CJI सूर्यकांत को जस्टिस मेहता की चौथी चिट्ठी, राजस्थान HC जज पर फिर गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को चौथी बार पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर न्यायिक जांच में दखल और प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। मेहता का तर्क है कि उन्होंने पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया था, पर अब तक कोई कारवाई नहीं हुई, और उन्होंने जांच समिति की स्वतंत्रता व गोपनीयता के उल्लंघन की ओर इशारा किया है।

सौजन्य से:- Hindustan
CJI सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट जज की चौथी चिट्ठी, राजस्थान HC के जज पर फिर गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को चौथी चिट्ठी लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर न्यायिक जांच में दखल और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग समेत गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक और पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जस्टिस मेहता का आरोप है कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस शर्मा ने प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक आंतरिक न्यायिक जांच में हस्तक्षेप किया। यह जस्टिस मेहता की ओर से CJI को लिखा गया चौथा पत्र है, जिसमें उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के जज के आचरण का मुद्दा उठाया है।
पहले भी तीन पत्र लिख चुके हैं जस्टिस मेहता
जस्टिस मेहता ने इससे पहले 2, 10 और 17 अगस्त को भी पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने उस समय राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर ‘कुशासन’, ‘अनियमितताओं’, ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘पक्षपात’ के आरोप लगाए थे।
इन पत्रों के बाद हाईकोर्ट के एक वकील ने विरोध भी जताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस संजय के. अग्रवाल के नाम की सिफारिश की, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी।
जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा के तबादले और राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग भी की थी। उनका कहना था कि उनकी लगातार अपीलों पर CJI सूर्यकांत ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
चौथी चिट्ठी में क्या आरोप लगाया?
अपने चौथे पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि उनके पास जस्टिस शर्मा के कथित मनमाने, संदिग्ध और बेहद अधिकारवादी रवैये से जुड़े और भी तथ्य एवं सामग्री है। उन्होंने हाईकोर्ट की उस शिकायत समिति का हवाला दिया, जिसका गठन एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए किया गया था। इस न्यायिक अधिकारी पर एक महिला अधिकारी के मोबाइल फोन पर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाने का आरोप लगाया गया था। जस्टिस मेहता के मुताबिक, शिकायत समिति ने 21 मई 2026 और 9 जुलाई 2026 के अपने दो प्रस्तावों में जस्टिस शर्मा के जांच प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप का उल्लेख किया था।
जांच की स्वतंत्रता प्रभावित होने का दावा
जस्टिस मेहता ने पत्र में दावा किया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप से शिकायत समिति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और इससे पूरी जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवेदनशील जांच से जुड़ी गोपनीयता का उल्लंघन हुआ।
जांच से जुड़े रिकॉर्ड साझा करने का भी आरोप
जस्टिस मेहता ने शिकायत समिति के रिकॉर्ड को लेकर भी गंभीर आरोप लगाया। उनके मुताबिक, समिति ने यह भी पाया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने समिति से जुड़े रिकॉर्ड रजिस्ट्री के दूसरे अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के साथ साझा करवाए। जस्टिस मेहता का दावा है कि इससे गंभीर आरोपों वाले न्यायिक अधिकारी के खिलाफ चल रही जांच की गोपनीयता भंग हुई।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
SC जज संदीप मेहता ने CJI को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान HC के जज पर शक्ति दुरुपयोग का आरोप

खुले नाले ने आगरा में मौतें, पर्यावरणविद अदालत की राह पकड़ने को तैयार

भैरूंदा से नेशनल लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता वाहन रवाना

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: निकिता गौड़ ने मध्यस्थों से अधिकतम मामलों के निस्तारण का आह्वान

सुप्रीम कोर्ट के जज ने सीजीआई को चौथा पत्र लिखा, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर दुरुपयोग का आरोप

मधेपुरा में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, 9500 मामलों के लिए 14 बेंचों के साथ

सुप्रीम कोर्ट ने TMC के साइनबोर्ड हटाने के मामले में दखल से इनकार, हाई कोर्ट में सुनवाई जारी

डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनेताओं की तुरन्त हिरासत की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा बयान
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए अधिवक्ताओं से सहयोग का आह्वान
- सुप्रीम कोर्ट की नई मासिक व्याख्यान श्रृंखला: कानून, न्याय और शिक्षा का सतत मंच
- शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता मोहीम शुरू
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के अनधिकृत साइनबोर्ड विवाद को हाईकोर्ट को सौंपा
- सुप्रीम कोर्ट ने विशेष NIA अदालतों की त्वरित स्थापना का आदेश, राज्यों को एक महीने में कार्यवाही करनी होगी
- सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता HC को TMC के बोर्ड हटाने के मामले में शीघ्र फैसला देने का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को कोलकाता साइनबोर्ड विवाद पर हाई कोर्ट में दलीलें पेश करने की इजाजत दी
- सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

