वकील की अभद्रता: वायरल वीडियो में सुप्रीम कोर्ट में जजों से गालीगलौच
एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में वकील की अभद्रता की घटना का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह जजों से गालीगलौच करते दिख रहे हैं, सीजेआई के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं और कोर्ट अधिकारियों के साथ बदसलूकी करते हैं।

सौजन्य से:- ABP News
'ये दे देना CJI को', सुप्रीम कोर्ट में वकील की अभद्रता, जजों के सामने दी गाली, Video वायरल
वायरल वीडियो में वकील कह रहा है कि मिस्टर न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी विकास नगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें.
भारत की सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक वकील ने सारी हदें पार कर दीं. इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है. वीडियो में वकील देश के चीफ जस्टिस के खिलाफ अपशब्द बोलते हुए, कागज उछालता हुआ दिखा. साथ ही कहा कि लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का हुक्म दे रहा हूं. इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम ने सभी को हैरत में डाल दिया है.
याचिकाकर्ता की पहचान प्रबल प्रताप के तौर पर हुई है. इसने जस्टिस केवी विश्वनाथ और जस्टिस आलोक अराधे की दो जजों वाले बेंच को न्यायिक सेवक यानी ज्यूडिशियल सर्वेंट कहा. साथ ही कि वह संप्रभु है. वकील इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की याचिका को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस कर रहा था.
वायरल वीडियो में वकील कह रहा है कि मिस्टर न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी विकास नगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें.
सीजेआई को कहे अपशब्द, जजों से कहा- I am Soverign
इस पर जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि आप हमें आदेश दे रहे हैं. उसने इस पर जवाब दिया कि मैं संप्रभु हूं. माहौल यहीं नहीं थमा, उसने कोर्ट रूम में केस से जुड़े कागज हवा में उछाल दिए. कोर्ट के साथ बदसलूकी की. इस दौरान जब कोर्ट अधिकारी उसे बाहर ले जा रहे थे, तो उसने अपशब्दों का इस्तेमाल किया. साथ ही कहा कि यह सीजेआई को दे देना.
कोर्ट ने सुनाया आदेश, कहा- याचिकाकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे
इस पूरे नाटक के बाद भी कोर्ट ने आदेश सुनाया. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले के तथ्यों पर गौर किया और आदेश पारित किया. जज की तरफ से साफ कहा गया कि वे याचिकाकर्ता के अपमानजनक व्यवहार पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे. बेंच ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए हम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का प्रस्ताव नहीं रखते हैं. इसलिए स्पेशल लीव पिटीशनत याचिका खारिज की जाती है. खुद पेश होने और बहस करने की अनुमति और याचिका दायर करने की अनुमति के लिए लंबित सभी आवेदन भी निपटाए हुए मानें जाएंगे. इससे पहले भी कोर्ट में कार्यवाही के दौरान वकील की तरफ से सीजेआई पर जूता फेंकने की कोशिश की गई थी.
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