सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ जवान के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या का मामला रद किया
सुप्रीम कोर्ट ने बीएसएफ के एक जवान के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या के मामले में अदालती कार्यवाही रद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध की जांच के दौरान कर्मचारी को आधिकारिक ड्यूटी पर होने का प्रमाण पत्र मिला था, जिससे उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं था।

सौजन्य से:- Jagran
'बीएसएफ जवान के खिलाफ दर्ज दहेज हत्या का मामला शीर्ष अदालत ने किया रद', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीएसएफ के एक कर्मचारी के खिलाफ दहेज हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद कर दी। कोर्ट ने कहा ...और पढ़ें
HighLights
- बीएसएफ कमांडेंट के प्रमाण पत्र में घटना के दौरान मेरठ से बाहर ड्यूटी पर होने की पुष्टि
- माता-पिता पहले ही बरी, कमरे और दरवाजे की स्थिति पर भी अभियोजन से मांगा जवाब
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीएसएफ के एक कर्मचारी के खिलाफ दहेज हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद कर दी।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए उसके खिलाफ कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
जस्टिस संजय करोल और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिसंबर 2025 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार किया गया था।
मामला वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में दर्ज हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उस प्रमाण पत्र पर गौर किया, जिसे बीएसएफ बटालियन के कमांडेंट ने जारी किया था। इसमें कहा गया था कि घटना से संबंधित अवधि में अपीलकर्ता आधिकारिक ड्यूटी पर था और मेरठ से बाहर सरकारी कार्य के लिए तैनात था।
पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले में आरोपित बनाए गए कर्मचारी के माता-पिता को ट्रायल कोर्ट पहले ही मुकदमे की सुनवाई के बाद बरी कर चुका था।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर सका कि यदि मृतका की हत्या आरोपितों ने की थी तो वह कमरा और मुख्य दरवाजा अंदर से बंद क्यों था। इन परिस्थितियों को देखते हुए पीठ ने माना कि कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।
कर्मचारी की शादी अप्रैल 2014 में हुई थी। जून 2016 में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि उसने और उसके परिवार के सदस्यों ने दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
खबरें और भी
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी (दहेज हत्या) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि एफआईआर या आपराधिक कार्यवाही रद करने की शक्ति का इस्तेमाल सीमित मामलों में और बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। इस मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने मेरठ की अदालत में कर्मचारी के खिलाफ चल रही सभी कार्यवाहियां समाप्त कर दीं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: टीएमसी को बैंक खाते की राहत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से सुशील कुमार को दिया बड़ा झटका

महाराष्ट्र में प्रथम एंटी कनवर्जन केस: यूपी का युवक नाबालिग लड़की से धर्म बदलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार

पुणे में धर्म परिवर्तन का मामला: युवक ने नाबालिग लड़की को धोखा देने की कोशिश की

सुप्रीम कोर्ट का हरियाणा सरकार को निर्देश: कैदियों की समय पूर्व रिहाई नीतियों का दें ब्योरा

अदालत ने विवेचक को तलब किया, पेंशन खाते पर रोक हटाने के मामले में पूछताछ

आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर बर्खास्तगी हर मामले में नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने लगाए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अपराधों पर दी सख्त नसी, केंद्र को निर्देश दिया जरूरी कदम उठाने के
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, TMC को बैंक खाता सीज मामले में अंतरिम राहत से इनकार
- सुशील कुमार को बड़ा झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करने का फैसला
- गुजरात उच्च न्यायालय का एक और फैसला, घर पर ताश खेलना नहीं जुए के दायरे में
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC को भी नहीं दी कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर दखल, फ्रीज बैंक खाते बरकरार
- लेबनान ने मौत की सजा समाप्त कर दी, पहला अरब देश बन गया
- भारत में न्याय की कुर्सी पर बैठने वाली पहली महिला न्यायाधीश की विस्मयकारी कहानी
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुशील कुमार को जमानत देने से इनकार किया
- नियुक्तियों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए ट्रिब्यूनल सुधार

