तीय विवरण प्रधानमंत्री की ओर से नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रपति की ओर से संसद के सामने रखा जाता है. इसलिए अदालत ने माना कि पहला कथन गलत था, जबकि दूसरा कथन सही था.
हिमांशु कुमार का मामला
अपनी पड़ताल के दौरान पटेल को सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हिमांशु कुमार के मामले के बारे में पता चला. यह 17 अभ्यर्थियों की ओर से दायर एक अलग याचिका थी, जिसमें आयोग की उस प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पूरी परीक्षा प्रक्रिया खत्म होने तक प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी जारी नहीं की जाती थी.
यह मामला और अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में हुई इसकी सुनवाई आखिरकार उस बदलाव की वजह बनी, जिसके तहत UPSC ने प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद अस्थायी उत्तर कुंजी जारी करना और उसे अंतिम रूप देने से पहले आपत्तियां मांगना शुरू किया. हालांकि, यह बदलाव पटेल की मदद के लिए बहुत देर से आया.
इसी मामले के जरिए पटेल की मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड राजीव कुमार दुबे से हुई.
पटेल ने कहा, “मैंने ऐसे मामलों के बारे में पढ़ा और मुझे सुप्रीम कोर्ट में हिमांशु कुमार का एक मामला मिला. मैं AOR राजीव दुबे जी से मिला और उन्होंने मुझे बताया कि गलत उत्तर कुंजी और अगली मुख्य परीक्षा में शामिल होने से जुड़ा मुद्दा सीधे एमिकस रिपोर्ट में जोड़ा गया है.”
पटेल ने शुरुआत में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपनी याचिका वापस लेने और अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट जाने की अनुमति दी. जब मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुंचा, तब पटेल सिर्फ UPSC से एक जवाब को सही करने की मांग नहीं कर रहे थे. वह मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मांग रहे थे.
इस मामले ने यह सवाल भी उठाया कि कोई अभ्यर्थी उत्तर कुंजी को कब चुनौती दे सकता है. UPSC ने 2024 की प्रारंभिक परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही जारी की थी. गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि तब तक मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी हो चुके थे. ऐसे में जिस अभ्यर्थी को लगता था कि किसी सवाल का जवाब गलत है, उसके पास व्यावहारिक रूप से बहुत कम कानूनी उपाय बचता था.
“इस अदालत के लिए,” न्यायमूर्ति निखिल एस. करियल ने लिखा, ऐसी व्यवस्था पटेल जैसे अभ्यर्थियों को “लगभग बिना किसी उपाय के” छोड़ सकती है. अदालत ने कहा कि इस स्थिति को केवल यह कहकर स्वीकार नहीं किया जा सकता कि परीक्षा प्रक्रिया पहले ही खत्म हो चुकी है, खासकर तब जब एक सवाल के गलत मूल्यांकन की वजह से प्रथम दृष्टया पटेल को मुख्य परीक्षा से बाहर होना पड़ा था.
पटेल ने कहा, “हम पूरी तरह स्पष्ट थे कि मैं UPSC के गलत जवाब की वजह से असफल हुआ और मुझे मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलना चाहिए था. लेकिन UPSC इसका विरोध करता रहा और कहता रहा कि परीक्षा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और अदालत को इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.”
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर UPSC को पटेल को 2025 की मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अगले निर्देश तक उनका परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखा जाए. साथ ही आयोग को जरूरी औपचारिकताएं जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया गया.
रोल नंबर के लिए लड़ाई
पटेल के लिए यह एक बड़ी राहत की तरह था. लेकिन अदालत के आदेश के बाद भी यह साफ नहीं था कि वह वास्तव में परीक्षा दे पाएंगे या नहीं.
पटेल ने तुरंत UPSC को पत्र लिखा. उन्होंने अदालत के आदेश की कॉपी साथ लगाई और अपना रोल नंबर जारी करने की मांग की. लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
पटेल ने कहा, “मैंने अपने ईमेल में अदालत के फैसले की कॉपी लगाई थी और UPSC से अपना रोल नंबर देने को कहा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. 30 अक्टूबर तक UPSC मुझे इंतजार करवाता रहा और 1 नवंबर को मैंने अपने ईमेल में चेयरमैन को भी शामिल कर लिया.”
