होम›कानून›नवीन पटनायक ने बीजद को फिर से सशक्त करने की राह पर: खनन, किसान‑महिला मुद्दों से भाजपा को चुनौती
कानून

नवीन पटनायक ने बीजद को फिर से सशक्त करने की राह पर: खनन, किसान‑महिला मुद्दों से भाजपा को चुनौती

२४ साल बाद सत्ता से बाहर रहने के बाद, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आक्रामक विरोधी रुख अपनाया है और केंद्र के खनन‑क़ानून, किसान‑महिला समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने बीजद को जमीन पर उतारने के लिये बड़े प्रदर्शन, बीजद उम्मीदवारों के साथ बैठकें और ‘नारी अधिकार अभियान’ जैसी पहलों को शुरू किया है।

30 सितंबर 2026 को 02:04 pm बजे
नवीन पटनायक ने बीजद को फिर से सशक्त करने की राह पर: खनन, किसान‑महिला मुद्दों से भाजपा को चुनौती

सौजन्य से:- Jagran

BJD का कमबैक प्लान: खनन कानून, किसान और महिला मुद्दों पर BJP सरकार को चुनौती देंगे नवीन पटनायक

24 साल बाद ओडिशा में सत्ता गंवाने के बाद नवीन पटनायक अब बीजद को फिर से मजबूत करने की रणनीति ...और पढ़ें

HighLights

- नवीन पटनायक अब आक्रामक विपक्षी नेता की भूमिका में।

- खनन कानून, किसान, महिला मुद्दों पर भाजपा सरकार को चुनौती।

- बीजद संगठन को फिर से मजबूत करने की कवायद जारी।

प्रदीप सिंह, जमशेदपुर/भुवनेश्वर। 24 साल तक ओडिशा की सत्ता संभालने के बाद 2024 में सरकार गंवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक अब अपनी राजनीति का नया अध्याय लिख रहे हैं।

मुख्यमंत्री की कुर्सी से विपक्ष के नेता की भूमिका में आए नवीन बाबू ने शुरुआती दौर की अपेक्षाकृत संयमित सक्रियता के बाद अब सरकार के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया है।

सड़क से विधानसभा तक उनकी सक्रियता और संगठन को फिर जमीन पर उतारने की कवायद के केंद्र में एक ही लक्ष्य नजर आता है और वह है बीजद को फिर से मजबूत राजनीतिक ताकत बनाना।

उनकी इस रणनीति में सबसे धारदार मुद्दा ओडिशा के खनिज संसाधनों पर अधिकार बनकर उभरा है। केंद्र के खनन कानून में संशोधन के खिलाफ उन्होंने सीधे राज्य के अधिकार और आर्थिक हित का सवाल उठाया है।

भुवनेश्वर में बीजद के बड़े प्रदर्शन में खुद शामिल होकर उन्होंने कहा कि लड़ाई केवल बीजद की नहीं, बल्कि ओडिशा के लोगों के अधिकारों की है। उन्होंने राज्य के भाजपा सांसदों और सरकार से भी सवाल किए।

‘ओडिशा पहले’ की पुरानी राजनीति को नया तेवर

दरअसल, क्षेत्रीय अस्मिता नवीन पटनायक की राजनीति का पुराना आधार रही है। लेकिन 2024 के चुनाव में भाजपा के सत्ता में आने के बाद उन्होंने इसी मुद्दे को विपक्ष की राजनीति के नए औजार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है।

अगस्त में वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने खनिज कानून को ओडिशा के आर्थिक हित से जोड़ते हुए कहा कि राज्य को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

इसके बाद विशेष विधानसभा सत्र और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। बीजद ने इस मुद्दे को विधानसभा से बाहर भी आंदोलन का रूप दिया।

पार्टी ने आर्थिक नाकेबंदी तक की चेतावनी दी। हालांकि भाजपा ने इन दावों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि खनन क्षेत्र से राज्य का राजस्व बढ़ा है और संशोधन से खनिज राजस्व पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

संगठन को फिर जमीन पर उतारने की कवायद

नवीन बाबू की रणनीति केवल सरकार विरोध तक सीमित नहीं है। जून में उन्होंने 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हारने वाले बीजद उम्मीदवारों के साथ बैठकें की।

नेताओं से सीधे फीडबैक लिया और पंचायत व निकाय चुनावों की तैयारी तथा बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर दिया। पार्टी ने महिलाओं, किसानों, आदिवासियों और दलितों तक पहुंच बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा की।

महिलाओं को फिर पार्टी के प्रमुख सामाजिक आधार के रूप में सक्रिय करने के लिए ‘नारी अधिकार अभियान’ चलाया गया। वे अब विपक्ष की राजनीति को एक-दो मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय सरकार के कामकाज के कई मोर्चों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा सत्र के लिए बीजद ने खनन कानून के अलावा किसानों की समस्याओं, पाठ्यपुस्तकों की गलतियों, कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, महंगाई, वित्तीय प्रबंधन और बजट खर्च जैसे मुद्दे तय किए।

शांत प्रशासक से सड़क पर उतरे विपक्षी नेता

नवीन पटनायक की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक उनकी पहचान अपेक्षाकृत शांत, प्रशासन केंद्रित नेता की रही।

अब वे खुद धरना-प्रदर्शन में उतर रहे हैं, सरकार को सीधे चुनौती दे रहे हैं और कार्यकर्ताओं से सड़क पर संघर्ष करने का आह्वान कर रहे हैं।

हालिया प्रदर्शन में उनका यह तेवर खास तौर पर दिखाई दिया, जब उन्होंने ओडिशा के अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक लड़ने की बात कही।

2024 की हार के बाद बीजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और भाजपा के बढ़े प्रभाव के बीच अपना राजनीतिक आधार बचाना है।

देखना यह होगा कि उनकी यह आक्रामक विपक्षी राजनीति बीजद को संगठनात्मक रूप से कितना पुनर्जीवित करती है और ओडिशा की राजनीति में पार्टी अपनी पुरानी जगह किस हद तक फिर बना पाती है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →

ताज़ा ख़बरें