AI से बने फर्जी केस लॉ पर आधारित NCLT और NCLAT के आदेश रद्द
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने AI से बने फर्जी केस लॉ पर आधारित NCLT और NCLAT के आदेशों को रद्द किया, AI का सही उपयोग बताया

भारतीय न्यायपालिका में AI के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनमें अस्तित्वहीन (फर्जी) AI-जनित न्यायिक मिसालों (Case Citations) का सहारा लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी न्यायिक आदेश की विश्वसनीयता वास्तविक कानून, प्रमाणित न्यायिक निर्णयों और सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। यदि किसी मामले में ऐसे केस लॉ का उल्लेख किया जाता है जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं, तो यह न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालयों और अधिवक्ताओं द्वारा AI का उपयोग केवल सहायक उपकरण (Assistive Tool) के रूप में किया जा सकता है। AI से प्राप्त किसी भी कानूनी जानकारी या न्यायिक मिसाल को बिना स्वतंत्र सत्यापन के अदालत में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि AI द्वारा उत्पन्न काल्पनिक (Hallucinated) संदर्भों पर निर्भरता न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
X के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने AI के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों को रद्द किया।
इसका मतलब क्या है
यदि AI द्वारा उत्पन्न काल्पनिक संदर्भों पर निर्भरता होती है, तो यह न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका में AI के जिम्मेदार उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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