सुप्रीम कोर्ट ने तय किया: जमीन का स्टैम्प ड्यूटी वास्तविक उपयोग पर निर्भर
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कहा गया कि स्टैम्प ड्यूटी की गणना जमीन के वास्तविक उपयोग से तय होगी, न कि केवल मास्टर प्लान वर्गीकरण से। इस मामले में, जहाँ फैक्ट्री चलती थी और तैयार माल भी बेचे जा रहे थे, कोर्ट ने यह माना कि यह ‘इंडस्ट्रियल’ उपयोग ही रहे। इसके अनुसार, सरकारी सर्कुलर और निरीक्षण रिपोर्टों को ध्यान में रखकर ही वर्गीकरण किया जाएगा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Harinder Singh Sodhi v. State of Rajasthan & Ors. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस सवाल का जवाब संबंधित सरकारी नियम, सर्कुलर में तय कसौटी और जमीन के वास्तविक उपयोग से निकलेगा, केवल Master Plan classification से नहीं।
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सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या था मुख्य कानूनी सवाल?
मामला राजस्थान स्टाम्प एक्ट, 1998 के तहत स्टाम्प ड्यूटी की गणना से जुड़ा था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार Harinder Singh Sodhi v. State of Rajasthan & Ors. के केस में जिस संपत्ति पर विवाद था, वह एक गिफ्ट डीड के जरिए हस्तांतरित की गई थी और दस्तावेज में उसे आवासीय भूमि के रूप में दर्ज किया गया था। विवाद यह था कि स्टाम्प ड्यूटी की वैल्यूएशन के लिए संपत्ति को औद्योगिक माना जाए या व्यावसायिक। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 के आदेश में इसी सवाल पर विचार किया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन शामिल थे।PM मोदी के आवास के पास झुग्गियां, सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया 6 हफ्ते में हटाने का आदेश, जानें मामला
Commercial और Industrial का विवाद क्यों?
दरअसल इस भूमि का जब सब रजिस्ट्रार ने ने संपत्ति का निरीक्षण किया था तब वहां 'Sodhi Carpets' के नाम से शो रुम चल रहा था। इसी आधार पर संपत्ति को कमर्शियल उपयोग वाली संपत्ति माना गया और स्टाम्प वैल्यूएशन बढ़ाने की कार्रवाई की गई। लेकिन बाद में कलेक्टर ने भी संपत्ति का मुआय़ना किया और वहां एक फैक्टरी संचालित होते हुए पाई और इसे इंडस्ट्रियल कैटेगरी में रखा। मामले में राजस्थान टैक्स बोर्ड ने दोनों निरीक्षण रिपोर्ट और राज्य सरकार के संबंधित सर्कुलर पर विचार करने के बाद कलेक्टर के निष्कर्ष को बरकरार रखा।बड़ी कंपनियों के पैकेज फूड सामग्री में ज्यादा चीनी, ज्यादा नमक? लगेगा चेतावनी का लेबल, सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को 2 हफ्ते का अल्टीमेटम
राजस्थान हाईकोर्ट ने कमर्शियल प्रॉपर्टी माना, क्यों
मामला जब राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा तो हाई कोर्ट ने राजस्थान टैक्स बोर्ड के फैसले को पलट दिया था। हाई कोर्ट ने इंडस्ट्रियल की पहचान के लिए दो कसौटियां मानीं—पहली, संपत्ति इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित हो और दूसरी, वहां केवल मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां हो तथा कोई अन्य गतिविधि न हो। चूंकि संबंधित परिसर में उत्पादों की बिक्री भी हो रही थी, हाईकोर्ट ने इसे कमर्शियल प्रॉपर्टी माना।सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बंद कमरे में जातिसूचक गाली देने पर SC/ST कानून लागू नहीं, जानिए ‘Public View’ की कानूनी शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने समझाया स्टांप ड्यूटी का गणित
- राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर हुई। याचिका में कहा गया कि जमीन इंडस्ट्रियल प्रयोग में है। इसे फैक्ट्रीज़ एक्ट, 1948 के तहत फैक्ट्री के तौर पर और डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज़ सेंटर, जयपुर के साथ इंडस्ट्री के तौर ही पर नामांकन किया गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी परिसर में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है तो तैयार माल की बिक्री होना स्वाभाविक है। केवल इसलिए कि वहां तैयार उत्पाद बेचे भी जा रहे हैं, उस संपत्ति को इंडस्ट्रियल से कमर्शियल यूज में बदल नहीं दिया जा सकता।
- कोर्ट ने विशेष रूप से माना कि उत्पादों की रिटेल सेल भी अपने आप में ऐसी गतिविधि नहीं है जिससे पूरी संपत्ति को कमर्शियल यूज वाली संपत्ति माना जाए, जबकि मूल गतिविधि इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग है।
- कोर्ट ने इस मामले में यह तथ्य भी खास माना कि परिसर Factories Act, 1948 के तहत फैक्टरी के रूप में ही रजिस्टर्ड था और District Industries Centre, Jaipur के साथ उद्योग के रूप में भी पंजीकृत था।
- आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन के स्टांप ड्यूटी के इस जटिल मसले को हल करते हुए फैसला दिया कि ज़मीन की कीमत उसके इस्तेमाल से तय होती है, न कि उसके क्लासिफ़िकेशन से, जैसा कि सरकारी वकील द्वारा पेश किए गए मास्टर प्लान में भी बताया गया।
मास्टर प्लान के वर्गीकरण से महत्व वास्तविक उपयोगकर्ता का
दरअसल शीर्ष अदालत के फैसले का सबसे अहम फैक्टर यही है। इस मामले मेंसुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के Circular No. 2/2004 की भाषा पर ध्यान दिया। कोर्ट के अनुसार औद्योगिक जमीन की वैल्यूएशन के संबंध में सर्कुलर मुख्य रूप से यूजर पर केंद्रित था, न कि केवल इलाके के वर्गीकरण पर। सर्कुलर के अनुसार, डॉक्यूमेंट के एग्जीक्यूशन के समय यदि ज़मीन इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में है, या वह रीको इंडस्ट्रियल एरिया में है, या उसे इंडस्ट्रियल मकसद के लिए कन्वर्ट किया गया है, तो इंडस्ट्रियल रेट पर वैल्यूएशन का प्रोविज़न है।इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह नतीजा निकाला कि इस मामले में लैंड यूज हिसाब से वैल्यूएशन तय किया जाएगा, न कि मास्टर प्लान में उसके वर्गीकरण से।
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