कोरबा के सामूहिक दुष्कर्म में दो आरोपियों को 20 साल की कठोर सजा
कोरबा के जिला एवं सत्र न्यायालय ने 19 जुलाई 2025 की रात घर में प्रवेश कर सामूहिक दुष्कर्म करने वाले दो आरोपी को प्रत्येक 20 साल की कठोर सजा सुनाई। पीड़िता ने प्रारंभ में डर के कारण बयान नहीं दिया, पर डीएनए रिपोर्ट ने अपराध सिद्ध किया और अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराधों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सामूहिक दुष्कर्म मामले में फैसला, अदालत ने आरोपियों को दी 20-20 साल की सजा
कोरबा में महिला के साथ सामूहिक अनाचार करने वाले आरोपियों को 20-20 साल की कठोर सजा मिली है.
By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 30, 2026 at 7:12 PM IST
कोरबा : जिला एवं सत्र न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को 20-20 साल की कठोर सजा दी है. कोरबा के अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) कोरबा, सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत ने यह फैसला सुनाया है
क्या था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार मुताबिक 19 जुलाई 2025 की रात पीड़िता घर में अकेली सो रही थी.तभी दोनों आरोपी शराब के नशे में उसके घर पहुंचे. दोनों ने पीड़िता को दरवाजा खोलने के लिए कहा.लेकिन जब पीड़िता ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने दरवाजा तोड़ा और घर में घुसकर सामूहिक अनाचार किया.अनाचार के बाद दोनों ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी.साथ ही साथ घटना के बारे में किसी को भी जानकारी देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी.
दो दिन बाद गिरफ्तार हुए आरोपी
रात का समय होने और घर में अकेले होने के कारण पीड़िता ने तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, लेकिन अगली सुबह उसने गांव के सरपंच, कोटवार और अपने परिजनों को पूरी आपबीती बताई. इसके बाद थाना लेमरू में अपराध दर्ज किया गया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पीड़िता के साथ आरोपियों का मेडिकल परीक्षण करवाकर गया. डीएनए सैंपल राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया.अदालत में विचारण के बाद, पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर यह मामला साबित हुआ.
डीएनए सबसे बड़ा सुराग बना
मामले की पैरवी करने वाले अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने बताया आरोपियों ने पीड़िता के घर रात में जबरदस्ती घुसकर उसके साथ सामूहिक अनाचार किया. फिर उसे जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए थे. पीड़ित ने घटना की शिकायत थाना लेमरू में कई थी.
प्रकरण के नाटकीय घटनाक्रम में पीड़िता ने न्यायालय में घटना से इनकार किया था. लेकिन डीएनए रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर जब दोबारा पीड़िता को न्यायालय में बुलाया गया, तब पीड़िता ने बात स्वीकार की और बताया कि उसे पहले डराया गया था. इसलिए उसने पूर्व बयान में कुछ नही बताया था. न्यायालय ने साफ संदेश है कि जघन्य अपराधों को नजरअंदाज नही किया जा सकता- मोहन सोनी, अतिरिक्त लोक अभियोजक
अदालत दोषसिद्ध होने पर सुनाया फैसला
अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) कोरबा ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के तहत दोषियों को दंडित किया है.अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी. आरोपी 21 जुलाई 2025 से ही लगातार न्यायिक हिरासत में निरुद्ध रहे हैं, जिसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 468 के तहत समायोजित किया जाएगा.
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