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सुप्रीम कोर्ट में दिनभर का संशय: याचिकाकर्ता ने जज को दिया आदेश, मचा बवाल

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने जज को आदेश देने की कोशिश की और बदतमीजी की, जिसके बाद उसे पुलिस हिरासत में ले लिया गया। मामले में विभिन्न एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।

10 जुलाई 2026 को 04:57 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में दिनभर का संशय: याचिकाकर्ता ने जज को दिया आदेश, मचा बवाल

सौजन्य से:- Jagran

'मैं आदेश देता हूं', सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने जज को ही दे दिया ऑर्डर; कोर्टरूम में की बदतमीजी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने न्यायाधीशों से बदतमीजी की और दस्तावेज फेंके, जिसके बाद उसे जबरन कोर्टरूम से बाहर निकाला गया। ...और पढ़ें

HighLights

- याचिकाकर्ता ने न्यायाधीशों से बदतमीजी की, अपशब्द कहे।

- दस्तावेज फेंकने पर उसे कोर्टरूम से बाहर निकाला गया।

- पुलिस हिरासत में, विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं पूछताछ।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में खुद अपना केस लड़ रहे याचिकाकर्ता को सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों से बदतमीजी करने, अपशब्द कहने और दस्तावेज फेंकने के बाद जबरदस्ती कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की हालत पर विचार करते हुए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई के आदेश नहीं दिये लेकिन देर शाम तक पुलिस उससे पूछताछ करती रही।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अभूतपूर्व स्थिति उस वक्त उत्पन्न हो गई जब एक याचिकाकर्ता ने स्वयं का नाम प्रबल प्रताप बताते हुए अपने केस पर स्वयं बहस करनी शुरू की। याचिकाकर्ता काला कोट पहने हुए था लेकिन वकील का बैंड नहीं लगाए था।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के जज को दिया ऑर्डर

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस की शुरुआत करते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि माई ज्युडिशियल सर्वेन्ट, मैं तुम्हें आदेश देता हूं कि तुम लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दो।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ कर रही थी। पीठ की अगुवाई कर रहे जस्टिस विश्वनाथन ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि तुम मुझे आदेश दे रहे हो। जस्टिस विश्वनाथन ने फिर कहा तुम हमें आदेश दे रहे हो।

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याचिकाकर्ता ने कहा कि बस इतना ही हमारी तरफ से था बाकी सब रिकॉर्ड पर है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने न्यायाधीश के लिए अपशब्द कहते हुए फाइल और दस्तावेज बेंच की तरफ हवा में उछाल दिये।

याचिकाकर्ता के पीछे खड़े सुरक्षाकर्मी ने बीच में दखल देते हुए उसे पकड़ लिया। उसे काबू किया और कोर्ट से बाहर निकाल दिया। जिससे कोर्ट की कार्रवाई आगे जारी रही।

इस मामले में प्रबल प्रताप के अलावा एक और व्यक्ति याचिकाकर्ता था और याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के छह अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

बदतमीजी करने के बाद भी नहीं हुआ केस दर्ज

सुप्रीम कोर्ट में हुई आज की सुनवाई के बाद जारी कोर्ट आदेश में कहा गया है याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप दोनों याचिकाकर्ताओं की ओर से स्वयं बहस के लिए पेश हुआ था। उसने मामले को पेश करने के बजाए अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

हालांकि याचिकाकर्ता की हालत देखते हुए कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की है। आदेश में कोर्ट ने याचिका की मेरिट पर कहा कि उन्होंने रिकॉर्ड और केस देखा और उन्हें हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई उचित आधार नहीं मिला। इसके साथ ही कोर्ट ने उसकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।

हालांकि पुलिस ने कोर्ट से बदतमीजी करने वाले प्रबल प्रताप को देर शाम तक थाने में रखा और पूछताछ जारी थी। एडीशनल डीसीपी नई दिल्ली जिला के आनंद कुमार मिश्रा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले व्यक्ति को हिरासत में लेकर तिलकमार्ग थाने लाकर सामूहिक पूछताछ की जा रही है।

आइबी, स्पेशल सेल, स्पेशल ब्रांच और जिला पुलिस के अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं। विभिन्न एजेंसियां उसके इस तरह की हरकत करने के बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किसी साजिश के तहत तो ऐसा नहीं किया। साजिश में कोई और लोग तो शामिल नहीं हैं।

पूछताछ में जिस तरह की बात सामने आएगी उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। अभी उसके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया गया है।

यह भी पढ़ें- 'मासूम बच्ची की यौन उत्पीड़न की शिकायत पर चुप्पी साधना होगा अपराध', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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