अदाणी समूह के लिए अमेरिकी कोर्ट की बड़ी राहत, अदाणी पर मुकदमा जल्द बंद होने की उम्मीद
अमेरिकी अदालत में अदाणी पर आपराधिक केस खत्म होने जा रहा है, जज द्वारा सरकार से जानकारी मांगना एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता है. अदाणी समूह का कहना है कि लगाए गए आरोप कानून के अनुसार कमजोर हैं और इस मामले से निवेशकों का पैसा नहीं चला है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
अमेरिकी कोर्ट में बंद होगा अदाणी पर केस! कानूनी विशेषज्ञ क्रिस मैन बोले- 'जज सरकार को केस चलाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता'
अमेरिकी अदालत में अदाणी पर आपराधिक केस खत्म होना तय है; जज द्वारा स्पष्टीकरण मांगना सिर्फ एक सामान्य प्रक्रियात्मक औपचारिकता है: क्रिस मैन
Published : June 29, 2026 at 9:37 AM IST
न्यूयॉर्क: उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके समूह के लिए अमेरिकी अदालत से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा अदाणी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने की अर्जी पर वहां के फेडरल जज निकोलस गॉरॉफिस ने सरकार से कुछ और जानकारियां मांगी हैं. कानूनी जानकारों का कहना है कि जज का यह कदम केवल एक कागजी और कानूनी औपचारिकता है, और इससे मुकदमा खत्म होने की प्रक्रिया पर कोई रुकावट नहीं आएगी.
जज का सवाल पूछना सिर्फ एक औपचारिकता
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े कानूनी विशेषज्ञ क्रिस मैन ने इस मामले पर अपनी राय दी है. उन्होंने समझाया कि अमेरिकी फेडरल नियमों के 'रूल 48(ए)' के तहत, जब भी सरकारी वकील किसी चालू मुकदमे को वापस लेना चाहते हैं, तो उन्हें अदालत से मंजूरी लेनी पड़ती है.
क्रिस मैन के मुताबिक, "यह पूरी तरह से एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है. अमेरिकी न्याय विभाग के पास यह तय करने का पूरा अधिकार होता है कि उसे किस पर केस चलाना है और किसका केस वापस लेना है. अदालत कभी भी सरकार को जबरदस्ती मुकदमा चलाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती." अदालत ने अमेरिकी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 13 जुलाई 2026 तक का समय दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला महीनों के बजाय अगले कुछ हफ़्तों में पूरी तरह बंद हो जाएगा.
#WATCH | Naxos, Greece | On US District Judge Nicholas Garaufis' order asking the US Department of Justice (DOJ) to justify dropping charges against Gautam Adani and Sagar Adani, US Lawyer Chris Man says, " it is a fairly routine process. the government, the prosecution, the doj… pic.twitter.com/XHePF6QUdi
— ANI (@ANI) June 28, 2026
अदाणी समूह का पक्ष: आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं
अदाणी समूह की कानूनी टीम ने कोर्ट को बताया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कानून की नजर में बेहद कमजोर हैं. कंपनी के वकीलों ने 24 जून 2026 को अदालत को लिखे पत्र में साफ किया कि जिन पैसों के लेन-देन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका अमेरिका से कोई सीधा संबंध नहीं है. वे सारे सौदे गैर-अमेरिकी कंपनियों के बीच हुए थे और उन पर ब्रिटिश कानून लागू होते हैं.
अदाणी समूह ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला अमेरिकी अदालतों के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में आता ही नहीं है. इसके अलावा, रिश्वत के आरोपों को खारिज करते हुए भारत के एक पूर्व बड़े अधिकारी की गवाही पेश की गई है, जिसमें कहा गया है कि यह कोई रिश्वत नहीं बल्कि बिजनेस में दी जाने वाली एक साफ-सुथरी छूट थी. कंपनी ने यह भी कहा कि इस मामले से किसी भी निवेशक का एक भी रुपया नहीं डूबा है, क्योंकि सभी लोन और बांड का भुगतान समय पर सुरक्षित रूप से किया जा रहा है.
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