सुप्रीम कोर्ट में हुआ बवाल, याचिकाकर्ता ने कहा 'मैं आपको आदेश देता हूं'
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एक याचिकाकर्ता ने हंगामा मचाने के बाद अदालत से बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में जजों को ही आदेश देने की कोशिश की गई।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिकाकर्ता आपे से बाहर हो गया और अपने ही केस की सुनवाई के दौरान अदालत में पेपर उछालने लगा। उसने सीजेआई के लिए गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया और जजों को ही आदेश देने लगा।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को बहुत ही अप्रिय स्थिति पैदा हो गई। एक याचिकाकर्ता ने अपनी अपील पर सुनवाई के दौरान न सिर्फ अदालत में कागज फेंका, बल्कि भारत के चीफ जस्टिस (CJI) के लिए अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया। उसने याचिका पेश करने के दौरान जजों को ही आदेश देना शुरू कर दिया। हालात, इतने अजीब हो गए कि सुप्रीम कोर्ट की सिक्योरिटी को उसे वहां से जबरन बाहर ले जाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच में प्रबल प्रताप नाम के याचिकाकर्ता की अपील पर सुनवाई हो रही थी, उसने कोर्टरूम के अंदर पेपर फेंकना शुरू कर दिया। लाइवलॉ और बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार वह खुद ही अपनी केस के लिए पेश हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट से कहा- मैं आपको आदेश देता हूं
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच से अप्रत्याशित रूप से कहा, 'मिस्टर जुडिशल सर्वेंट, मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के एसीपी, विकासनगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश करें।'
आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?
जस्टिस केवी विश्वनाथन, सुप्रीम कोर्ट के जज
भारत के चीफ जस्टिस के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल
इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा, 'मेरी तरफ से बस इतना ही। सबकुछ रिकॉर्ड पर है।'
फिर बिना किसी उकसावे के उसने कोर्टरूम में पेपर फेंकना शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं उसने भरी अदालत में भारत के चीफ जस्टिस के खिलाफ अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया।
इसके तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट की सिक्योरिटी ने उसे पकड़ लिया और वहां से बाहर लेकर चली गई।
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही नहीं की
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बेंच पूरी तरह से शांत रही और आगे के मामलों पर सुनवाई शुरू कर दी गई।
अदालत की कार्यवाही में इस तरह की हरकत के बावजूद बेंच ने किसी तरह की अवमानना की कार्यवाही नहीं शुरू की और न ही याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज की
जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, 'हम उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की सिफारिश नहीं करते। जहां तक केस की मेरिट का सवाल है, हमने रिकॉर्ड देखा और हमनें रद्द करने वाले आदेश में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं पाया। स्पेशल लीव पिटीशन खारिज किया जाता है।'
वो बहुत ही परेशान हैं..यह पूरा फ्रस्ट्रेशन है। हमें उनके लिए सिर्फ सहानुभूति है।
सुप्रीम कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
दरअसल, उसकी रिट याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट से खारिज हो गई थी और उसी के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत अपनी याचिका को निजी शिकायत में बदले जाने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
पहले भी हुई सुप्रीम कोर्ट में अप्रिय घटना
6 अक्टूबर, 2025 को इसी तरह की एक घटना सुप्रीम कोर्ट में हुई थी।
लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने'कोख में कत्ल' प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर 'मुर्दा, मवेशी, माफिया' प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।... और पढ़ें
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