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सुप्रीम कोर्ट में वकील की हरकत: पहले जज पर कागज फेंके, फिर CJI को गाली देकर कोर्ट से निकाला!

एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में गाली-गलौज की और जजों पर कागज फेंके, जिसके बाद उसे कोर्ट के बाहर धकेल दिया गया। वकील ने अपनी बात रखने के लिए जजों को आदेश देना शुरू किया था, जिससे कोर्ट में हड़कंप मच गया। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक अजीब हादसा हुआ, जब एक वकील ने जजों पर कागज फेंके और CJI को गाली दी, जिसके बाद उसे कोर्ट से बाहर निकाला गया।

10 जुलाई 2026 को 02:58 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में वकील की हरकत: पहले जज पर कागज फेंके, फिर CJI को गाली देकर कोर्ट से निकाला!

सौजन्य से:- Hindustan

बीच सुनवाई पहले जज पर फेंके कागज, फिर गाली देते बोला- इसे दे देना CJI को: सुप्रीम कोर्ट में वकील की शर्मनाक हरकत

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक अजीब घटना हुई। इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर गाली-गलौज की और जजों पर कागज फेंके, जिसके बाद उसे ज़बरदस्ती बाहर निकाल दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में आज (शुक्रवार, 10 जुलाई को) तब अजीबोगरीब हालात पैदा हो गए, जब एक याचिकाकर्ता ने आक्रामक तरीके से अपनी बात रखते हुए माननीय जजों को ही आदे्श देना शुरू कर दिया और कागजात पीठ की ओर उछाल कर फेंक दिए। अपने मामले की खुद पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में जज को गालियां भी दी। पिटीशनर की इस हरकत से कोर्ट भड़क गया और उसे कोर्ट रूम से निकालने का आदेश दे दिया। यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को कोर्ट रूम में हुई इस हरकत से खफा दो जजों की पीठ ने उस पिटीशनर को सुप्रीम कोर्ट से ज़बरदस्ती निकालने का आदेश दिया। दरअसल, याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। जब उसके मामले की सुनवाई होने लगी तो उसने पीठ को आदेश देना शुरू कर दिया। यह देखकर कोर्ट दंग रह गया। कोर्ट रूम का माहौल तब और ड्रामैटिक हो गया जब पिटीशनर बहुत आक्रामक होकर अपनी बातें रखने लगा।

पिटीशनर के बर्ताव से कोर्ट हैरान

जैसे ही सुवनवाई शुरू हुई, केस करने वाले ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा, "मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट। मैं आपको ACP लखनऊ के खिलाफ FIR दर्ज करने का ऑर्डर देने का ऑर्डर देता हूं।" उसके इस बर्ताव से कोर्ट हैरान रह गया। इसके बाद जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा, "आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं? आप हमें ऑर्डर दे रहे हैं?" इसके जवाब में केस करने वाले शख्स ने कहा, "मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड में है।" इसके बाद उस शख्स ने पीठ की तरफ केस फाइल हवा में उछाल दिया और खुली कोर्ट में CJI को गालियां देनी शुरू कर दी और पेपर फेंकते हुए कहा कि इसे CJI को दे देना। इतना देखते ही सिक्योरिटी स्टाफ तुरंत हरकत में आया और उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।

EX CJI गवई के साथ हुई घटना की आई याद

आज की घटना उस घटना के कुछ महीनों बाद हुई है, जब तत्कालीन CJI बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच पर वकील राकेश किशोर ने कथित तौर पर कोई चीज फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि तत्कालीन CJI गवई ने शुरू में तय किया था कि वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन बाद में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने किशोर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मंज़ूरी दे दी। उन्होंने कहा कि उनका व्यवहार 'कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट्स एक्ट, 1971' के तहत आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है और इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और अधिकार को कम करना था।

बाद की सुनवाई के दौरान, तत्कालीन CJI गवई ने कहा था कि वह और उनके साथी जज इस घटना से "बहुत हैरान" थे, लेकिन तब से उन्होंने इसे "एक भूला-बिसरा अध्याय" मान लिया है लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वकील के व्यवहार को पूरी तरह से अक्षम्य बताया और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की संस्थागत अखंडता की रक्षा की जानी चाहिए।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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