सिरमौर: अदालत ने उधार पर ईंधन बिल का रिकॉर्ड पेश करने की दी इजाजत
सिरमौर की अदालत में एक बड़ा आदेश दिया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता को उधार में तेल खरीदने से जुड़े मामले में ईंधन खरीद के बिल रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दी गई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत ने शिकायतकर्ता को रिकॉर्ड पर ईंधन बिल लाने की दी इजाजत
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अदालत-3
नाहन। अदालत ने उधार में तेल खरीदने से जुड़े एक मामले में बड़ा आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा की अदालत ने कानूनी देनदारी साबित करने के लिए शिकायतकर्ता को ईंधन खरीद के बिल रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दे दी है। इसके लिए अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 348 के तहत दायर अर्जी को मंजूर कर लिया है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता का दावा है कि आरोपी ने अपनी गाड़ी के लिए उससे उधार पर ईंधन खरीदा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसका पूरा रिकॉर्ड लेजर में दर्ज है और मूल बिल आरोपी को सौंप दिए गए थे। इस कानूनी देनदारी को अदालत में साबित करने के लिए शिकायतकर्ता ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने की गुहार लगाई थी। दूसरी ओर, आरोपी के वकील ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि शिकायतकर्ता मामला में रह गई कमियों को सुधारने के लिए ऐसा कर रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि इन बिलों पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं और यह पूरी तरह से फर्जी हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला अभी शिकायतकर्ता के साक्ष्य के दौर में है, इसलिए यह अर्जी मंजूर की जा सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सिर्फ रिकॉर्ड पर आने से ही बिल सच साबित नहीं हो जाते, शिकायतकर्ता को इन्हें पुख्ता सबूतों से साबित करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पक्ष को इन गवाहों से जिरह करने का पूरा मौका देने की बात कही है।
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अदालत ने इस आवेदन का निपटारा करते हुए दस्तावेजों को मुख्य मामला फाइल के साथ नत्थी करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को शिकायतकर्ता के गवाहों के लिए तय की गई है। अदालत ने साफ कर दिया है कि शिकायतकर्ता को गवाह पेश करने का यह आखिरी मौका दिया जा रहा है।-- -- -- --
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नाहन। अदालत ने उधार में तेल खरीदने से जुड़े एक मामले में बड़ा आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा की अदालत ने कानूनी देनदारी साबित करने के लिए शिकायतकर्ता को ईंधन खरीद के बिल रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दे दी है। इसके लिए अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 348 के तहत दायर अर्जी को मंजूर कर लिया है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता का दावा है कि आरोपी ने अपनी गाड़ी के लिए उससे उधार पर ईंधन खरीदा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसका पूरा रिकॉर्ड लेजर में दर्ज है और मूल बिल आरोपी को सौंप दिए गए थे। इस कानूनी देनदारी को अदालत में साबित करने के लिए शिकायतकर्ता ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने की गुहार लगाई थी। दूसरी ओर, आरोपी के वकील ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि शिकायतकर्ता मामला में रह गई कमियों को सुधारने के लिए ऐसा कर रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि इन बिलों पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं और यह पूरी तरह से फर्जी हैं।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला अभी शिकायतकर्ता के साक्ष्य के दौर में है, इसलिए यह अर्जी मंजूर की जा सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सिर्फ रिकॉर्ड पर आने से ही बिल सच साबित नहीं हो जाते, शिकायतकर्ता को इन्हें पुख्ता सबूतों से साबित करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पक्ष को इन गवाहों से जिरह करने का पूरा मौका देने की बात कही है।
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अदालत ने इस आवेदन का निपटारा करते हुए दस्तावेजों को मुख्य मामला फाइल के साथ नत्थी करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को शिकायतकर्ता के गवाहों के लिए तय की गई है। अदालत ने साफ कर दिया है कि शिकायतकर्ता को गवाह पेश करने का यह आखिरी मौका दिया जा रहा है।
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