इसके बाद 10 नवंबर को, मुख्य परीक्षा शुरू होने में एक हफ्ते से भी कम समय बचा था, तब उन्हें पता चला कि UPSC ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
पटेल ने याद करते हुए कहा, “परीक्षा में मुश्किल से एक हफ्ता बचा था.”
16 नवंबर से परीक्षा शुरू होनी थी. ऐसे में पटेल ने एक बार फिर गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया. इस बार उन्होंने अवमानना याचिका दायर की और आरोप लगाया कि UPSC ने अदालत के पहले के आदेश का पालन नहीं किया है.
अदालत ने दर्ज किया कि पटेल को परीक्षा से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने की अनुमति नहीं दी गई थी और न ही उन्हें रोल नंबर या परीक्षा केंद्र दिया गया था. अदालत ने UPSC को नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 14 नवंबर तक देना था. साथ ही आदेश की कॉपी ईमेल के जरिए भेजने की अनुमति दी.
UPSC की एक और दलील
पटेल ने कहा, “UPSC ने कहा कि अगर उन्होंने मुझे मुख्य परीक्षा में शामिल होने दिया, तो इससे दूसरे अभ्यर्थियों के लिए भी ऐसा करने का रास्ता खुल जाएगा.”
उन्होंने आगे कहा, “जब बाकी सभी अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब मैं एक और कानूनी लड़ाई के बीच में था. मुझे यह भी पता नहीं था कि मैं परीक्षा दे पाऊंगा या नहीं.”
इसके बाद UPSC ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. 14 नवंबर को, मुख्य परीक्षा से दो दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्देश परीक्षा के संचालन और उसकी विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं. लेकिन अदालत ने अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, क्योंकि हाई कोर्ट का आदेश 15 अक्टूबर को आया था और मुख्य परीक्षा बेहद करीब थी.
इस बीच, मुख्य परीक्षा में शामिल होने के बाद भी पटेल की अपनी लड़ाई जारी रही. IFS 2025 की मुख्य परीक्षा देने के बाद पटेल ने लिखित परीक्षा पास कर ली और इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति मांगी. हालांकि, UPSC ने उम्र सीमा का हवाला देते हुए उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया. गुजरात हाई कोर्ट ने UPSC की इस आपत्ति को खारिज कर दिया और पटेल को इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दे दी.
लेकिन जब बाद में परिणाम अदालत के सामने रखा गया, तो पटेल को पता चला कि चयन के लिए उनकी सिफारिश नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपनी लड़ाई जारी रखी. पटेल के मुताबिक, UPSC ने उन्हें अब तक उनकी अंतिम मार्कशीट भी नहीं दी है.
लड़ाई जारी है
31 वर्षीय सोमेश पांडे अब ऐसी ही एक लड़ाई लड़ रहे हैं. वह उन 63 अभ्यर्थियों में शामिल हैं, जिन्होंने 2026 की प्रारंभिक परीक्षा दी थी और अस्थायी GS और CSAT उत्तर कुंजी में 27 सवालों में कथित गलतियों को लेकर CAT का रुख किया है. यह जानकारी जागरण की एक रिपोर्ट में दी गई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी ऐसी ही चुनौतियों पर सुनवाई की है और याचिकाकर्ताओं को पहले मामले की सुनवाई के लिए CAT जाने का निर्देश दिया है.
पांडे और दूसरे अभ्यर्थियों के लिए पटेल का मामला एक संभावित रास्ता लेकर आया: एक अभ्यर्थी ने विवादित जवाब को अदालत में चुनौती दी थी और अंतरिम आदेश के जरिए उसे अगली मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला था. लेकिन पांडे का कहना है कि इसमें एक पेंच था — UPSC ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि विवादित सवाल का उसका जवाब गलत था.
पांडे ने दिप्रिंट से कहा, “यही एक और वजह है कि अब जब दूसरे छात्र पटेल के मामले को उदाहरण बनाकर आगे बढ़ रहे हैं, तो UPSC कह रहा है कि हमने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि हमारा जवाब गलत था. लेकिन उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली थी.”
पांडे ने कहा कि उन्होंने ऐसे दूसरे अभ्यर्थियों को खोजने की कई कोशिशें कीं, जो इसी समस्या का सामना कर चुके थे. उन्होंने एक समूह बनाया और एक कोचिंग संस्थान से संपर्क किया, ताकि ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की जा सके, जिनके अंक विवादित सवालों से प्रभावित हो सकते थे. लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें ज्यादातर यही सलाह मिली कि मामला छोड़ दें और अगले चरण की तैयारी पर ध्यान दें.
पांडे ने कहा, “फैकल्टी सदस्यों ने हमें वापस पढ़ाई करने की सलाह दी. यहां तक कि जिन छात्रों ने तीन या चार प्रयास किए थे, उन्होंने भी हमें इसे आगे न बढ़ाने को कहा, क्योंकि किसी ने इतने बड़े स्तर पर UPSC से लड़ाई नहीं लड़ी है. हर कोई डरा हुआ है, लेकिन इस बार हम पूरी तैयारी के साथ हैं और रुकेंगे नहीं.”
पांडे ने 2016 में अपनी तैयारी शुरू की थी. वह UPSC CSE के छह प्रयास कर चुके हैं और एक बार मुख्य परीक्षा भी दे चुके हैं. छत्तीसगढ़ के रहने वाले पांडे हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी हैं और उन्होंने रायपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. जब पांडे को जयमिन पटेल के मामले के बारे में पता चला, तो उन्होंने भी UPSC के खिलाफ मामला दायर करने का फैसला किया.
पांडे ने कहा, “मुझे एक वीडियो के जरिए उनकी लड़ाई के बारे में पता चला और इससे मुझे वास्तव में उम्मीद मिली. अगर वह मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते हैं, तो हमें भी मौका मिलना चाहिए, क्योंकि UPSC ने जवाब गलत दिए थे. हम अदालत में इसी के लिए लड़ने वाले हैं.”
नवंबर 2025 में जब वह मुख्य परीक्षा देने बैठे, तब तक पटेल की यह लड़ाई उनकी चार महीने की छुट्टी, दिल्ली में रहने और करीब 7 लाख रुपये के खर्च का हिस्सा बन चुकी थी. वह अपने दिन अदालत के आदेश और UPSC के नियम पढ़ने, वकीलों से मिलने और ऐसी परीक्षा की तैयारी करने में बिताते थे, जिसका उनके करियर में क्या स्थान होगा, यह फैसला अभी अदालत में होना बाकी था.
पटेल आखिरकार मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल हुए, लेकिन चयन के लिए उनकी सिफारिश नहीं की गई. हालांकि, UPSC के साथ उनकी लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई. अब वह मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में मिले अपने अंक और अपनी उत्तर पुस्तिकाएं हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि वह समझना चाहते हैं कि वह कहां पीछे रह गए.
उनका मामला अब दूसरे अभ्यर्थियों की कानूनी लड़ाइयों में भी सामने आने लगा है. संकल्प दीप सिंह ने मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मांगते हुए लखनऊ हाई कोर्ट के सामने पटेल के मामले का हवाला दिया और दलील दी कि उन्होंने जो जवाब चुना था, वह सही था. हालांकि, UPSC ने अदालत से कहा कि उसने 2024 की प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी में कोई बदलाव नहीं किया है.
सोमेश पांडे, पटेल और संकल्प जैसे अभ्यर्थियों के लिए लक्ष्य सिर्फ परीक्षा पास करना था. अब उनमें से कुछ परीक्षा आयोजित करने के तरीके में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं.
पांडे ने कहा, “हर किसी ने मुझे UPSC के खिलाफ लड़ाई न लड़ने को कहा. यह बहुत बड़ा है और लोगों ने कहा कि वह अपनी गलतियां कभी स्वीकार नहीं करेगा. लेकिन इससे पता चलता है कि ताकतवर पदों पर बैठे लोग किस तरह सब कुछ नियंत्रित कर सकते हैं. मैं उन्हें कड़ी चुनौती दूंगा. अगर मुझे अकेले लड़ना पड़े, अगर मुझे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े, तब भी मैं अंत तक लड़ूंगा. मैं चाहता हूं कि UPSC यह समझे कि वह इस तरह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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